पड़ोस की साली के साथ सेक्सी घटना

हाय फ़्रेंड्स आज मैं जो अप सभी को कहानी सुनने जा रहा हूँ वो कहानी नहीं बल्कि एक सच्ची मे हुई सेक्स की दस्ता है। आप इस कहानी को पूरा अंत तक पढे ओर अपने विचार विमर्श हमारे साथ शेयर करे। यह बात कुछ महीने पहले की है, मैंने और मेरे दो दोस्तों ने मिलकर हमारे मोहल्ले की एक लड़की के साथ खूब मस्ती की थी. उसी की ये कहानी है, बहुत बार हम कहानी पढ़ते हैं कि कोई लड़की, भाभी मिली, जो सेक्स के लिए तड़प रही हो और उसके साथ सेक्स किया, मगर हमारे जिंदगी में ऐसा नहीं होता. एक तो ऐसी लड़की मिलती नहीं, मिली तो सेक्स के लिए आसानी से तैयार होती नहीं और हमने कुछ करने की कोशिश की तो हंगामा अलग से होने का खतरा रहता है.

सच बताओ बहुत बार ऐसा ही होता है ना?

हम सिर्फ किसी की याद करके आहें भरेंगे और मुठ मारेंगे, शादीशुदा हो, या गर्लफ्रेंड होगी तो हमें जिसके साथ सेक्स करना है, उसे सोच कर उसके साथ सेक्स कर लो. मगर मेरी कहानी में हम जिस लड़की के लिए पागल थे, उसी को मना के बहला फुसला के सेक्स किया. पहले वो तैयार नहीं हुई, मगर हमने जैसे तैसे उसे राजी किया और मजे लिए.

इधर पहले मैं अपने बारे में बता दूँ, मेरा नाम मुकुंद है. मैं 34 साल का शादीशुदा बंदा हूँ.. पुणे में रहता हूँ. दिखने में मैं गोराचिट्टा हूँ, बॉडी भी मस्त है.. मतलब हीरो नहीं, पर कम भी नहीं हूँ. हमारे घर से थोड़ी दूरी पे श्रेया नाम की एक कमसिन कली रहती थी, जिसकी आठ महीने पहले शादी हमारे यहां रहने वाले एक मयंक नाम के एक मवाली किस्म के लड़ाके के साथ हुई थी, जो श्रेया ने घरवालों के खिलाफ जा के लव मैरेज की है. ये मयंक इधर उधर के काम और गुंडागर्दी करता था. उसके घर में श्रेया और मयंक दोनों ही रहते थे. मयंक शादी के बाद एक प्रायवेट कंपनी में रिकवरी का काम करता था, इसीलिए उसे बाहर भी रहना पड़ता था

जब ये शादी हुई तो हम लोग यही सोचने लगे कि ये फूल जैसी नाजुक और सुंदर सेक्सी परी ने इस जंगली भैंसे में ऐसा क्या देखा? जो प्यार कर बैठी.

श्रेया के बारे में भी कुछ लिख दूँ, ताकि आपको भी उसकी सुन्दरता का भान हो जाए. श्रेया सिर्फ 22 साल की है और बहुत ही अमीर खानदान से है. दिखने में वो एकदम सुंदर और मादक है. उसकी साईज भी 38-28-36 की होगी. उसकी स्किन एकदम गोरी नाजुक और मुलायम थी. होंठ ऐसे नाजुक कि रगडूँगा तो शहद गिर जाएगा. पूरी स्किन पर एक भी दाग नहीं.. बिल्कुल अजंता की मूरत की तरह तराशा हुआ जिस्म था. वो कपड़े भी सेक्सी पहनती थी. उसके हिप और मम्मे देख के ही हमारा पानी निकल जाता था.

हम मोहल्ले के सब लोग उस पे लट्टू थे और उसे जी भर के चोदना चाहते थे, मगर उसका पति बहुत ही हरामी था इसलिए लाईन नहीं मार सकते थे. लेकिन पीने बैठने के वक्त, चाय पे ठेले पे उसी की बातें करते थे और घर में आकर मुठ मारते थे.

मोहल्ले की औरतों का भी ग्रुप बना हुआ था, इसलिए धीरे धीरे श्रेया भी उसी ग्रुप में आने लगी. वो किटी पार्टी वगैरह में जाने लगी, इसलिए उसका मेरे घर में भी आना जाना शुरू हो गया.

