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आंटी की ठुमकती गांड और कामुक कहानी

हैल्लो दोस्तों, में आदि एक बार फिर से आप सभी के सामने अपनी एक और सच्ची कहानी लेकर आया हूँ. मेरा नाम आदि है और में देहरादून से हूँ. मेरी उम्र 24 साल, रंग साफ और दिखने में एकदम मस्त मेरी लम्बाई 5.8 इंच है और मेरे लंड की लम्बाई 7 इंच और 5 इंच मोटा है. अब में सीधा अपनी आज की चुदाई की दास्तान पर आ जाता हूँ. दोस्तों यह मेरी और मेरी आंटी की चुदाई की दास्तान है.

पहले में बता दूँ कि मेरी आंटी का नाम वंदिता है. गोरा रंग, बड़े बड़े बूब्स, अच्छी खासी गांड, बड़ी बड़ी आखें, सुंदर गोल चेहरा. लेकिन वो बहुत ही हॉट है और उनकी कामुक अदाए किसी को भी लट्टू कर दे. दोस्तों उनकी उम्र 34 साल की है और उनके दो बच्चे है, एक लड़का और एक लड़की और दोस्तों यह बात आज से बीस दिन पहले की है. में अक्सर मेरे अंकल के घर पर जाता था, लेकिन कभी भी मैंने आंटी को ऐसी नज़र से नहीं देखा था.

लेकिन अचानक से पिछले कुछ दिनों से मुझे आंटी के व्यहवार में बहुत बदलाव दिखने लगा था. वो मुझे कुछ अजीब सी नजरों से देखने लगी थी और जब में उनके घर पर जाता, तो आंटी अपना सभी काम-काज छोड़कर मेरे साथ बैठकर बातें करने लग जाती और मेरी हर बात को बहुत जल्दी मान जाती और मुझे कभी भी, किसी भी काम के लिए मना नहीं करती और वो धीरे धीरे मुझमें कुछ ज्यादा ही रूचि ले रही थी और में गौर कर रहा था कि आंटी में धीरे धीरे बहुत कुछ बदलाव आ गया है. लेकिन में जोश में होश नहीं खोना चाहता था और मैंने कुछ दिनों तक उन्हे ऐसे ही देखा और फिर एक दिन आंटी का कॉल आया.

में : हैल्लो.

आंटी : हाय आदि कैसे हो?

में : में बिल्कुल ठीक हूँ, आंटी और आप कैसी हो?

आंटी : हाँ में भी अच्छी हूँ.

में : और बताओ आज मेरी याद कैसे आई?

आंटी : कुछ नहीं बोर हो रही थी तो सोचा कि तुझे बुला लूँ क्योंकि मुझे थोड़ी शॉपिंग पर जाना था, लेकिन क्या तुम फ्री हो?

में : हाँ आंटी, में एकदम फ्री हूँ.

आंटी : तो फिर तुम अभी आ जाओ.

में : ठीक है आंटी.

तो में बीस मिनट के बाद उनके घर पर पहुंच गया और जैसे ही दरवाजे पर लगी घंटी बजाई, आंटी ने झट से दरवाजा खोला जैसे कि वो मेरा ही इंतजार कर रही हो, वो मुझे देखकर एकदम खुश हो गई, उनके चेहरे की चमक और भी बड़ गई. उन्होंने मुझे कुछ सेकण्ड तक घूरकर देखा और फिर बोली कि अंदर आओ ना आदि में बहुत बोर हो रही थी, क्योंकि तेरे अंकल आने वाले दो दिन के लिए किसी काम से आउट ऑफ स्टेशन गए हुए है और मेरे दोनों बच्चे अपने मामा के घर पर चले गये.

