पापा ने मम्मी को दिलाया

संजय एक २१ साल का नौजवान था. वह एक बहुत पैसे वाले घर का इकलौता लडका था. उसके पापा का नाम गनेश और मम्मी का नाम शिला था. शिला की उमर ४७ साल की थी और गनेश की ५४ साल. गनेश का बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन का बडा बिज़नस था. शिला अपने आप को बहुत फिट रखती थी और उसने अपनी खूबसूरती को अच्छी तरह से मेन्टेन किया था.

उसे देखकर ऐसा लगता नही था कि वह एक २० साल के लडके की माँ है, बल्कि वह एक २८ साल की सेक्सी औरत लगती थी. शिला और संजय को साथ देखकर कई लोगो को वह दोनो भाई-बहन लगते थे.

शिला का बदन पूरा शेप मे था, बूब्स से लेकर कमर तक और कमर से लेके गान्ड तक. अपनी सुन्दरता पर उसे बहुत गर्व था, वह अक्सर फॅशनेबल कपडे पहनती थी.

संजय का अपने कॉलेज मे एक नेहा नाम की लडकी के साथ चक्कर था. नेहा की उम्र 20 साल थी और वो और संजय दोनो एक दूसरे को बहुत प्यार करते थे. पर नेहा एक साधारन परिवार से थी.

संजय के मम्मी पापा को संजय के नेहा के साथ चक्कर की भनक लग गई. संजय की मम्मी शिला के दिमाग मे यही था कि ये एक गरीब परिवार कि लडकी है जो संजय जैसे अमीर लडके को फसा कर उसकी दौलत हडपना चाहती है.

उसने नेहा के बारे मे पता लगाया और उसे मिलने के लिये बुलाया. जब वो नेहा से मिली तो उसने नेहा को खूब खरी खोटी सुनाई और उसे संजय से मिलने के लिए मना कर दिया. नेहा एक बहुत ही शान्त और अच्छे स्वभाव की लडकी थी और उसके दिमाग कोई गलत खयाल नही था.

वह शिला के इस बर्ताव से बहुत डर गई और उनके घर से रोते हुए चली गई. संजय घर आने के बाद शिला ने उससे झूठ ही कह दिया कि नेहा उसके घर पर आई थी और वह यह कह गई कि वह किसी और लडके से प्यार करती है. संजय अपनी मम्मी की हर बात मानता था तो उसने इस बात पर भी विश्वास कर लिया.

उसके बाद वो बहुत दिनो तक कोलेज नही गया और न ही नेहा के फोन या मेसेज का कोई जवाब दिया. काफी दिनो बाद जब वो कोलेज गया तो उसे पता चला कि नेहा की एक सडक हादसे मे मौत हो गई थी.

संजय को इस बात से कुछ दुख जरूर हुआ, उसने घर आने पर ये बात अपनी मम्मी को भी बताई. लेकिन उन्होने इस बात को ज्यादा सिरिअसली नही लिया और इस बात को भूल जानेकी सलाह दे दी.

पर नेहा की मौत के कुछ दिन बाद ही संजय की मम्मी शिला की तबियत बहुत खराब हो गई. वह एक तरह से पागल सी हो गई थी. संजय जब भी कमरे मे अपनी मम्मी के साथ अकेला होता था तो वो उसे कस कर गले लगा लेती थी |

कभी पीछे से आकर अपने बेटे को पकड लिया करती थी. एक दो बार तो संजय की मम्मी ने अपने बेटे को किस करने की कोशिश भी की और कई बार उसके लन्ड को भी सहलाया. संजय इन हरकतो से बहुत डर सा गया था और वो अपनी मम्मी के अब पास भी नही आता था.

संजय और उसके पिता ने उसे कई अच्छे से अच्छे डाक्टरोके पास ले जाकर दिखाया पर कुछ नही हुआ. शिला की हालत वैसे ही बनी रही. फिर उन्हे किसी ने सलाह दी कि उन्हे एक पन्डितजी के पास दिखाना चाहिए तो संजय और उसके पापा शिला को उनके एक जाने माने पन्डितजी के पास ले गये.

पन्डितजी ने शिला को देखते ही बता दिया कि इस पर एक अशुभ साया है. संजय और उसके पापा घबरा गये. उन्होने पन्डितजी से कहा कि इसका क्या इलाज है. पन्डितजी ने कहा कि तुम इस शनिवार को मेरे पास ले आना, उस दिन इसका इलाज खुद इसी के मुह से सुन लेना.