वो मुझे जीजू और मेरी पत्नी को दीदी बुलाती थी. धीरे धीरे वो मेरी बीवी से बहुत बातें करने लगी और उसकी बातों से ही हमें पता चला कि वो इस शादी से इतनी खुश नहीं है, उसका पति मयंक सिर्फ हवस का पुजारी है. उसे सेक्स को छोड़ कर और कुछ नहीं दिखता. वो घर खर्च के लिए पैसे भी नहीं देता. इसी सब को लेकर उन दोनों में बहुत झगड़े भी शुरू हो गए थे. मयंक रोज शराब के नशे में श्रेया पे वहशी दरिन्दे की तरह टूट पड़ता था और वो दर्द और डर से कांपती रहती थी. उसने मेरी बीवी को मयंक के दांतों से काटने के निशान वगैरह भी दिखाये थे. मयंक भी उस पर बहुत शक करने लगा था. मयंक का बाहर भी चक्कर था और वो बाहर की लड़कियों को घर में ला के श्रेया के सामने चोदता था.. वगैरह वगैरह.

इतना सब होते हुए भी श्रेया का प्यार कम नहीं हुआ था. वो मयंक को बेइंतहा प्यार करती थी और कोई पूछता. तो बोलती थी कि मयंक कुछ भी करे. मैंने उससे प्यार किया है और मैं अपने प्यार से उसे बदल दूँगी.. अब यही मेरा नसीब है.

इसी लिए सभी औरतों ने मिलकर श्रेया को भी काम करने के लिए और खुद के पैरों पर खड़ा होने के लिए बहुत समझाया.

पर जब मयंक नहीं माना, तो श्रेया ने घर से ही किराना सामान का बिजनेस शुरू किया. वो फोन पे हल्दी, मिर्ची, चीनी, मसाला वगैरह चीजों का ऑर्डर ले कर डिलीवरी दे देती थी. हम सभी लोग उससे ही सब सामान लेते थे. इसी बहाने उसे मदद भी हो जाती थी और उसका दीदार भी हो जाता था.

पर मयंक ने हमारा मोहल्ला छोड़ के हमारे यहां से 3-4 किमी दूरी पर घर शिफ्ट कर लिया था. लेकिन श्रेया ने अपना बिजनेस नहीं छोड़ा था. वो ऑर्डर ले कर सभी जगह सामान पहुंचाती थी और मिले पैसों से घर चलाती थी.

अब उस हसीन रात की तरफ आता हूँ. उस दिन घने बादल छाये थे और जोर से बारिश का भी अंदाजा था. ऐसी वो मदहोश करने वाली शाम थी और हम मर्द अकेले थे. जैसे क्योंकि कुछ हुआ यूं मेरी हमारी मोहल्ले की औरतों ने आठ दिन का घूमने का प्लान बनाया था. ये सब ग्रुप बना कर प्रायवेट बस से निकलने वाली थीं. आठ दिन अपनी अपनी बीवियों से छुटकारा मिलेगा तो कौन पागल ना बोलेगा? सभी मर्द झट से मान गए.

उसी समय पे घर का सामान भी खत्म होने को आया था. मेरी बीवी को सामान मंगाने का ऑर्डर दिए चार दिन हो गए थे, लेकिन श्रेया आ नहीं सकी थी. तो जिस दिन औरतें निकलने वाली थीं, उसी दिन बीवी ने श्रेया को कहा कि आज सामान भेज दो.

श्रेया भी मान गयी और मेरी बीवी मुझे बोल कर चली गयी कि सामान लेकर रख देना. कामवाली बाई दूसरे दिन वो सब लगा देगी.

पूरे दिन श्रेया नहीं आयी तो शाम को मैंने मेरे जिगरी और कमीने दोस्तों को घर पे बुलाया और पीना शुरू कर दिया.

अब मैं मेरे दोस्तों का भी परिचय दे देता हूँ. एक था सुनील जो पुलिस में डीवाय एसपी है और दूसरा रशीद, जिसका स्क्रेप का बिजनेस है. हम बहुत जिगरी दोस्त हैं.

हमने शाम को मेरे घर पे पीना शुरू कर दिया. उसी समय बारिश भी जोर की शुरू हो गयी. हम बाल्कनी में ही मजा लेने बैठ गए और हंसी मजाक नॉनवेज जोक, अपनी बीवियों की बुराईयां करना, कुछ प्लान बनाना शुरू हुआ.. जैसे कि दोस्तों में अक्सर होता है.

जैसे ही दो दो पैग पूरे हुए और मजा आने लगा, तभी बीवी का फोन आ गया कि श्रेया थोड़ी देर बाद घर आ के सामान दे कर जाएगी, तुम सामान उतरवा लेना.

यह सुनते ही मेरी तो हवा निकल गयी, हम ऐसे इंटरनेशनल हालत में, कोई कच्छे में, कोई शॉर्ट में, मैं तौलिया लपेट के बैठा था, सभी ऊपर नंगे बदन ही बैठे थे. सभी सामान चखना बोतलें बिखरा हुआ था.
मालूम चला कि श्रेया आ रही है, ये बताते ही सब उछलने लगे. बोलने लगे कि साले मुकुंद तू रोज अकेले उसकी लेता है. तेरी वाईफ की वो फ्रेंड है आज हमें भी मौका दे.. जन्नत की सैर करेंगे.