में सोफे पर बैठा हुआ था और वो ठीक मेरे सामने आंटी उस समय एकदम टाईट सलवार-कमीज़ में थी, जिसमे से उनके हर एक अंग का आकार साफ साफ दिखाई दे रहा था और उनके बूब्स कपड़े फाड़कर बाहर आने को मचल रहे थे. फिर वो उठकर किचन की तरफ गई और मेरे लिए पानी लेकर आई और फिर झुककर मुझे पानी दिया. तो ठीक मेरे सामने उनके बड़े ही सेक्सी बूब्स नजर आने लगे और वो जानबूझ कर बहुत देर तक मुझे अपने बूब्स के दर्शन देती रही, जिसको देखने के बाद मेरे पूरे जिस्म में एक अजीबो गरीब अहसास आने लगा और फिर मैंने पानी पिया और आंटी फिर से ठुमकती हुई अपनी गांड को मटकाती हुई किचन में चली गयी और फिर वो वहीं से बोली कि क्यों तुम चाय लोगे ना?

तो मैंने कहा कि हाँ आंटी. थोड़ी ही देर में आंटी चाय लेकर आई और मुझे चाय देकर मेरे सामने सोफे पर बैठकर चाय पीने लगी. में उनके सामने देखते हुए चाय पी रहा था और हमारे बीच इधर उधर की बातें चल रही थी. तभी बातों ही बातों में चाय मेरे पैर पर गिर गई और में एकदम खड़ा हो गया वो चाय बहुत गरम थी.

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आंटी बोली कि श्ईईई थोड़ा ध्यान से चलो अब जल्दी से पानी से धोलो और वो मुझे बाथरूम में ले गयी और मुझसे बोली कि साफ कर ले, में तुझे बदलने के लिए कपड़े देती हूँ. फिर मैंने साफ किया और बाहर निकला, आंटी ने अपने बेडरूम में अंकल का नाइट सूट रखा हुआ था. मैंने बिना कुछ बोले ही वो पहन लिया और बाहर निकला आंटी मुझे देखती ही रह गयी. फिर आंटी ने मेरी जीन्स को धूप में डाल दिया और हम वापस इधर उधर की बातें करने लगे.

आंटी : क्यों आदि, अब तुम्हे अच्छा महससू हो रहा है ना?

में : हाँ आंटी, अब में बिल्कुल ठीक हूँ.

आंटी : क्या तुम जल गये हो?

में : हाँ लेकिन कुछ ज़्यादा नहीं.

आंटी : तो मुझे दिखाओ ना.

में : नहीं आंटी, में अब ठीक हूँ.

तो आंटी ने ज़बरदस्ती मेरे सूट का नाड़ा खोल दिया और मेरी जांघ को छूने लगी, मेरी लाल लाल चमड़ी हो गयी थी और आंटी ने श्ईईईइ और नज़दीक आते हुए मेरी जांघ पर किस कर दिया. तो मेरा लंड तनने लगा और अंडरवियर में तंबू बन गया और लंड पूरा लोहे जैसा तन गया, आंटी लंड को घूरने लगी और फिर लंड को छुआ और धीरे से अंडरवियर में से लंड को बाहर निकाला और हाथ में ले लिया और बोली कि वाहहह आदि बहुत बड़ा लंड है तेरा और यह तो बहुत मस्त है. तो में आंटी के मुहं से लंड शब्द सुनकर एकदम चकित हो गया.

आंटी लंड को घूरते हुए धीरे धीरे मुठ मारने लगी और धीरे से लंड को मुहं में लेकर चूसने लगी. मेरे शरीर में एक करंट सा दौड़ पड़ा ऊऊहह अह्ह्ह्हह आंटी आप यह क्या कर रही हो? तो आंटी बोली कि मुझे वंदिता बोलो, आंटी मत कहो. में बहुत समय से तुम्हारा साथ चाहती थी. लेकिन तुम्हे मुझ में रूचि ही नहीं थी.

में : नहीं वंदिता, ऐसा नहीं है, मैंने कभी भी तुम्हारे बारे में ऐसा सोचा ही नहीं था.

