सपाट बुर भरी आह तक लंड न्यौत रह जाती

सपाट बुर भरी आह तक लंड न्यौत रह जाती ( सेक्सी कविता दोस्तों के लिए )

भर कंदुक जुग तन गुलाब छातियाँ लचकती आईं
किसमिस गाँठ भरी रस फूलीं चढ़ ठुनके थी छाईं
कसीं गुबारे सीं गदबद उछली लच लच थी जातीं
चोंच अंगूरी शिखर चूचियां तन तन तीर चलातीं

सुतवाँ चिकनी रेशम टांगें लहर मचलती आएं
आजा रे आजा रह भिड कह रख टांगें ललचाएं
चितवनि धार कटार सलोनी तकी निशाने मारे
कसी जांघ कटि क्षीण बुर छिपी खड़ा लंड रख झारे

झांट सुनहरी मखमल कोमल बिछी बिछौने आती
पट सपाट बुर भरी आह तक लंड न्यौत रह जाती
रति झीनी लाली अधरों पर खिली महक मुसकाती
सजी थाल भर भर मोती झर झर दिल लूटी आती

अलक घनी मुख कोमल चंद सजी झूमी लहराए
भरी नयन हरिणी मरती झटकी चूमी रह आए
लदी डाल फूलों सी झुक झूल लहर उमगती बाँहें
मिट मिट पसरें कसी लपट रह मिटें लता सी चाहें

सरित पुनीता तन चन्दन गति मंद पवन सी लहरी
अंग अंग तूफ़ान उफनती चाहत चुदने गहरी |

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