उन दोनों ने श्रेया को ले कर गंदे जोक शुरू कर दिए और मैं भी उनकी मस्ती में शामिल हो गया. हम सभी श्रेया का इन्तजार करने लगे. बारिश इतनी तेज होने लगी थी कि सभी जगह पानी भर गया था और मुझे लगने लगा कि इतने तेज बारिश में श्रेया अब नहीं आएगी.

ये अभी सोच ही रहे थे कि उतने में डोरबेल बज गयी और श्रेया की आवाज आयी- जीजू, दरवाजा तो खोलो ना…
वो बेचारी इतनी बारिश में आयी थी, मैंने ऊपर कंधे पर दूसरा तौलिया डाल दिया और दरवाजा खोला तो बाहर श्रेया पूरी तरह से भीगी हुई खड़ी थी. वो पूरी तरह से भीग चुकी थी, उसके बालों में से कपड़ों में से पानी टपक रहा था. मेरे ख्याल से उसके ऊपर के कपड़े ही नहीं.. ब्रेसियर और चड्डी भी पूरी तरह से भीग गए होंगे.

वो ठंड से कांप रही थी. मगर दोस्तों … क्या माल लग रही थी, उसने गहरे लाल रंग की साड़ी पहनी थी, जो जिस्म पे चिपक कर ग़दर मचा रही थी. उसके ब्लाऊज में से उसके मम्मे ही नहीं, मम्मों के निप्पल्स भी उभर के दिख रहे थे. मैं तो उसे देखता ही रह गया.

तभी वो मुझे चिढ़ाने के अंदाज में बोली- क्या जीजू.. क्या चल रहा है.. दरवाजा खोलने में इतनी देर? दीदी नहीं तो दोस्तों की महफिल? बताऊं क्या दीदी को कि जीजू को सामान उठाने का भी होश नहीं था.
उसकी इस मस्ती पर मैं शरमा गया और हंस कर बाहर बंगले के पार्किंग में उसकी स्कूटर थी, जिस पर सामान की थैलियाँ रखी थीं, वो उठाने लगा. सभी जगह पे पानी भरा था.

मैं वो थैलियाँ अन्दर ले कर आया और पूछा- इतनी बारिश में आने की क्या जरूरत थी, मयंक को भेज देती.
वो बोली- मयंक आज ही टूर पे गया है, चार दिन बाद आएगा.
यह सुनकर मेरे मन में लड्डू फूटने लगे.

हम दोनों मिल कर सामान अन्दर लाने लगे. अन्दर का नजारा देख के वो हंसने लगी और मेरे कमीने दोस्त उसे हवस भरी नजरों से देखने लगे.
तो वो बोली- लाईये जीजू मैं सब सामान किचन में रख देती हूँ. आपका प्रोग्राम चलने दो, अगर कुछ चाहिये होगा, तो बना के दे दूँगी.
मैं बोला- अरे नहीं श्रेया, तू पहले बदन पौंछ ले… मैं तुझे तेरी दीदी के कपड़े दे देता हूं, तू पहले चेंज कर, चाहे बाथरूम जाके गर्म पानी से सेंक ले ले.. तब तक मैं गर्म कॉफी बना देता हूं.
मैंने मेरा बेडरूम खोल के बाथरूम की लाईट को चालू कर दिया.

इसके बाद मैंने मेरी बीवी का एक सेक्सी सफेद रंग का ओपन नेकवाला ड्रेस वॉर्डरोब से निकाल लिया, जिससे ब्रेस्ट उभर के दिखाई देते थे.. जो उतारने में भी आसान था, उसे पीछे सिर्फ एक नॉट थी.

उसे वो ड्रेस देते समय एकदम जोर से बिजली कड़की और लाईट चली गयी, वो एकदम से डर गयी और मुझे पकड़ लिया.
मैंने बोला- घबराओ नहीं, मैं अभी इनवर्टर शुरू कर देता हूँ.

मैं चला गया, वो बाथरूम में चली गयी. इनवर्टर से हमारे बंगले की लाईट शुरू हो गई. कुछ देर बाद वो बाहर आयी, तब उस ड्रेस में वो इतना पटाखा माल लग रही थी. उसकी ब्रा और निक्कर लाल रंग की थी और ड्रेस सफेद, उसकी पूरी फिगर दिख रही थी.

मैंने उसे गर्म कॉफी थमा दी और उसे थोड़ी देर रुक के बारिश रुकने का इंतजार करने को बोला. वो मान गयी और बाहर आके मेरे साथ बैठ गयी. तब तक मेरे दोस्तों का तीसरा पैग भी खत्म हो गया था.

श्रेया मुझे ड्रिंक कंटीन्यू करने के लिए बोली और कहा- मैं कुछ बना के दे दूँ क्या?
मैंने ना बोल के उसके लिए टीवी शुरू कर दिया और दोस्तों के साथ चालू हो गया.