वंदिता : आदि तुम बहुत ही हॉट हो, मैंने कई बार तुम्हारे नाम की उंगलियां अपनी चूत में की है और आज तो मुझे तुम्हे कैसे भी करके आकर्षित करना था, क्योंकि तुम्हारे अंकल भी अब मुझसे धोका कर रहे है क्योंकि बाहर उनका किसी औरत के साथ अफेयर है.

में : नहीं, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है और जब कि मुझे भी यह बात पहले ही अच्छी तरह से पता है कि अंकल का किसी और औरत के साथ चक्कर चल रहा है.

वंदिता : में जानती हूँ कि तुम्हे भी पता है कि उनका अफेयर है. लेकिन मुझे कोई फरक नहीं पड़ता. सब ठीक है वो दूसरी के साथ मज़े करते होंगे और अब में तुझसे संतुष्ट होना चाहती हूँ और अब तो हमे जब भी मौका मिलेगा हम सब कुछ करेंगे.

फिर उन्होंने मेरा लंड मुहं में भर लिया और चूसने लगी और वो लगातार लोलीपोप की तरह लंड चूस रही थी आअहह हमम्म्मम आदि आईईईईईईईईई बहुत ही मस्त लंड है तेरा, आहह आज से यह मेरा राजा है और अब मेरी चूत को यह जरुर ठंडक देगा और वो मेरे पूरे शरीर को किस करने लगी. वंदिता बहुत ही गरम हो चुकी थी और वो मुझे लगातार चूमती चाटती जा रही थी. फिर मेरा लंड मुहं में ले लिया और चूसने लगी और मुठ मारती रही, करीब दस मिनट तक मेरा लंड चूसती चूमती रही.

फिर मैंने वंदिता को उठाया और बेड पर लेटाया और सर से किस करता गया, पूरे चेहरे को किस कर करके लाल कर दिया. फिर होंठो को किस किया और अपनी पूरी जीभ को वंदिता के मुहं में अंदर बाहर करने लगा और वंदिता ने बहुत ही टाईट हग कर लिया और किसिंग में मेरा पूरा पूरा साथ देने लगी. 6-7 मिनट तक हमारा लिप किस चला. फिर में उसकी गर्दन पर आ गया और उसे चूमता गया और उसकी सलवार-कमीज़ को उतार दिया, गुलाबी कलर की ब्रा और पेंटी में वंदिता किसी परी से कम नहीं लग रही थी. में उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसके आधे बाहर निकले हुए बड़े बड़े बूब्स को चूसने चूमने लगा और दोनों हाथों से उन सुंदर बूब्स को मसलने, निचोड़ने लगा.

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में : वाह वंदिता तुम्हारा क्या मस्त फिगर है और इतना तो बता दो कि इसका साईज क्या है?

वंदिता : मेरे फिगर का साईज 36-30-38 है और वैसे अगर तुम खुद चाहो तो मेरा अच्छे से नाप ले सकते हो.

तो मैंने वंदिता की ब्रा के हुक को खोल दिया और एक टक नजरों से देखते ही रह गया. वो मेरे सामने पपीते की तरह झूल रहे थे और एकदम दूध जैसे सफेद बूब्स उस पर भूरे कलर की निप्पल मुझे पागल बना रही थी और फिर में वंदिता के बूब्स पर टूट पड़ा और भूखे शेर की तरह बूब्स को निचोड़ने लगा. तो वंदिता ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ लेने लगी और मेरे सर को अपने बूब्स पर दबाने लगी ऊऊऊऊहह आदि आईईईईईईईईई आआअहह और ज़ोर से और ज़ोर से चूसो इसे आज से यह सब तुम्हारा है आआहह उफ्फ्फफ्फ्फ़.

