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पति के इन्तेजार में भांजे से चुदी-2

यह कहानी निम्न शृंखला का एक भाग है:

पति के इन्तेजार में भांजे से चुदी-1

हेल्लो मै अंकिता आज फिर से मै आप लोगो के सामने हाजिर हूँ मेरी ये रियल स्टोरी पढ़ कर आप लोग मेरे बदन की कल्पना कर सकते है अभी तक आपने पढ़ा की .. थोड़ी देर बाद वह मेरे ऊपर से हट गया और मैं तुरंत उठी और बाथरूम मे घुस गई और खुद को साफ़ किया पहली बार ,उस रात हम पूरी तरह संभोग नही कर पाए | खुद को साफ़ करने के बाद ,कुछ और देर ,बाथरूम मे ही रही और यह एहसास हुआ कि मैंने अपने भांजे को चूसा है |

एक धक्का लगा | निश्चित रूप से किसी भी तरह से मैं अपने भान्जे से किसी प्रकार का यौन स्पर्श नहीं रखना चाहती थी | किन्तु मेरे बगल में बिस्तर पर लेट्कर उसने मुझे फ़िर से छूना आरम्भ किया तो मैं अपने आप पर नियंत्रण नहीं रख सकी और मैंने तय किया कि अगले दिन ,अब मैं उससे साफ़ साफ़ कह दूंगी कि जो हुआ वह गलत और दुर्घटना के समान था और अब वह इस तरह की कोई अपेक्षा भविष्य मेम न करे मैं बेडरूम में गई और पाया कि वह पड़ा सो रहा है मैं उसी के बगल में जितना दूर बना सकती थी ,दूर हो कार लेट गई और सो गई | अगले दिन रोज से थोडा देर लगभग सात बजे उठी पाया कि उसकी एक भुजा मेरे बदन के आर पार रखी हुई थी ,हौले से उसकी बाजू अपने बदन से हटाई और दैनिक कार्यों से निबटने के लिए उठ गई |

लगभग आठ बजे ,रसोई में नाश्ता बना रही थी कि एकाएक मुझे लगा कि दो हाथों ने मेरे स्तनों को पीछे से पकड़ लिया है और जिसने पकड़ा है वह अपना शरीर को मेरी पीठ पर दबा रहा है| वह मेरा भान्जा था जो उठ गया था ,मैने सोचा कि वह रात मे जो नही कर पाया उसे आगे बढ़ाना चाहता है अर्थात सीधी सी बात कि वह अब मुझे चोदना चाहता है उसका चेहरा मेर कन्धे का अवलम्ब लिये हुए था और वह मेरे कन्धे पर कोमलता से चुम्बन अंकित कर चुका था |

मैं पहले बताना भूल गई कि पिछ्ली रात्त बाथरूम में मैंने नाईटी बदल कर साड़ी पहन ली थी और वह कन्धे पर ब्लाउज व कन्धे के बीच गर्दन पर चूम रहा था | आप यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

यह सब इतना तेजी से हुआ कि जब तक मैं समझ पाती वह मेरे गले के बाद अब मेरे गालों को चूमने लगा |

मैंने उसके हाथ अपने वक्ष से हटाने का प्रयास किया और उसे खुद से परे धकेलने का प्रयास किया किन्तु मैं जितनी कोशिश उसे धकेलने मे करती वह और जोर से मेरी स्तनों को अपने हाथों से दबाता जाता और मेरे गालों को पीछे से ही चूमता जाता और वह मेर कन्धे के ऊपर से ही मेर स्तनो को चूमने की कोशिश कर रहा था |

एक बार फ़िर से मै ने अहसास किया कि उसका खड़ा हुआ लण्ड मेरी साड़ी के ऊपर से मेरे नितम्ब प्रदेश मे रगड़ खा रहा था | वह मेरी साड़ी का पल्लू मेरे कन्धे पर से गिराने मे सफ़ल हो गया और मेर स्तनों को इस तरह से अपने हाथों से इस प्रकार से दबा रहा था कि वे ब्लाउज के अन्दर ही ऊपर को उठ जा रहे थे कि उनका काफ़ी हिस्सा ब्लाउज के ऊपर से दिखने लगता था | यद्यपि पिछ्ली रात मैंने तय किया था कि अब उससे अब किसी भी प्रकार के यौन सम्बंध नहीं रखूँगी ,किन्तु लगातार साड़ी के ऊपर से अपने नितम्बों के मध्य लगातार उसके लिंग का अनुभव तथा लगातार स्तनों के मर्दन के कारण धीरे -धीरे अपना प्रतिरोध कमजोर पड़ता महसूस कर रही थी उसके चुम्बनों ने मेरी भवनाओं को सुलगा दिया और मुझमें और अधिक पाने की अपेक्षा उमड़ने लगी |