इधर फिर से दोस्तों की टुन्नी में गंदी बातें शुरू हो गईं- अरे उसे पकोड़े कवाब वगैरह बनाने के लिए बोल ना. हमें श्रेया कवाब खाना है.

तभी टीवी पे बारिश की न्यूज दिखाने लगे, पूरे शहर में पानी भरा था और रास्ते बंद होने लगे थे और बिजली का भी प्रॉब्लम हुआ था. ये सुनते ही श्रेया ने न्यूज देखने के लिए मुझे अन्दर बुलाया.
मैं अन्दर आ गया. मेरे पीछे रशीद भी आ गया और श्रेया के पीछे खड़ा हो गया. दो मिनट में सुनील भी न्यूज के बहाने आ गया. हम सभी सिर्फ शॉर्ट में थे, रशीद तो जानवर जैसा ही दिखने में सांड था.
वो सब श्रेया के आस पास थे, लेकिन अब भी श्रेया को कुछ गलत नहीं लग रहा था. या शायद वो भी कुछ मजे लेने के मूड में आ गई थी.

तभी मेरे हाथ में खाली ग्लास देख के श्रेया बोली- लाओ जीजू, मैं आपका पैग बना देती हूं.
उसके पैग बनाए जाने के बाद देखा तो सभी के लौड़े तने हुए थे.

रशीद बोला- अबे मुकुंद कुछ भी जुगाड़ कर.. इसे पटा, इसपे टूट पड़ना है, कंट्रोल नहीं होता रे अब.

तभी वो आ गयी, मैंने मेरे दोस्तों का परिचय करवा दिया और वो सभी से हंस के बोलने लगी. उसने रशीद का भी पैग बनाया. हम सिर्फ मौके की तलाश में थे.

तभी रशीद बोला- श्रेया जी, पूरे शहर में पानी भर गया है, शहर की बिजली भी चली गयी है, अब आप घर कैसी जाओगी?
मैं बोला- श्रेया डोंट वरी … कुछ प्रॉब्लेम हो, तो यहीं रुक जा.. इतना बड़ा बंगला है. तू ऊपर के बेडरूम में सो जाना और कल उठ के चली जाना.
कुछ हाँ ना करते हुए वो मान गयी.

हमने सोचा मछली फंस गयी, सिर्फ अब पकाना बाकी है. मेरे दोस्तों ने उसकी तारीफ करना शुरू किया, वो भी हमारे पैग बनाने लगी.
सुनील ने उसे ड्रिंक ऑफर की लेकिन उसने ‘मैं नहीं पीती…’ बोल के टाल दिया.
सुनील बोला- जी.. आप खुद अपने आप में ही शराब हो, तो ऐसे शवाब को और शराब जरूरत ही क्या है?
ये सुनते ही श्रेया शरमा गयी और कहने लगी- क्या सर… कुछ भी बोलते हो.

बस हमारी बातें और रंग लाने लगीं. वो भी घुलमिल गई, तालियां देना, उसे छूना आदि भी शुरू हो गया.
वो पैग बनाने लगी. तभी रशीद ने पूछा- श्रेया, तुम्हारी उंगलियां ग्लास में डूबी थीं क्या?
वो बात समझी नहीं, तो बोली- नहीं.. पर क्यों?
रशीद बोला- अगर नहीं डूबी थीं, तो मेरा जाम इतना कड़क कैसे हो गया.. साला चढ़ने लगा.
तभी सुनील बोला- अरे वाह … उंगलियों में इतना नशा है.. अगर ग्लास को होंठों से लगा कर देती तो हम मर ही जाते. सिर्फ श्रेया जी हमारे ग्लास को अपने होंठों का जाम लगा कर दे दो प्लीज़. हमें भी आपकी खूबसूरती का नशा करने दो.
श्रेया बिंदास हंसने लगी.

तभी रशीद ने चैनल चेंज करके मूवी चैनल लगा दिया. एक सेक्सी मूवी चल रही थी, उसका हॉट सीन चल रहा था. यह देख कर और हमारी बातें सुन के श्रेया थोड़ी सहम गयी. लेकिन बाद में हमने उस सीन पे बोलना शुरू किया और नॉनवेज, डबल मीनिंग बोलना शुरू किया.

हम सभी श्रेया के बहुत ही करीब आ गए थे, पीछे से रशीद का तना हुआ लंड श्रेया के पीठ को टच करने लगा और सुनील उससे चिपक कर बैठ गया. वो कुछ समझ नहीं पा रही थी, तभी रशीद ने उसके बालों को सहलाते हुए उसके बालों की तारीफ करना शुरू किया और सुनील बदन की खुशबू लेने लगा.
यह देख के श्रेया डर गयी और बोली- जीजू, प्लीज रोको इन्हें.. ये क्या कर रहे हैं?
मैंने उसके कंधे जकड़ कर बोला- श्रेया डर मत.. आज हमारा साथ दो, हम जबरदस्ती नहीं करेंगे, प्यार करने दो … तुम्हें बिल्कुल तकलीफ नहीं देंगे.. फिर तेरी मर्जी.