मैंने करीब 15-16 मिनट तक लगातार बूब्स चूस चूसकर लाल कर दिए और फिर वंदिता के पेट से होते हुए नीचे आकर उसकी पेंटी को उतार दिया. उसकी एकदम चिकनी, साफ बिना बालों की चूत मुझे ललचा रही थी और फिर मैंने वंदिता के दोनों पैरों को उठाया और उसके हाथों में पकड़ा दिया, तो वंदिता अपने दोनों हाथों से अपने पैरों को ऊपर किए हुई थी और मैंने बहुत ज़ोर ज़ोर से वंदिता की चूत को चूसा. लेकिन एकदम वंदिता उठकर खड़ी हो गई और उसकी आखें बड़ी हो गयी ऊऊहहहह वाह आदि आईईईईईईईईईईई मज़ा आ गया. फिर से करो तुम्हारे अंकल ने कभी भी इसे किस नहीं किया ज़ोर से चूसो इसे खा जाओ आहहहह.

तो मैंने एक बार फिर से ज़ोर से वंदिता की चूत को चूमा और चूसने लगा और लगातार वंदिता की चूत को चूमता रहा, चूसता रहा और अपनी पूरी जीभ को उसकी चूत में अंदर बाहर करने लगा. वंदिता चिल्ला रही थी, सिसकियाँ ले रही थी आआअहह आईईईईईईईईई ऊऊऊऊहह बहुत मज़ा आ रहा है आआअहह ऊऊऊहह. तो मुझे अब ऐसा करते हुए करीब 12-15 मिनट हुए होंगे वंदिता मोन किए जा रही थी ऊओहडिईईईईईईई. आदि में मरी और चूत में से नमकीन रस निकलने लगा और में वो पूरा रस पी गया और वंदिता बेड पर एकदम बेजान पड़ी हुई थी. लेकिन में फिर भी उसकी चूत को चूसता चूमता रहा.

फिर मैंने वंदिता को उल्टा लेटाया, उसके बूब्स को निचोड़े और उसके पूरे पिछले हिस्से को किस करता रहा और फिर हम 69 पोज़िशन में आ गए. वंदिता मेरा लंड चूस रही थी और में वंदिता की चूत को चूस रहा, उंगलियाँ कर रहा था और 5-6 मिनट तक ऐसा चलता रहा. फिर मैंने वंदिता को कमर के बल लेटाया और उसकी चूत पर लंड रगड़ रहा था. तो वंदिता चिल्ला रही थी आआअहह आदि आईईईईईईई कुछ करो और मेरी चूत में आह्ह्ह्ह जल्दी से ऊुउुज्ज्ज्ज्ज्ज्जीईईई लंड डाल दो आआआअहह.

फिर मैंने वंदिता के दोनों पैरों को अपने कंधे पर लिया और हल्के से एक धक्का लगाया चूत गीली होने की वजह से लंड का सुपाड़ा आराम से अंदर चला गया. लेकिन वंदिता ने मेरी पीठ पर अपने नाखून लगा दिए. तो मैंने ज्यादा देर ना करते हुए एक और ज़ोर से धक्का लगाया और इस बार मेरा 7.5 इंच का पूरा लंड वंदिता की चूत में था. वंदिता उईईईईइ माँ ओह्ह्ह्हह कर रही थी. आदि चोदो मुझे और चोदो ऊऊऊऊओह मेरी चूत को चोद चोदकर भोसड़ा बना दो आआहह ऊईईई.

में लगातार ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर उसकी चूत का भोसड़ा बनाने लगा और भी तेज धक्के लगाने लगा वंदिता बहुत ही कामुक आवाजें कर रही थी और आअहह आदि और आहह ज़ोर से चोदो उफ्फ्फ्फ़, 5-6 मिनट तक ऐसे ही चोदा, फिर एक पैर कंधे पर और एक पैर को घुमाकर कमर पर ले गया और चुदाई चलाई. थोड़ी देर बाद फिर से पोज़िशन बदल ली और वंदिता को मेरे ऊपर ले लिया और उसको घुड़सवारी कराई. उसके बूब्स उछलकूद कर रहे थे, मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. वंदिता अपने हाथों से अपने बूब्स को निचोड़ रही थी और ऊपर नीचे हो रही थी.