उसके स्पर्श का प्रतिरोध धीरे धीरे कमजोर पड़ता गया और यह इच्छा बलवती होने लगी कि वह मेरे बदन का हर सम्भव तरीके से उपभोग कर मेरी दमित इच्छाओं की और भड़काए और उन्हे किसी प्रकार से शांत करे |

अब मैंने अपनी बाहों से अपने ब्लाउज से उभरे वक्ष को छुपाने का कमजोर सा प्रयास किया ,उसके हाथ मेरी बाजुओं के नीचे से मेरे स्तनो दबाए हुए थे | तब उसने पीछे से मेरी गर्दन को पुनःचूमना शूरु कर दिया और ब्लाउज के ऊपर से मेरी खुली पीठ को अपने होंठों से छू कर मेरी दबी आग को भड़्काने लगा उसका सिर ऊपर से नीचे की ओर जा रहा था और उसके होठ और जीभ मेरी पीठ पर घूम रहे थे और उसके हाथ बदस्तूर मेरे वक्ष का मर्दन कर रहे थे| अब वह मेरे पीछे अपने घुटनो के बल हो कर मेरे स्तनों को मसले जा रहा था और उसकी जीभ मेरे कटि प्रदेश पर भ्रमण कर रही थी जहाँ मेरी साड़ी पेटीकोट पर लिपटी थी अब उसने मेरे पीछे से कमर पर जीभ और होठ फ़ेरते हुए मेरे नितम्बों को मेरी साड़ी के ऊपर से दबाना और कचोटना शुरू कर दिया |

एक हाथ से वह मेरी कमर को अप्ने नजदीक रखने मे इस्तेमाल कर रहा था और दूसरे से क्रम बदल कर मेरे चूतड़ों को दबा और निचोड़ रहा था | मुझे लगता है कि शायद मैं भी उसके स्पर्श का प्रतिरोध न कर के उसका साथ अपने नितम्बों को उसकी ओर झुका कर देने लगी थी |

उसने मेरी साड़ी को मेरी कमर से अलग करने का प्रयास किया ….. वह मेरी कमर से साड़ी को उतारने की कोशिश कर रहा था, लेकिन वह कसकर पेटीकोट के अंदर सिकुडन थी. मैं अनजाने में उसकी मदद के लिए अपना हाथ आगे करने का फैसला किया और अपनी कमर के एक ओर अपने पेटीकोट से बाहरअपनी साड़ी खींच ली .

अब मनीष ने मेरी कमर से मेरी साड़ी को हटाने में कोई समय बर्बाद नहीं किया. अब मैं सिर्फ एक ब्लाउज और पेटीकोट में अपने भान्जे के सामने खड़ी थी और उसके हाथ मेरे बदन पर ऊपर से नीचे आ जा रहे थे और बदन की गर्मी महसूस कर रहे थे   मनीष अपने पैरों पर वापस गया और मुझे पीछे से अपने आगोश मे भर लिया . एक बार फिर उसका लिंग मेरे नितबों पर अपनी धड़्कन का अनुभव करा रहा था इस बार मैं ने अपने हाथ पीछे ले गई और और धीरे से उन्हे उसकी कमर पर इस तरह से रखा कि उसे यह अह्सास हो जाये कि मैं उसे अपने ऊपर चाहती हूँ ~-

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यह देखकर, मनीष ने मेरे स्तनों पर अपने हाथ डाल दिए लेकिन इस बार, वह मेरे ब्लाउज के बटन को खोलने की कोशिश कर रहा था. मेरे ब्लाउज पर बटन सामने की ओर थे वह ऊपर वाले बटन को तोड़ने में कामयाब रहा और दूसरा बटन खोलने के लिये परेशान हो रहा था मैंने उसे अपने बटन को खोलने में मदद करने का फैसला किया. इस सब के बावजूद , मैं उसेअपने ब्लाउज के सभी बटन को तोड़ने नहीं देना चाहती थी | लेकिन वह बहुत अधीर था और इससे पहले कि मेरे स्तनों को पूरी तरह से मेरी ब्रा में से आजाद कराता , मेरे ब्लाउज के दो बटन तोड़ दिया . हाँ, मैं एक ब्रा पहने हुए थी. उसने मेरे कंधे तक मेरे ब्लाउज को खिसकाया और मेरे ब्लाउज को पूरी तरह से उतार दिया अब मैं अपनी ब्रा में थी