मैंने उसके मम्मे पकड़ कर उसे कस के हग किया. तभी रशीद उसकी पीठ को चूमने लगा और मैंने गले को किस करना शुरू किया. न जाने क्यों मुझे लग रहा था कि भी यही सब चाहती है.
तभी सुनील ने उसे समझाया- हमें तो तुझे चोदना है.. तू भी एंजॉय कर न.
वो कहने लगी- मयंक को पता चला तो वो मेरा बुरा हाल करेगा, दीदी को कैसे मुँह दिखाऊंगी.
मैं बोला- वो तू मुझ पे छोड़ दे.. हमें तीनों के अलावा किसी को खबर नहीं होगी.

मैं श्रेया के मन की बात समझ गया था कि साली चुदने को ही फिर रही है बस ड्रामा कर रही है.

इस चुदाई की कहानी का पूरा मजा आपको अगले भाग में मिलेगा.

मेरे मोहल्ले की शादीशुदा हॉट गर्ल श्रेया को हम तीन दोस्तों ने चुदाई के लिए राजी कर लिया था. बस वो थोड़े नखरे दिखा रही थी.
अब आगे …

मैं श्रेया के पेट को किस करने लगा और उसकी योनि को कपड़े के ऊपर से किस बाईट करना शुरू किया. अब तक वो भी मादक सिसकारियां भरने लगी थी. फिर भी दिखावे के लिए छटपटा रही थी और बोल रही थी- ये गलत है, मयंक मुझे नहीं छोड़ेगा.
यह सुनते ही पुलिस वाले दोस्त सुनील बोला- डर मत … मयंक ने कुछ किया तो मैं हूँ ना. मैं देखता हूँ. तू सिर्फ हमारा साथ दे, कुछ नहीं होगा … आज तू भी मजे ले ले.
अब श्रेया को समझ आ गया था कि शायद हम उसे नहीं छोड़ेंगे, तब बोली- जीजू जो भी करना है आहिस्ता और प्यार से करो, मयंक जैसा दर्द मत दो … और तुम तीन लोग करोगे तो मेरा क्या होगा … सोचो ना प्लीज.

उसके मुँह से ये सुनते ही हम सबके लंड हिनहिनाने लगे. वाह और लंड को क्या चाहिए था अब … नेकी और पूछ पूछ … जिसकी चुदाई के सपने देखते थे, वो हमारे सामने चूत देने को राजी हो गई थी.
ये सुनते ही रशीद बोला- अरे तू ऐसी है कम से कम दस बार चोदने के बाद भी तेरा जादू बढ़ता ही रहेगा, तू डर मत.
श्रेया- प्लीज ऐसी बात मत करो ना, दस बार से तो मेरी हालत खराब हो जायेगी, मेरे बारे में भी सोचो ना. जीजू प्लीज आप ही समझाओ ना. प्लीज जीजू मेरी हालत बुरी मत करना, मुझे चलने फिरने के काबिल तो छोड़ो … और प्लीज पहले आप करो, जो भी करना है.

ये सुनते ही मैंने उसके चेहरे को पकड़ कर उसके टमाटर जैसे गालों को चुम्मी करना, काटना शुरू कर दिया और होंठों पे होंठ रख के फ्रेंच किसिंग शुरू कर दी. रशीद ने पीछे से पीठ को, गले को गांड को चूमना शुरू किया. सुनील उसकी योनि को चाटने लगा.

रशीद ने पीछे से दांतों से उस ड्रेस की नॉट को निकाला और वो ड्रेस निकल गई. उसका वो मादक बदन देख के मैं तो देखता ही रह गया. क्या संगेमरमर जैसा बदन था, बदन पे लाल ब्रा खूब जंच रही थी. वो उसकी ब्रा भी सिर्फ निप्पलों ही मुश्किल से ढक पा रही थी, उसके बड़े बड़े मम्मे उछल रहे थे.

वो देख कर मेरे पहले सुनील ने ही उसकी ब्रा खींच कर निकाली और दूर फेंक दी. सुनील ने इतनी जोर से ब्रा खींची थी कि उसकी ब्रा के दो टुकड़े हो गए और हुक्स बिखर गए. ब्रा हटते ही सुनील श्रेया के मम्मों पे टूट पड़ा. वो श्रेया का एक चूचा अपने हाथों से रगड़ने लगा और दूसरा मुँह में लेकर खाने लगा.

मैंने ऊपर का मोर्चा संभाला. उसके होंठों का रसपान फिर से शुरू किया. मैंने पहले उसके ऊपर का होंठ चूसना शुरू किया, फिर नीचे का होंठ अपने होंठों में दबा आकर हल्का सा चुभलाने लगा. उसका मुँह खुला तो मैं अपनी जुबान उसके मुँह में अन्दर तक डाल कर फिराने लगा.
मेरी जुबान उसकी जुबान पर चलने लगी थी. उसको भी मजा आने लगा था.

