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Mastram Ki Hindi Sex Stories | Mastaram Ki Antarvasna Stories | मस्ताराम की हिंदी सेक्स कहानियां

मामी को पटाकर चोदा

हेल्लो दोस्तों मेरा नाम प्रेम है (नाम चेंज किया गया हैं )  और मै गुजरात सुरत से हूँ मेरी  उम्र 21साल है ।
ओर यह मेरी पहली कहानी हैं।  जो मेरे साथ घटी एक सच्ची घटना हैं। ओर जिसको मे आज आप सभी को सुनाने जा रहा हूँ ओर मे उम्मीद करता हूँ कि यह आप सभी को जरूर पसंद आएगी ! वैसे मे पिछले कुछ सालों से सेक्सी कहानियाँ पढ़ता आ रहा हूँ।  यह कहानी मेरी ओर मेरी मामी की हैं ।

मामाजी की शादी को 4  साल पहले हुईं थी मामाजी की उम्र 25 साल ओर मामी की 21 साल के करिब थीं
मेरी मामी का नाम हेमा  (देवी )ओर उनकी साइज कुछ खास तो नहीं थीं पर ठीक ठाक  है ।ओर मेरा घर मामाजी के घर से थोड़ा ही दूर हैं ।ओर मेरी मामा मामी के साथ अच्छी जमती हैं। ओर मामी मेरी अच्छी दोस्त बन गईं ।लेकिन मैंने कभी भी मामी को बुरी नजर से नहीं देखा था।

लेकिन एक दिन मे मामी से मिलने गया। तब मैंने देखा कि मामी सो रही थीं ……उन्हें जब देखा तो देखता ही रह गया । ओर मेरा मुड़ भी खराब हो रहा था। क्योकि  जब मैंने मामी को देखा तो  वो सो रही थीं । और उनकी साड़ी जाघो से भि ऊपर थी ।ओर उनकी चिकनी जाग्रे ओर उनकी सफेद कलर की छड़ी  (पेंटी ) एकदम साफ :साफ  दिख रही थीं ।
अब मेरे मन मे भि मामी के लिए गलत  विचार आने लगें ।अब मैंने भि मामी को चोदने का प्लान  बनाने  लगा। लेकिन मन मे डर भि लग रहा था।

क्योकि मैंने कभी ऐसा नहीं सोचा था।मेरा लड खड़ा था।उस दिन मुझे नींद भी नहीं आ रही थी ।ओर मामी की चिकनी जाघे और उनकी सफ़ेद छडी (पेंटी ) मेरी आखो के सामने बार बार  आ रही थी ।

फिर 3’4दिन बाद मे मामी के पास गया । और ड़र-ड़र के उनसे कहाँ कि मुझे मेरे दोस्तों ने सेक्स की गोलियाँ खिलादी हैं । तो मे क्या करूँ  फिर मैंने भी बोल दिया की मै आपसे बहुत प्यार करता हूँ । और फिर क्या मैंने मामी को कस कर पकड़ लिया ओर उनको किस करने लगा । और उनके बूब्स दबा रहा था।

तभी मामी ने मुझे जोर से धक्का दिया   ओर मुझे जमीन पर गिरा दिया ओर मुझसे कहने लगीं की यह सब गलत हैं ।ओर कहाँ कि मे तेरे मामा को बता दूंगी । आप यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | फिर मैंने मामी से माफी माँगी और वहाँ से चला गया फिर 2-3 महीने तक मामी के घर नहीं गया  फिर एक दिन मामी हमारे घर पर आई तभी मेरे घर के सदस्य  पड़ोसी के यहां कुछ काम से गये थे ।
तभी मामी ने कहा की मुझसे नाराज हो क्या मुझसे बात भी नहीं करते ओर  आज कल घर पर भि नहीं आते।तभी मामी मेरे पास आई और मुझसे से लिपट गई ओर कहाँ कि मुझे माफ कर दो। फिर मामी ने मुझे I LOVE Uकहां ओर मे भी आपसे बहुत प्यार करतीं हूँ |