मेरे स्तनों के निरंतर मर्दन (निचोड़) और मालिश के कारण एक गहरी दरार दिख जाती थी | बस गया था.उसके हाथ मेरे स्तनों के नंगेपन की खोजकर रहे थेऔर फिर उसने अपना एक हाथ मेरी ब्रा के अंदर डाल दिया और मेरे निपल्सका स्पर्श करना शुरू किया.| आप यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

मेरा निपल्स कड़े होकर तन गए और वह अपनी उंगली मेरे कड़े होकर तन हुए निपल्स पर चल रहा था अब, मैं उसे पूरी तरह से अपने कब्जे मे लेना चाह रही थी और मैं उसकी कमर से अपना हाथ अपनी पीठ और उसके शरीर के बीच से ले जा कर उसके लण्ड को अपने हाथ ले लिया और और उसके शॉर्ट्स के ऊपर से दबा दिया .मैं अपने हाथ ऊपर ले गई और धीरे – धीरे उसके शॉर्ट्स के अंदर और उसके अंडरवियर के अंदर अपना हाथ ले गई और उसके नग्न गर्म लिंग का स्पर्श किया और साथ ही उसे पकड़ लिया और दूसरे हाथ से , मैंने उसके शार्ट्स को नीचे खींच लिया |

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अब उसका खड़ा और गीला लण्ड मेरे हाथ में उसके शॉर्ट्स के बाहर था | मनीष ने एक पल के लिए मेरी ब्रा के अंदर से अपना हाथ हटा लिया और जल्दी से अपने शॉर्ट्स को पूरी तरह से उतार दिया. अब वह सिर्फ मेरे पीछे अपनी बनियान में था, जबकि मैं अपनी ब्रा और पेटीकोट में थी. इसी लियेउसने मेरे पेटीकोट भी उतारने की कोशिश की. दुर्भाग्य से मेरे पेटीकोट गाँठ भी मजबूत थी और वह इसे खोलने में असमर्थ था. उसने मेरी कमर के नीचे मेरे पेटीकोट खींचने की कोशिश की, लेकिनउतार न सका |

तब मैंने अपनी कमर से अपना पेटीकोट उतारने की कोशिशा की और कमोत्तेजना के आधिक्य के कारण मैं अपने पेटीकोट को उतार न पाई |

तब मनीष ने मेरी कमर से मेरा पेटीकोट खींचना शुरू किया और अपने हाथों और उंगलियों से मेरी जांघों और भीतरी जांघों की नग्नता का आनंद ले रहा था | मैंने उसके लंड पर ,जो कल रात से भी बड़ा लग रहा था ,अपने हाथ से हल्के – हल्के प्रहार करना आरम्भ किया उसके लंड ने उत्तेजना के कारण यौन रस प्रवाहित करना आरम्भ कर दिया था | और जिसके चलते मेरा हाथ उसके रस से चिपचिपा हो रहा था |

मेरी हथेली पर ढेर सारा रस इकठ्ठा हो गया था कभी कभी, मैं उसके लंड और उसकी नोक पर और उसके आसपास यौन रस का अनुभव अपने हाथ पर उसे सहलाते हुए पा रही थी | इस दौरान, वह मेरी कमर से मेरी पेटीकोट को ऊपर उठा पाने में कामयाब रहा और अब अचानक वह अपने घुटनों पर फिर से चला गया (और मेरे हाथ से बाहर अपने मुर्गा) और मेरी नितम्ब को चूमने लगा.

कहानी जारी है ….. आगे की कहानी पढने के लिए निचे लिखे पेज नंबर पर क्लिक करे …..

The Author

गुरु मस्तराम

दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त मस्ताराम, मस्ताराम.नेट के सभी पाठकों को स्वागत करता हूँ . दोस्तो वैसे आप सब मेरे बारे में अच्छी तरह से जानते ही हैं मुझे सेक्सी कहानियाँ लिखना और पढ़ना बहुत पसंद है अगर आपको मेरी कहानियाँ पसंद आ रही है तो तो अपने बहुमूल्य विचार देना ना भूलें

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