फिर मैंने दोनों होंठ उसके मुँह में अन्दर डालकर उसके रस को पीना शुरू कर दिया. मैं पूरी ताकत से उसके होंठ अपने होंठों से लगा कर चूमने का मजा ले रहा था. मैंने उसकी जुबान मेरे होंठों से खींच कर अपने मुँह में ले ली और उसकी जुबान को चूसना शुरू कर दिया.

उसकी जुबान एकदम गुलाबी मुलायम थी, मैं उसे दांतों से हल्का रगड़ने लगा, जोर जोर से चूसने लगा. वो भी मेरी जुबान से खेलने लगी. तभी नीचे रशीद ने उसकी चड्डी खींच कर फेंक दी थी. देखा तो उसकी चूत इतनी नाजुक और मुलायम और शेव की हुई थी कि लंड की माँ चुद गई.

उसके होंठों जैसे ही सुंदर नाजुक चूत पर रशीद टूट पड़ा. वो अपनी जुबान से चूत सहलाने लगा. तो श्रेया सिसकारियां लेने लगी. रशीद धीरे धीरे अन्दर श्रेया की चूत में अपनी जुबान डालने लगा और श्रेया की चूत के अन्दर उसकी यौनमणि को उसने अपने होंठों में पकड़ कर कसके होंठों से मींजते हुए खींचा तो वो मीठे दर्द से चिल्ला उठी.

उधर सुनील जो उसके मम्मे चूस रहा था, श्रेया उसके बाल नोंचने लगी. श्रेया के मम्मे इतने बड़े थे कि सुनील के हाथ में और मुँह में समा ही नहीं रहे थे.

श्रेया मेरे बदन में नाखून घुसाने लगी, मेरे होंठों को दांतों से काटने लगी, तभी उसकी योनि चाटते हुए रशीद उल्टा फिर गया और अपना लंड उसके मुँह में डालने लगा. रशीद का लंड सात-आठ इंच का लम्बा और बहुत ही मोटा व झांटों से भरा हुआ था.
ये देखते ही वो चिल्लाने लगी- छी: कितना गंदा है ये, बदबू है इसमें, ये में बिल्कुल नहीं करूँगी, मुझे नहीं करना … प्लीज जीजू रोको इनको.
रशीद अपना लंड श्रेया के मुँह में डालने की कोशिश करने लगा.

तभी श्रेया कलपते हुए बोली- मैं पहले जीजू का लंड लूंगी.
यह सुन कर मैं आगे आया. मेरा लंड छह इंच का गोरा और शेव किया हुआ साफ सुथरा रहता है. अपने चिकने लंड को मैं उसके मुँह में डालने लगा और 69 में आके उसकी चूत को चाटने लगा. जैसे ही मैं श्रेया की चूत को अन्दर तक चाटता, वैसे वो मेरे लंड को चूसने लगती, मुँह में ले कर अन्दर बाहर करने लगती.

वो मेरे लंड की टोपी को पीछे करके सुपारे को चाटने लगी, लंड को होंठों में दबा कर हल्का सा बाईट करने लगी. मैं उसकी चुत में अन्दर तक चाटने लगा और कुछ ही देर में उसने अपनी चूत से पानी छोड़ दिया.

इसी बीच रशीद अपना एक और पैग खत्म करके आ गया और बोला- अब मैं इस गजब माल को चोदता हूँ.
वो श्रेया के पीछे आ गया … श्रेया नीचे बैठ कर मेरे लंड को कैंडी की तरह चूस रही थी. मैं उसके मुँह को चोद रहा था. सुनील उधर खड़ा होकर श्रेया को मेरा लंड चूसते हुए देख रहा था, साथ ही पैग लेते हुए वो मुठ भी मारने लगा था.

रशीद अपना लंड श्रेया की पीठ पे फिराने लगा … उसके चूतड़ों को मसलने लगा. फिर रशीद श्रेया के चूतड़ों को किस और बाईट करने लगा. उसके चूतड़ों पर नीट शराब डाल कर चाटने लगा. उसके नाजुक गोरे चूतड़ों पर रशीद के दांतों के निशान बन गए.

तभी मैं झड़ने लगा, मैं बोला- श्रेया, मेरा पानी निकलने वाला है.
लेकिन श्रेया मेरे लंड को चूसती ही रही और मैंने सब पानी उसके मुँह में ही छोड़ दिया. उसने बड़े मजे से मेरे लंड के रस को निगल लिया और फिर से चूसना चालू रखा. इससे मेरा लंड पांच मिनट में ही फिर से तन गया.

