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सौतेली माँ मेरा लंड हिलाने लगी

मेरा नाम ललित है और मैंने बारहवीं के एग्जाम दिए हैं। मेरे पिताजी एक बहुत ही पैसे वाले व्यक्ति हैं। उन्हें अपने पैसे का बहुत ज्यादा घमंड है। इसलिए वह कभी भी मुझसे अच्छे से बात नहीं करते और ना ही मेरी मां से। उन्होंने कभी भी मेरी माँ से अच्छे से बात नही की। जिसकी वजह से मेरी मां बहुत ही परेशान भी रहती थी और वह बहुत ज्यादा टेंशन भी लेती थी। मैं बचपन से ही उन्हें देखता आ रहा हूं वह बहुत ही ज्यादा टेंशन में रहती और मुझे कई बार उन्होंने कहा भी है कि मैं तुम्हारे पिताजी की वजह से मैं बहुत ही ज्यादा टेंशन लेती हूं। क्योंकि उनका बर्ताव बिल्कुल भी अच्छा नहीं है। वह जहां भी जाते हैं वहीं पर झगड़ा कर लेते हैं।

मेरे पिताजी ने मेरी माँ को पता नही कितने सालो से अपने घर भी नहीं जाने नहीं दिया और ना ही हमारा कोई भी रिश्तेदार अब हमारे घर पर आता है। बस कुछ गिने-चुने उनके दोस्त हैं जो हमारे घर पर आते हैं। मैं भी अपने किसी दोस्त को अपने घर पर नहीं बुलाता था। क्योंकि मुझे मेरे पिताजी का बर्ताव पता था। वह कभी भी किसी को भी डांट सकते थे। इसलिए मैंने कभी भी अपने दोस्तों को भी घर पर नहीं बुलाया। मैं कभी कभी अपने दोस्त के घर ही चला जाया करता था जब भी मेरा मन होता था। क्योंकि अब मैंने एग्जाम भी दे दिए थे और मैं खाली ही बैठा हुआ था। इसलिए मैं ज्यादातर अपने दोस्तों के पास ही चला जाता था और कभी अपने मां के पास ही रहता था।

मेरी एक बहन है जिसने लव मैरिज कर ली थी और उसने मेरे पिताजी के खिलाफ वह शादी की थी। इसलिए मेरे पिताजी ने कभी भी उसे घर पर आने नही दिया और ना ही उससे बात करते हैं। वह कभी कबार मुझे फोन कर के मेरे हाल चाल पूछ लिया करती है और कभी मेरी मां को भी फोन कर देती है लेकिन उसकी भी शादी के बाद घर आने की  हिम्मत नहीं होती थी। वह सिर्फ फोन पर ही बातें किया करती है। जब भी मेरे पिताजी घर पर होते है तो मैं अपने काम पर ही लगा रहता हूं लेकिन मैं उनसे बात ही नहीं करता था। जब बहुत ही ज्यादा जरूरत पड़ती तो ही मैं उनसे कुछ कहता हूं।

एक दिन मेरी मां की तबीयत अचानक से बहुत ज्यादा खराब हो गई और वह मुझे कहने लगी कि मेरी तबीयत बहुत खराब है। मैंने यह बात अपने पिताजी को भी बताई की मां की तबीयत बहुत खराब हो गई है लेकिन उन्होंने फिर भी ध्यान नहीं दिया और बात को हल्के में ले लिया। उन्होंने कहा कि जाओ बगल वाले डॉक्टर को दिखाकर ले आओ लेकिन वहां तो कोई गंभीर समस्या हो चुकी थी। जब हम उन डॉक्टर के पास गए तो उन्होंने सिर्फ हमें दवाइयां दी और उसके आगे उन्होंने कुछ भी नहीं बताया।

ऐसे ही मेरी मां की तबीयत बहुत ज्यादा बिगड़ती चली गई। यह बात मैंने अपनी बहन को बताई तो उसने अपने पति से बात की और हम लोग उन्हें एक बड़े हॉस्पिटल में ले गए। मेरे जीजा ने ही सारा खर्चा उठाया। डॉक्टर ने बताया कि शायद वह कुछ ज्यादा ही टेंशन लेती है। इस वजह से उनकी तबीयत खराब होती जा रही है। मुझे तो यह बात पहले से ही पता थी कि मेरे पिताजी की वजह से उनकी तबीयत खराब हो रही है लेकिन मैं किसी के सामने बता नहीं सकता था.

अब अचानक से उनकी तबीयत इतनी ज्यादा बिगड़ गई कि डॉक्टरों ने भी हाथ खड़े कर दिए और कुछ दिनों बाद मेरी माँ का देहांत हो गया लेकिन मेरे पिताजी को इस बात से कुछ भी फर्क नहीं पड़ा। मुझे इस बात का बहुत ही सदमा लगा था और मैंने कई दिनों तक किसी से अच्छे से बात भी नहीं की। मैं घर पर अपने कमरे पर ही बैठा रहता था लेकिन मेरे पिताजी को इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि मैं कितना दुखी हूं और मैं अंदर से कितना टूट चुका हूं। फिर ऐसे ही समय बीतता चला गया और मैं समय के साथ थोड़ा ठीक हो गया।