वैसे तो संजय और उसके पिता बहुत मॉडर्न विचारो के थे लेकिन शिला की बीमारी ने सबको हैरान करके छोड था. बडे से बडे स्पेशालिस्ट अगर हार चुके थे तो यह नुस्खा अपनाने मे क्या हर्ज होगा यह सोचकर वो दोनो पन्डितजी की बात मान गए.

उन्होने अपने घर की नौकरानी को शिला का खयाल रखने के लिये रखा था, शिला की बीमारी की बात उन्होने घर के बाहर किसी को नही बताई थी.

पन्डितजी के यहा से लौट आनेपर रात के वक्त संजय अपने कमरे मे सो रहा था. उसके कमरे के दरवाजे पर एक दस्तक हुई.

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उसने दरवाजा खोला तो वहा पर उसकी मम्मी थी जो दरवाजा खुलने पर एकदम कमरे के अन्दर आ गई और दरवाजा बन्द कर दिया. फिर उसने संजय को गले से लग लिया और उसके होठो को चूमने की कोशिश करने लग गई और अपने हाथ को संजय के लन्ड पर मसलने लग गई.

संजय ने इसका विरोध किया और अपनी मम्मी को एक झटके के साथ दूर किया. संजय ने ढकेलने पर शिला धम्म से बेड पर गिर गई और बेहोश हो गई. संजय ने अपनी मम्मी की साँसे चेक की, वो तो चल रही थी.

उसने किसी को न जगाते हुए अपनी मम्मी को उठाकर उनके कमरे मे ले जाकर बेड पर लिटा दिया और खुद अपने कमरे मे आकर बेड पर लेट गया. वह उस वक्त बहुत घबरा गया था पर उसने ये बात किसी को नही बताई.

शनिवार के दिन संजय और उसके पिता शिला को फिर से पन्डितजी के पास ले गये. पन्डितजी ने उसे एक गोल चक्र के बीच मे बिठा दिय और कुछ मन्त्र पढने शुरु किये. धीरे धीरे शिला के अन्दर का वो साया उस पर भारी होने लगा और शिला थोडी पागलो वाली हरकते करने लगी. पन्डितजी ने उससे पूछ

कौन हो तुम?

उसने जवाब दिया मै नेहा हूँ

यह सुन कर संजय की तो बोलती बन्द हो गई. पन्डितजी ने फिर पूछा

तू इसके शरीर मै क्या कर रही हो आप यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |  उसने जवाब दिया यह औरत और इसका बेटा मेरी मौत का कारन है, मुझे इनसे बदला चाहिय. मुझे इसके बेटे के साथ शादी करके सुहागरात मनानी है.

इतना कह कर शिला जोर जोर से हसने लगी और बेहोश हो गई.

पन्डितजी ने संजय से अपनी माँ को सम्भालने के लिये कहा. संजय के पापा ने पन्डितजी से पूछा कि यह क्या था पन्डितजी जी.

पन्डितजी ने कहा कि यह सब सच ही था जो आपने देखा. यह जो लडकी आपकी बीवी के अन्दर है यह इसके शरीर को तब तक नही छोडेगी जब तक इसका बदला पूरा नही हो जाता. संजय के पापा ने कहा

पर पन्डितजी जी इसके बदले का मतलब ये है कि संजय को अपनी माँ से शादी करके सुहागरात मनानी होगी.

पन्डितजी ने कहा यही तो इसका बदला है. यह ऐसा साया है जो अपना बदला पूरा न होने पर शरीर को मार देन्गे और कभी आपके बेटे का पीछा नही छोड़ेंगे. आप चाहे किसी के पास चले जाओ कोई इसका इलाज नही कर सकता

संजय और गनेश शिला को लेकर घर आ गये और शिला को उसके कमरे मे ले गये. वह पर उन्होने २-३ नौकरानियो को रख दिय और २४ घन्टे शिला का ध्यान रखने को कहा.

गनेश और संजय बाहरके कमरेमे मे आकर बैठ गए. गनेश के चेहरे पर थोडा गुस्सा था. वो गुस्से से संजय से बोला, ये सब तेरी वजह से हुआ है. तुझे ज्यादा प्यार का भूत सवार हो रखा था. अब देख तेरे उस भूत ने तेरी माँ का क्या हाल कर दिया है

संजय भी गुस्सेसे बोला,

ये मेरी वजह से नही हुआ, ये आप लोगो की वजह से ही हुआ है. अगर मम्मी उस दिन नेहा से प्यार से बात कर के उसे समझा देती तो ये सब न होता. पर आपको तो अपनी दौलत का घमन्ड दिखाना था. अब क्या कर सकते हो उस दौलत से यह कह कर संजय वहा से चला गया.