अब मैंने और रशीद ने उसे उठा के खड़ा किया. श्रेया ने मेरे बदन को, कंधे को, चेस्ट को किस करना और काटना शुरू किया. श्रेया ने अपनी चूत मेरे लंड के सामने खोल दी. उसने रशीद के लंड को दरकिनार कर दिया, वो बोली- पहले जीजू का अन्दर जाएगा.
यह सुनकर रशीद की खोपड़ी भन्ना गई, लेकिन मैंने रशीद को इशारे से समझा दिया कि लौंडिया किधर जाएगी, साली को पूरी रात चोदेंगे.

अब मैंने अपना लंड श्रेया के चुत में फिट कर दिया और पीछे रशीद ने श्रेया की गांड के छेद पे अपना लंड रख दिया. हम दोनों ने श्रेया की चुदाई का काम शुरू किया. मैंने लंड फंसा कर रशीद को आँख मारी तो रशीद ने श्रेया की गांड में लंड का झटका लगा दिया. श्रेया जोर से चिल्लायी. उसके छटपटाहट से लंड अन्दर नहीं जा रहा था.

मैंने पास रखी मेरी केवाई जैली उसे दे दी. उसने जैली को लंड पे लगाया और मैंने भी फिर से काम शुरू किया. हल्के हल्के धक्के देना शुरू किए, लेकिन रशीद जोर जोर से धक्का देने लगा … तो श्रेया चिल्लाने लगी थी, वो छटपटा रही थी.

तभी रशीद ने इतना जोर का झटका दिया कि उसका लंड श्रेया की गांड को फाड़ता हुआ अन्दर चला गया. दर्द के मारे श्रेया जोर से चिल्ला उठी. मैंने अपने होंठों से उसका मुँह बंद किया और झटके से अपना भी लंड अन्दर डाल दिया. थोड़ी देर के दर्द के बाद श्रेया भी दोनों छेदों में लंड का मजा लेने लगी.

उसने बताया कि मयंक ने उसकी गांड को खूब बजाया था, इसलिए उसका पिछवाड़ा खुला है. लेकिन दोनों तरफ से लंड पहली बार घुसा है तो दर्द हुआ था.

कुछ ही देर में रूम कामुक आवाजों से भर गया था. श्रेया मजा ले रही थी- आहह जीजू मजा आ रहा है … और अन्दर तक करो ना … आह … जोर से करो … आहह रशीद साले दर्द मत दो … आहहहह प्लीज … उई माँ …
थोड़ी देर बाद रशीद झड़ गया और बाजू में जा के नशे में टुन्न हो कर गिर गया और मैं श्रेया की चूत को चोदता ही रहा. इतने में श्रेया ने दो बार पानी छोड़ा और फिर मैंने भी अपना वीर्यदान श्रेया को कर दिया और हम दोनों थक कर गिर गए.

श्रेया के बदन पे एक भी पॉइंट ऐसा नहीं था, जहां हमने किस या बाईट ना किया हो. उसकी जवानी का और बदन का पूरा लुत्फ़ उठाया.

तभी हाथ में ग्लास लिए सुनील आया और श्रेया को बांहों में लेने लगा, श्रेया की तो जान निकल गयी थी. सुनील ने अपना ग्लास श्रेया के होंठों से लगा के पिला दिया … श्रेया एकदम से उठ गयी और थूकने लगी, बोली- ये क्या पिला दिया, इसमें कतरा सा क्या मिलाया है?
सुनील हंसने लगा, मैंने देखा था सुनील ने मुठ मार के अपना वीर्य दारू में मिक्स करके श्रेया को पिला दिया था.

कुछ ही देर में सुनील ने दूसरा पैग भी श्रेया को पिला दिया. जिससे श्रेया के मुँह का स्वाद ठीक हो गया और उसको नशा छा गया. तभी सुनील ने अपना लंड श्रेया के मुँह में डाल दिया, इस वक्त श्रेया एकदम चुदासी हो गई थी, उसको नशे में कुछ नहीं सूझ रहा था. वो सुनील के लंड को चूसने चाटने लगी.

सुनील का लंड बहुत ही बड़ा था, श्रेया के मुँह में पूरा जा ही नहीं रहा था, श्रेया साँस ही नहीं ले पा रही थी. यह देख के श्रेया बोली- सुनील सर, मेरी हालत बहुत खराब है … मैं चल भी नहीं पा रही हूँ और आपका ये मूसल लंड मेरी चूत फाड़ देगा … प्लीज आप मत करो ना.

