वीर्य की आखिरी बूंद भी नौकर ने मेरी बहन की बुर मे झाड़ दी -2

गतांग से आगे ….

पर पिछले महीने बहुत बड़ी प्रॉब्लम हो गयी। ऋषि दो महीने के लिए टूर पर गया था, तब हमेशा की तरह हम एक दूसरे में खोये थे। जी भर कर चुदने के बाद हम उठकर तैयार होने ही वाले थे |

कि उतने में ऋषि आ गया और उसने हमें रंगे हाथों पकड़ लिया। आप यह कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | उसके बाद हम दोनों के बहुत झगड़े हुए। ऋषि ने अमर को घर से निकाल दिया और मुझे मुँह ना खोलने के शर्त पर घर में रख लिया।

ऋषि भी अब सारे टूर कैंसिल कर के घर में ही रहता। जैसे कि वह मेरा वॉचमैन ही हो। मैं किसी को कुछ बता भी नहीं सकती थी आज तुम्हें सरप्राइज देने के लिए मैं जल्दी यहाँ आ गयी, दो बजे, तब अमर ने दरवाजा खोला। उसे देखते ही मेरी चुत ने पानी छोड़ा और हम फिर से एक हो गए।

पर रजनी, इतना कुछ हुआ, तुमने मुझे बताया क्यों नहीं? मैं उसकी कहानी सुनकर बोली।

कैसे बताती, पहले तो मैं कामक्रीड़ा में व्यस्त किसी की परवाह नहीं थी और बाद में ऋषि ने मुझे किसी को बताने के लिए मना किया था.
ह्म्म्म अच्छा मैं बोली।

रजनी ने अपनी घड़ी की तरफ देखा तो शाम के सात बजे थे, वह जल्दी से उठी और मुझे बोली- चलो दीदी, मैं चलती हूँ ऋषि मेरी राह देख रहा होगा नहीं तो वह इधर आ जायेगा और उसने अमर को यहां देख लिया तो मेरी खैर नहीं!
ऐसा बोलकर वह बाथरूम जाकर फ्रेश हुई और चली गई।

रजनी चली तो गयी पर मेरे अंदर आग लगाकर गयी। उसकी शादीशुदा जिंदगी में और मेरी शादीशुदा जिंदगी में ज्यादा फर्क नहीं था। जैसे ऋषि टूर पर होता था वैसे ही नितिन टूर पर होता था। इसकी वजह से मेरी भी सेक्सुअल हैरेसमेंट हो रही थी। सेक्स करने से पहले कुछ ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है पर एक बार सेक्स करो तो सेक्स की भूख बढ़ जाती है, या यु कहो कि उस भूख का अहसास हो ज्याता है और फिर वह भूख अब जरूरत बन जाती है।

तो दोस्तो, क्या मैं अपनी भूख को अपने अंदर ही मार कर घुट घुट कर जीती रहूं, या फिर अपनी बहन की तरह अमर के साथ अपने अंदर लगी सेक्स की आग को शांत कर लूं?

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