कुछ दिन तक संजय और उसके पापा मे ऐसी ही खिटपिट होती रही. फिर एक दिन संजय और गनेश दोनो घर मे बैठे थे तो गनेश ने कहा,

संजय मै पन्डितजी जी के पास गया था. पन्डितजी जी ने बताया कि वो भूतनी जो तेरी माँ के अन्दर है वो जो मान्ग रही है उसे इस रविवार तक न मिला तो वो तेरी मम्मी को खतम कर देगी. संजय आश्चर्य से बोला,

पर पापा रविवार तो परसो ही है, तो फिर क्या करना है?

गनेश ने कहा,

करना क्या है, जो वो कह रही है वो ही करना पडेगा. और तो कोई चारा भी तो नही है संजय ने कहा,

पापा आप मजाक तो नही कर रहे. आपने सुना नही था उस दिन क्या कहा था उसने. ये तो असम्भव है गनेश ने कहा,

देखो संजय मैने पन्डितजी जी से बात की थी, उन्होने कहा कि यही एक आखरी मौका है जिस्से शिला बच सकती है. नही तो हम उसे हमेशा के लिये खो देन्गे. यह सब तुमसे शुरु हुआ था, अब तुम्हे ही इसे खतम करना होगा. ये बात बस हम दोनो के बीच मे ही रहेगी संजय थोडी देर तक चुप रहा और फिर बोला,

पापा मुझे सोचने के लिये वक्त चाहिये.

गनेश ने कहा, तेरे पास आज का दिन है सोचने के लिये. अब तेरे उपर ही है की तू अपनी मम्मी को जिन्दा देखना चाहता है या नही. यह कहकर गनेश वहा से चला गया.

शुक्रवार की रात को संजय गनेश के कमरे मी आया और बोला, पापा मै इसके लिये तैयार हूँ, पर मेरा एक सवाल है. क्या आप इस बात को सहन कर पायेन्गे की आपके बेटे ने ही आपकी वाईफ के साथ शादी रचाई और उसके बाद सुहागरात भी मनाई. गनेश थोडी देर चुप रहा और बोला,

देखो बेटे मुझे पता है की ये तेरे लिये मुश्किल है पर जितना तेरे लिये ये मुश्किल है उससे कई गुना ज्यादा मेरे लिये मुश्किल है.

मै इसे एक बुरे सपने की तरह भुला देना चाहता हूँ. और यही मै आगे करून्गा, इसे एक बुरे सपने की तरह भुला दून्गा और यही सलाह मै तुम्हे भी देना चाहून्गा संजय ने कहा, ठीक कहते हो आप पापा. ऐ वैसाही करने के लिए तैयार हूँ

गनेश ने संजय से कहकर एक जगह बुक कर ली जहा पर शादी और बाकी सारे रस्मो रिवाज होनेवाले थे. पन्डितजी जी ने कहा था की कोई भी ऐसी चीज मत करना जिससे उसे ये लगे की ये बस उससे छुटकारा पाने के लिये किया जा रहा है.

अगली सुबह गनेश संजय और शिला उस बुक की हुई जगह पर चले गये. वह जाकर उन्होने कपडे बदल लिए. गनेश ने पहले से ही शादी का सारा इन्तजाम करवा रखा था. पन्डितजीजी भी वहा पर मौजूद थे.

मुहुरत के हिसाब से फेरे दोपहर के १ बजे शुरु हुए और सभी रस्मो रिवाजो मे शाम हो गई. उसके बाद वो तीनो गाडी मे बैठ कर वापिस घर की ओर चल दिये.

घर उस जगह से लगभग २ घन्टे की दूरी पर था. गनेश गाडी चला रहा था और संजय भी उसके साथ आगे बैठा था, शिला पीछे अकेली बैठी थी. कुछ दूर चलने पर शिला बोली, संजय मेरे पास पीछे आ कर बैठो न.

गनेश ने संजय को जैसा वह कहे वैसे ही करने के लिए कहा. संजय पीछे बैठ गया और गनेश गाडी चलाने लगा. कुछ दूर पहुँचते ही शिला ने अपना हाथ धीरे से संजय के लन्ड पर रख दिया और उसे मसलने लगी.

संजय को बहुत अनकम्फर्टेबल फील हो रहा था पर वो कुछ बोल नही सकता था क्योन्कि आगे पापा बैठे थे |

उन्हे कैसा लगता कि एक माँ अपने बेटे का लन्ड सहला रही है और वो भी उसके बाप के सामने. पर असलियत तो ये थी की गनेश को मिरर मे से सब दिख रहा था की उसकी बीवी अपने बेटे का लन्ड सहला रही है.