अब में जन्नत में था 5-6 मिनट तक ऐसे चलता रहा. फिर वंदिता को बेड पर उल्टा किया और धक्के लगाने लगा और अब वंदिता को भी बहुत मज़ा आ रहा था और थोड़ी ही देर के बाद वंदिता को बेड की तरफ घुमाया और पीछे से डोगी स्टाइल में चुदाई शुरू की, तो पूरे रूम में फच्छ फच्छ की आवाज़ गूँज रही थी और वंदिता की सिसकियों की आवाज़ आअहहहमम्म्मम माँ मरी आज आईईई आआआहह ऊऊऊहह वंदिता चिल्लाई आआहह आदि आईईईईईईई और फिर वंदिता की चूत में से मेरे लंड को भिगता हुआ रस निकलने लगा और वंदिता बेड पर बेजान गिर पड़ी. लेकिन फिर भी में वंदिता को चोदे जा रहा था और 3-4 मिनट के बाद वंदिता फिर से गरम होने लगी.

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फिर 5 मिनट तक उसकी चूत का भोसड़ा बनाया. फिर मैंने उससे कहा कि में झड़ने वाला हूँ. तो वंदिता ने कहा कि मेरे मुहं में डाल दो आदि, में पहली बार लंड रस पीना चाहती हूँ. तो मैंने अपना लंड उसको सोंप दिया, वंदिता मुठ मारने लगी और लंड को मुह में लेकर अंदर बाहर करने लगी और में दो मिनट में झड़ने लगा. वंदिता पूरा रस पी गई और उसने चूस चूसकर मेरा लंड साफ कर दिया और हम बेड पर नंगे पड़े रहे.

फिर 30 मिनट के बाद उठे और एक साथ में नहाने बाथरूम में चले गये और फिर से वंदिता मेरा लंड चूसने लगी. मेरा लंड फिर से तन गया. वहां पर एक तेल की बॉटल रखी हुई थी. मैंने वंदिता को घुमाया फिर बहुत सारा तेल वंदिता की गांड पर लगाया.

फिर एक उंगली गांड में डालने लगा. वंदिता की गांड बहुत टाईट थी और बहुत बार कोशिश करने के बाद एक उंगली अंदर चली गयी. लेकिन वंदिता ज़ोर से चिल्ला उठी ऊऊओह नहीं आदि बस बाहर करो इसे ऊऊऊईईइईईईईई.

तो मैंने बिना कुछ बोले तेल की बॉटल को वंदिता की गांड के ऊपर उल्टी कर दिया. ऊपर से पानी बह रहा था और यहाँ मैंने तेल की बॉटल उल्टी कर दी और वंदिता की गांड को मालिश कर दिया और उंगली को अंदर बाहर करने लगा. थोड़ी ही देर में आराम से तीन उंगलियाँ वंदिता की गांड में अंदर बाहर होने लगी और अब वंदिता को भी मज़ा आ रहा था. फिर थोड़ा सा तेल मेरे लंड पर लगाया और वंदिता की गांड में एक ही धक्के के साथ पूरा लंड अंदर डाल दिया, वंदिता चिल्ला उठी आआहह माँ मर गई अह्ह्ह्हह्ह आदि बाहर निकाल, लेकिन मैंने उसकी बातों ध्यान ना देते हुए झटके लगाना शुरू कर दिया और थोड़ी ही देर में वंदिता शांत हुई और मेरा साथ देने लगी.

मैंने 12-15 मिनट तक वंदिता की गांड मारी और फिर बिना कुछ बोले वंदिता की गांड में वीर्य डाल दिया. फिर हमने एक दूसरे को नहलाया और साथ में बाहर आए और फिर तैयार हुए और शॉपिंग पर चले गये. फिर वंदिता ने मेरी पसंद की सेक्सी नाईटी ली और दो दिन तक में वंदिता के साथ रहा. घर पर कॉल करके बोल दिया कि में मेरे फ्रेंड के घर पर हूँ. वो बिल्कुल अकेला है इसलिए और दो दिन तक वंदिता के साथ हनिमून मनाया और अब जब भी मौका मिलता है हम चुदाई करते है.

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