फिर मामी ने मुझे बताया की वह उस दिन ड़र गई थी ।फिर मैंने भी मामी को कस कर पकड़ लिया ओर कीस करने लगा  करीब 7-8 मिनट  तक कीस किया ।फिर मैंने उनके बोल दबा  रहा था ।तभी मुझे मेरे घर वालों की आवाज सुनाई दी फिर मे और मामी  कपड़े ठिक करके t.v.  देखने लगे।

फिर मामी को अपना मोबाइल नंबर दिया 4-5 दिन हमने बहुत बात की । और फिर एक दिन  मामा को शाम को किसी की पार्टी मे जाना था ।

और वह चलें गये करिब रात के 8 बजे मामी का फोन आया और कहा की आप घर पर आ जाईये ।आपके मामाजी बाहर गये हुए हैं ।

और यह बात सुनकर 5 मिनट मे मामी के घर पहुँच गया। और दरवाजा खटखटाइया ओर मामी ने दरवाजा  खोला तो मे मामी को देखता ही रह गया ।मामी ने लाल कलर की साड़ी पहनी हुईं थी ।और वह एक नंबर की माल लग रही थी ।फिर  घर मे गया और मामी ने मुझे पानी ला कर दिया फिर गिलास रखने रसोई की तरफ जा रही थी ।तभी मैंने मामी को पिचे से पकड़ लिया और उनको किस करने लगा फिर मैं मामी को लेकर दूसरे कमरे मे आ गया ।और उनके चूतड़ो को साड़ी के ऊपर से ही दबाने लगा ।

मैं पहले धीरे- धीरे  फिर जोर जोर से मामी के चूतड़ो को साड़ी के ऊपर से रगड़ रहा था ।फिर एक-एक करके मैंने मामी के कपड़े ऊतारे पहले तो मैंने मामी की लाल रग की साड़ी उतारी फिर मामी की चूची को दोनों हाथों से ब्‍लाउज के ऊपर से ही सहलाने लगा और साथ ही धीरे धीरे एक एक करके बटन भी खोलता जा रहा था।फिर जब मैंने सारे बटन खोल दिये फिर ब्‍लाउंज और पेटीकोट को भि निकाल दिया ।

अब मामी पेंटी और ब्रा  मे ही थी । और पेंटी ब्रा का कलर भी  लाल ही था । उनको भी  निकाल फेंका अब मामी मेरे सामने एक दम नंगी थी ।अब मैंने मामी की टांगों को चौड़ा किया और उनकी दोनों टांगों के बीच में लेटकर अपना सिर मामी के  चूत के होठों को सहलाने लगा। मामी धीरे धीरे तड़प रही थी और सिसकारियाँ भर रही थी।जब मामी को सब्र नहीं हुआ तो उन्‍होंने खुद ही कहा- अब और न तड़पाओ और जल्‍दी से चूत चाटो।

मैंने अपना सिर उठाया और मामी की चूत के पास ले गया और मामी की बुर के मोटे होंठों को चाटने लगा। अब तो मामी की बुर के होंठ पहले से भी ज्‍यादा मोटे लग रहे थे  अब मैं मामी की चूत के होठों को मुँह में भर भर कर चूसने लगा।मामी को सब्र नहीं हो रहा था और वे मेरा सिर पकड़कर अपनी चूत पर दबा रही थी। शायद मामी चाहती थीं कि मैं उनके दाने को कसकर चाटूं लेकिन मैं ऐसा कर नहीं रहा था तो उन्‍होंने मेरा सिर पीछे किया और अपनी उंगलियों से अपनी चूत को खोला और कहा- यहाँ पर चाटो।