पर वो भी चुप रहा और बस गाडी चलते रहा. कुछ देर बाद शिला ने हाथ हटा लिया और अपना सिर संजय की गोदी मे रख दिया. संजय का लन्ड खडा हुआ था और उसे अपने लन्ड पर अपने मम्मी के मुँह का स्पर्श महसूस हो रहा था.

शिला कभी कभी अपनी जीभ भी उसके लन्ड पर पँट के उपरसे लगा रही थी. ऐसा करते करते हुए ना जाने शिला को कब नीन्द आ गई और संजय ने उसे थोडा साईड मे लिटाया और खुद साईड मे हो कर बैठ गया. सारे रस्ते पर संजय और गनेश एक दूसरे से कुछ नही बोले.

जब वो घर पहुँच गये तो संजय ने सोई हुई शिला जगाना ठीक नही समझा. उसे लगा कि अगर वो सोती रही तो उसका काम आसान हो जाएगा. उसने शिला को ऐसे ही उठा कर जाके सुहागरात वाले कमरे मे लिटा दिया और खुद बाहर आ गया.

उस वक्त रात के ८ बज चुके थे. संजय बाहर आकर बाहरके कमरे मे बैठ गया. वही उसके पापा बैठे थै जो शराब पी रहे थे. गनेश ने कहा, अभी भी सो रही है क्या? संजय ने हा कह दी. गनेश ने कहा, वो बात याद रखना संजय जो मैने कल बताई थी, कोई ऐसी चीज मत करना या कहना जो उसे बुरी लगे. जैसा वो कहे करते जाना.

संजय ने फिरसे हामी भर दी. गनेश वहा से उठ कर शराब की बोतल लेकर अपने कमरे मी चला गया. लगभग आधे घन्टे बाद गनेश फिर बाहरवाले कमरे मे आया तो उसने संजय को अभी भी वही बैठा पाया. गनेश को शराब बहुत चढ चुकी थी. उसने संजय से कहा, ओय, तू अभी तक गया नही, आज तेरी सुहागरात है तेरी मम्मी के साथ.

वो तेरा इन्तजार कर रही होगी और तू यहा बैठा है. तेरा लन्ड लेने की बहुत जल्दी है उसे, साली गाडी मे ही चुदने को तैयार थी. बहुत खुजली रहती है उसकी चूत मे, साली मुझसे चुदती है तो बहुत उछल उछल के देती हू.

आज अच्छे से चोद दियो अपनी मम्मी की चूत और उसकी गान्ड जरूर मारियो. सारा मजा तो गान्ड मे ही है. चल अब जा, मेरा मुँह क्या देख रहा है. जा जाकर सुहागरात मना.

अपने पिता के मुँह से ऐसी गन्दी बाते सुनकर संजय डर गया. लेकिन फिर वो समझ गया कि उस वक्त उसके पापा नशेमे मे चूर थे. पपा की बातोका उसपर असर जरूर हो रहा था, उसके लन्ड मे तनाव आना शुरु हुआ. उसे यह भी डर था कि उसके पापा को कुछ हो न जाए. उसने पापा को कहा,

पापा आप कमरे मे जा कर सो जाईए, आपको शायद कुछ ज्यादा हो गई है.

गनेश बोला, अबे ये तो मैने तेरी और तेरी माँ की शादी की खुशी मे पी है, जा जाकर मजे कर जा

संजय कुछ नही बोला, बस थोडी देर और वही खाडा रहा. गनेश बोला, अच्छा मै समझ गया, तू अपने पापा की इजाजत चाहता है अपनी मम्मी को चोदने से पहले. चल ठीक है, तू मुझ से पूछ, पापा क्या मै अपनी मम्मी को चोद लू अन्दर जाके. संजय हक्का बक्का रह गया.

पापा आप ये क्या कह रहे हो, प्लीझ आप अपने कमरे मे चले जाईये.

गनेश ने कहा, हा हा, मै जाऊन्गा, चल बस तू एक बार पूछ ले मुझसे, मै चला जाउन्गा. और उसने संजय का हाथ कस के पकड लिया. संजय समझ गया कि उसके पापा अपनी जिद पूरी किए बिना नही मानेन्गे. थोडी देर वो तक वही चुप चाप खडा रहा और फिर धीरे से मायूस आवाज मे बोला,

पापा मै मम्मी को चोद लू अन्दर जाके. गनेश ने कहा, जा मेरे बेटे, अच्छे से चोद जाके उस बहन की लौडी को. फिर गनेश ने खुद ही संजय को सुहागरात वाले कमरे के पास ले जा कर जबरदस्ती अन्दर ढकेल दिया और दरवाजा बन्द कर दिया.

