ताल ठोक बुर फूली चुद चुद उठ कहती धर लौड़ा

ताल ठोक बुर फूली चुद चुद उठ कहती धर लौड़ा (मस्ताराम डॉट नेट) – नान वेज कविता

तंदुरुस्त बुर जबर देखता लंड खड़ा अंगड़ाया
आह जोड़ टक्कर की गज़ब उठा भिड़ने को आया
चपक जांघ धर पुट्ठे चाहे लंड दिया बुर आए
मसक बदन छातियाँ रगड़ कस ठोके चूत उड़ाए

चटक चटक तोड़े नस नस जूझे घमासान भयानक
चीथे लंड ललाया छिल बुर बिखरी ठुकी भकाभक
ले साली कह पटक लंड बुर दौड़ चला कस भींचे
उमग उठी ललकार लंड बुर पकड़ कसी धर खींचे

ताल ठोक बुर फूली चुद चुद उठ कहती धर लौड़ा
कम न लपक लीली रख आऊँ रह आता तू दौड़ा
जितनी तगड़ी चूत हुमक उठ जो जितनी ललकारे
मानो उतनी लंड लुभाये लड़ती बुर वह प्यारे

मल्ल मस्ताराम चूत जो जितनी लड़ी मज़ा कस देती
उन्मद भर आनंद चुदी भिड़ मस्त लंड कर देती |

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