मैं मुस्‍कुराकर वहाँ पर चाटने लगा और अब मैं पूरे जोश मे चाट रहा था। मामी बुरी तरह से बिस्‍तर पर हिल रही थीं और मेरे सिर को पकड़कर दबा रही थीं। आप यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | मैंने मामी की चूत के दाने को अपने होठों में दबाया और जीभ से जोर से रगड़ दिया। मामी ने मुँह से जोर से चीख निकली और शांत हो गईं। मामी झड़ चुकी थी। अब मामी ने मेरे सिर को ऊपर उठाया तो मेरा मुंह उनके चूत-रस से सना हुआ था। मामी ने मुझको अपने ऊपर खींचा और मेरे मुँह को चाटने लगी। जब वो सब कुछ चाट चुकीं तो ।मैंने  मामी की एक चूची को हाथ से पकड़कर धीरे धीरे सहलाने लगा और । अब मैं मामी की चूची को दोनों हाथों से  सहलाने लगा और साथ ही  मैंने मामी की खूबसूरत गोरी गोरी चूचियों को हाथों मे भर लिया और अपने होठों को चुचूक पर लगा कर चूसने लगा।

उनमें अभी भी दूध तो  आ रहा था किन्‍तु मैं जानता था | मामी स्‍नेह से मेरे बालों में हाथ फिर रही थी और ऐसे अपने दूधों को दबा दबा कर पिला रही थीं जैसे कि मैं उनका बच्‍चा हूँ। अब मामी ने मुझे उठाया और पीठ के बल लिटा दिया। इतनी देर तक मजे के दौरान कब मेरे कपड़े मामी ने निकाल दिये मुझे पता ही नहीं चला। अब मामी मेरे लंड को अपनी गोरी गोरी  उंगलियों से सहला रही थीं।

लगता था कि उनका लंड चूसने का इरादा था और हुआ भी यही। मामी ने धीरे से अपने  होंठों को लंड के पास लाईं और उसका टोपा अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगीं। मुझे ऐसा लगा की मे शवँग मे पहुँच गया हूँ। क्‍योंकि मैं इतना उत्‍तेजित हो चुका था अब खुद के संभाले नहीं संभल पा रहा था। कई  मिनटों बाद ही मैंने मामी का सिर उठाया और उनको पकड़कर अपने ऊपर खींच लिया। मेरे इस तरह खींचने से मामी को ऐसा लगा मानो मामी प्‍यासी रह गईं हों।मैंने मामी से कहा- लंड फिर बाद में चूस लेना, अभी मैं तुम्‍हें चोदना चाहता हूँ।

मामी मान गईं और मुस्‍कुरा पड़ीं। अब मामी ने मेरा लंड पकड़ा और अपनी चूत का निशाना बनाया और उस पर बैठती चली गईं। आह कितना शानदार अहसास था वह, इतना मजा आया कि इसे शब्‍दों में बयान नहीं किया जा सकता। मानो मैं जन्‍नत में पहुंच गया होऊँ। उधर मामी की हालत भी मुझसे जुदा नहीं थी। वो तो आँखें बंद किये अपने होंठों को खोले मानो स्‍वर्ग में तैर रही हों। मैंने मामी को अपने ऊपर लिटा लिया और उनके होंठों को अपने मुँह में भरकर चूसने लगा। मामी धीरे धीरे ऊपर से झटके लगा रही थीं तो मैं भी कहाँ पीछे रहने वाला था। मैं भी मामी को बाहों में भरकर पहले धीरे-धीरे फिर तेज-तेज जोरदार झटके लगाने लगा।

मैं अपने हाथों को मामी के चूतड़ों पर ले गया। वाह ! कितने अच्‍छे और मजा देने वाले थे मामी के चूतड़ ! हर एक झटके में जब वो ऊपर को उठतीं तो उनके चूतड़ भी ऊपर को उठते और मेरे हाथ पीछे हो जाते और जब वो मेरे लंड पर बैठती तो मेरे हाथ उनके चूतडों पर कस जाते।वाह क्‍या मजा आ रहा था।

कहानी जारी है ….. आगे की कहानी पढने के लिए निचे लिखे पेज नंबर पर क्लिक करे …..

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The Author

गुरु मस्तराम

दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त मस्ताराम, मस्ताराम.नेट के सभी पाठकों को स्वागत करता हूँ . दोस्तो वैसे आप सब मेरे बारे में अच्छी तरह से जानते ही हैं मुझे सेक्सी कहानियाँ लिखना और पढ़ना बहुत पसंद है अगर आपको मेरी कहानियाँ पसंद आ रही है तो तो अपने बहुमूल्य विचार देना ना भूलें

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