एक दिन मुझे पता चला कि मेरे पिता जी ने दूसरी शादी कर ली। मुझे इस बात का बहुत ही बुरा लगा लेकिन अभी मैं कुछ कर भी नहीं सकता था। उन्होंने अपनी उम्र से बहुत ही छोटी लड़की से शादी की। लड़की के घर वाले बहुत ही गरीब थे। इस वजह से उन्होंने उसकी शादी करवा दी। जब वह हमारे घर पर आयी तो उसने मुझे देखा और मुझसे मेरा नाम पूछने लगी। मैंने उसे अपना नाम बताया और मैंने भी उससे उसका नाम पूछा। उसका नाम महेक था और उसकी उम्र 30 वर्ष की थी।

जब भी उसे टाइम मिलता तो वह मुझसे बात कर लिया करती और मुझे भी उससे बात कर के थोड़ा हल्का महसूस होता था। क्योंकि मैं घर से बाहर भी नहीं जाता था और ज्यादा किसी से बात भी नहीं करता था। उसने मुझसे पूछा कि तुम्हारी मां का देहांत कैसे हुआ। मैंने उसे सारी बात बताई और जब उसने वह बात सुनी तो उसे भी बहुत बुरा लगा और वह कहने लगी कि तुम्हारे पिताजी ने बहुत ही गलत किया। वह यदि समय पर तुम्हारी मां का इलाज करा देते तो शायद वह ठीक हो सकती थी। मैंने उसे कहा कि यह बात तो मुझे भी पता है। यदि वह समय पर मेरी मां का इलाज करा देते तो मेरी माँ ठीक हो सकती थी।

मैंने उनसे कहा की मैं इस बात के लिए कभी भी अपने पिताजी को माफ नहीं करने वाला हूं। उनका जिस तरीके से रवैया है वह बिल्कुल अच्छा नहीं है। कुछ दिनों बाद उनका यही रवैया महेक के साथ भी होने लगा और वह भी टेंशन में रहने लगी। मुझे उसे ऐसे देखकर बहुत ज्यादा बुरा लगता था लेकिन मैं भी मजबूर था। मैं महेक की मदत करने की सोचता भी था लेकिन मैं कुछ नही कर सकता था।

एक दिन मेरे पिताजी का झगड़ा महेक से हो गया और वह बहुत ज्यादा रोने लगी। रोते-रोते वह मेरे कमरे में ही आ गई और मेरे बगल में सो गई। मैं भी लेटा हुआ था वह बहुत ज्यादा रोने लगी और मुझसे लिपट गई। जैसे ही वह मुझसे लिपट कर रोने लगी तो उसके स्तनों मुझसे टकरा रहे थे और मेरा लंड खड़ा होने लगा। उसने भी यह सब देख लिया था और उसने तुरंत ही मेरे लंड को पकड़ लिया। अब वह उसे हिलाने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जब वह मेरे लंड को हिला रही थी। मैंने उसके होठों को किस कर लिया अब मैं उसके पूरे शरीर को अपने हाथों से दबाने लगा। मैंने उसकी गांड को भी अपने हाथों से दबाया और उसके स्तनों को भी अपने हाथों से दबाने लगा।

अब थोड़ी देर में वह बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गई। मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिए और उसने भी मेरे कपड़ों को उतार दिया। मैंने जैसे ही उसके शरीर को देखा तो मैं दंग रह गया उसका शरीर बहुत ही ज्यादा मुलायम और नाजुक था। मुझे वह देखकर बहुत ही खुशी हो रही थी कि वह मेरी सौतेली मां है। मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू किया और बहुत ही अच्छे से मैं उसकी चूत को चाट रहा था। उसका पानी निकल रहा था और मैंने वह भी अच्छे से चाट लिया। मैंने उसके स्तनों को भी अपने मुंह में कुछ देर तक चूसना शुरू किया और ऐसे ही चूसता रहा। मैंने उसके पूरे शरीर को अपनी जीभ से अच्छे से चाट लिया था।

अब उसकी ठरक बहुत बढ़ गई मैंने अपने लंड को निकालते हुए उसकी योनि में डाल दिया। जैसे ही मैंने उसकी योनि में डाला तो वह बड़ी तेज चिखने लगी और मै ऐसे ही धक्के मारता था। मैंने उसे इतने तेज झटके मारे कि मुझे कहने लगी कि तुम्हारे अंदर तो कुछ ज्यादा ही गुस्सा मुझे दिखाई दे रहा है। मैंने उसे छोड़ा नहीं मैं उसे ऐसे ही कसकर पकड़ कर चोदा जाता। उसके गले से बड़ी तेज आवाज निकलने लगी और वह बहुत तेजी से चिल्ला रही थी। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जब वह इस तरीके से मादक आवज निकाल रही थी मुझे भी अच्छा लगता। मुझे ऐसा लग रहा था मानो मेरी इच्छा पूरी हो गई होगी ।

मैंने पहली बार किसी को चोदा था और वह भी इतनी मस्त माल को मैं वैसे ही धक्के दिए जा रहा था वह अब भी बड़ी तेज चिल्ला रही थी। मैंने उसके दोनों पैरों को कसकर पकड़ लिया और उसके चूतड़ों पर बहुत तेजी से झटके मारता तो वह लाल हो गए थे। उसका शरीर गर्म होने लगा था उसी गर्मी के बीच में ना जाने कब उसकी योनि में मेरा माल जा गिरा और मैंने अपने लंड को बाहर निकालते हुए थोड़ी देर ऐसा ही लेटा रहा। वह मेरे लंड को दोबारा से चूसने लगी उसने इतने अच्छे से मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर लिया कि मेरा मल ना जाने कब गिर गया मुझे मालूम भी नहीं पड़ा। हम दोनों बात करते-करते पता नहीं कब सो गए उसके बाद से तो मैंने उससे पता नहीं कितनी बार चोदा होगा।

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