संजय जैसे ही अन्दर गया, उसने देखा कि बेड पर शिला एक सी-थ्रू गाऊन पहन कर बेड पर लेटी थी. उसने न ब्रा पहनी थी और न ही पँटी.

संजय के अन्दर आते ही वो बेड पर बैठ गई. संजय ने दरवाजी की कुन्डी लगा थी और कमरे मी लाईट बन्द करना चाहा लेकिन शिला ने हाथ से इशारा करके उसे ऐसा करने से रोक दिया. शिला बोली,

आओ संजय, मेरे बेटे, आके अपनी मम्मी के पास बैठो. आज तुम्हारी सुहागरात है तुम्हारी मम्मी के साथ. अब तो तुमारे पापा ने भी कह दिया है की मम्मी को जम के चोदना आज रात.

शिला की आवाज बिलकुल बदली बदली सी लग रही थी. संजय थोडा गुस्सेसे बोला, नेहा ज्यादा चालाकी मत करो, मै जानता हूँ कि तुम मम्मी के शरीर मे प्रवेश कर के यह सब करना चाहती हो. तुम नेहा हो मम्मी नही. बार बार मुझे बेटा कहकर मत बुलाओ , मुझे संजय कहो.

नेहा की आत्माको ये बात बुरी लगी. वह डरावनी आवाज मे बोली, मै नेहा नही शिला ही हूँ तेरे लिये आज की रात, तेरी सुहागरात तेरी मम्मी के साथ है, आज तुम उसे ही चोदोगे, और अब मुझे गुस्सा दिलाने की कोशिश की तो ये तुम्हारे और तुम्हारी इस रन्डी माँ के लिये अच्छा नही होगा.

संजय को अपने पापा की बात याद आ गई की उसे कुछ बुर मत लगने देना. वो चुप चाप जा कर अपनी मम्मी के पास बैठ गया और बोला,
ठीक है, जैसा तुम कहो मम्मी यह कहते हुए संजय ने नजरे नीचे झुकी थी और आवाज धीमी हुई थी.

शिला बोली, मुझसे डरो मत बेटे. चलो पहले ये कपडे उतार दो और थोडा रिलॅक्स हो जाओ संजय ने कपडे उतार दिये और सिर्फ बनियान और अन्डरवेअर मे आ गया. इसी अवस्था मे वह अपनी मम्मी के पास बैठ गया.

शिला ने कहा, तुम तो अभी भी डरे-सहमे से लग रहे हो, रिलॅक्स हो जाओ शिला ने संजय के जान्घो पर अपना हाथ रख दिया और बोली, संजय बेटा एक बात बताओ, तुमने पहले कभी किसी लडकी के साथ सेक्स किया है क्या?

संजय ने सिर्फ गर्दन हिलाई.

शिला(मतलब नेहा) खिलखिलाकर हँस पडी. तो आज तुम पहली बार अपनी मम्मी को चोदोगे….खैर कोई बात नही, चलो डरो मत. मै तुम्हे आज रात मे लडकियो की चुदाई मे माहिर बना दून्गी.

वैसे तुम भी तैयार लगते हो यह कहते हुए शिला ने संजय के लन्ड पर अन्डरवेअर के उपरसे अपना हाथ रखकर सहलाया. संजय और भी शरमा गया लेकिन उसका लन्ड थोडा सख्त होने लगा था. वो कुछ नही बोल पा रहा था. आप यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

शिला ने कहा, देखो संजय अगर तुम्हे ऐसे ही चुप चाप रहना है तो तुम जा सकते हो इस कमरे से बाहर, तुम्हे जबरदस्ती सुहागरात मनाने की कोई जरुरत नही है. और तुम्हे इसका अन्जाम भी पता है की क्या होगा उसके बाद संजय कुछ बोला नही पर उसने मन ही मन सोच लिया की मम्मी को ठीक करने का यही एक मौका है तो मुझे अपनी फीलीन्ग्स भूल जानी होगी.

उसने ठान लिया की वह अब मम्मी के साथ अब बिलकुल एक आम लडकी की तरह बर्ताव करेगा. फिर कुछ सोचकर वह बोला, नही मम्मी ऐसी बात नही है. आज आपकी और मेरी सुहागरात है और मै भी इस दिन को एन्जोय करना चाहता हूँ.

आपको मेरा लन्ड अच्छा लगा न मम्मी, अभी तो आपने उसे छुआ ही था. अभी आप देखोगी तो आप हैरान हो जाओगी. पापा का लन्ड भी इतना बडा नही होगा.