यह सुनकर सुनील ने बोतल में बची हुई शराब श्रेया के मुँह में लगा कर उसे नीट ही पिला दी. अब जैसे श्रेया को जैसे ही नशा चढ़ा और उसे दिखना बंद हुआ तो सुनील ने उसे हल्के हल्के से चोदना शुरू कर दिया. श्रेया की सिर्फ ‘आह … उह्ह …’ की आवाजें आ रही थीं. वो मस्ती में बके जा रही थी- ओ प्लीज … आहाहह हहह … उम्म्ह… अहह… हय… याह… नो … अब बस भी करो … ऊयी माँ … उंउऊ … आहहहह … बहुत बड़ा है … मुझसे सहा नहीं जा रहा सुनील सर बस करो ना … मेरी चूत फाड़ ही दोगे क्या? प्लीज़ जानवर मत बनो ना … मुझ पर रहम करो … इहह … आहाहह … जीजू कहां हो? प्लीज अब बस भी कर दो.

लेकिन सुनील ने एक नहीं सुनी और वो उसे चोदता ही रहा. बाद में वो झड़ कर श्रेया के ऊपर ही ढेर हो गया. उसके बाद फिर एक बार रशीद ने श्रेया के मुँह में लंड डालने की ख्वाहिश पूरी कर ली, उसके मुँह में अपने झांट युक्त लंड डाल ही दिया. रशीद ने श्रेया को उठा के सोफे पे बिठा दिया और सर पकड़ के उसके मुँह में लंड अन्दर बाहर करने लगा. वो उसके बालों को जोर जोर से ऊपर खींच कर लंड को और अन्दर डालने लगा. श्रेया के मुँह में जोर जोर से धक्के देने लगा. रशीद का लंड श्रेया के मुँह में अन्दर तक चला गया. उसके लंड की टोपी पूरी पीछे करके सुपारा श्रेया के दांतों पे जुबान पे रगड़ने लगा. मेरे बालों को नोंचने और खींचने के बाद दोनों गाल बाहर से पकड़ कर लंड पर पकड़ जमा ली और श्रेया का मुँह आगे पीछे करने लगा.

श्रेया कुछ भी रिएक्ट नहीं हो रही थी. बाद में लंड बाहर निकाल कर लंड पे शराब डाली और फिर मुँह में ठूंस दिया. इस बार वो इतनी जोर से श्रेया का मुँह चोदने लगा कि श्रेया आहें भरने लगी. उसकी ‘आ …आं …’ की आवाज आने लगी.

श्रेया की हालत सच में बहुत बुरी हो चली थी. मगर वो कुछ भी कर नहीं सकती थी. फिर कुछ देर बाद रशीद ने अपने लंड का पूरा पानी श्रेया के मुँह में डाल दिया. श्रेया का मुँह वीर्य से भर गया. श्रेया ने वो बाहर थूक दिया. इस मुखचोदन में श्रेया के रेशमी बालों पे, गालों पे, लगभग सारे बदन पर ही रशीद ने अपना वीर्य गिराया था … इतनी भारी मात्रा में वीर्यपात हुआ था.

रशीद झड़ने के बाद भी शांत नहीं हुआ था. वो एक बार फिर से श्रेया के मम्मों को मसलने लगा और उसके निप्पलों को मरोड़ने लगा. वो आटे की तरह मम्मों को गूँथ रहा था. फिर उसने श्रेया के एक मम्मे को अपने मुँह में खींचा तो उसका पूरा चूचा तो मुँह में समा ही नहीं रहा था. रशीद श्रेया के मम्मे को आम समझ कर उसका रसपान करने लगा … और चूसते हुए मसलने लगा.

श्रेया सिर्फ ‘आह आं …’ करती रही, अपनी छाती श्रेया के मुँह पे रखके रशीद अपने सीने के निप्पलों को श्रेया के होंठों से किस करवाने लगा. साथ ही श्रेया की बांहों को काटने लगा.

इतना गर्म सीन देख कर हम दोनों भी पास ही आ गए. हम दोनों ने श्रेया के दोनों हाथ कसके ऊपर उठा लिए और उसकी बगलों के बीच में मुँह डाल कर उसको चाटने लगे. उसकी बगलें उसके गालों की तरह मुलायम और गोरी चिट्टी थीं, उनमें एक भी बाल या बाल के निशान नहीं थे.

ये देख कर एक बाजू सुनील और दूसरी में मैं उसकी बांहों को किस करने लगे और उत्तेजना बढ़ने पर उसे काटने लगे. हम दोनों बड़ी बेताबी से अपनी जीभ फेरने लगे. इससे श्रेया मचलने लगी.

रशीद ने अब खुद के सीने को श्रेया के मुँह से निकालकर फिर अपना तना हुआ मोटा काला लंड उसकी चुत पे सैट करके हैवानों जैसे जोर से अन्दर धकेलने लगा.

इधर मैं और सुनील पागलों के जैसे श्रेया के गले को, कंधों को, बांहों को, बगलों को, पीठ को, जांघों पर किस करते रहे. हम दोनों अपनी जीभों और दांतों से उसके बदन का मर्दन करते रहे.

इतने में रशीद ने बेरहमी से अपना पूरा लंड श्रेया की चुत के अन्दर डाल दिया. इतनी थकी हालत में भी श्रेया दर्द से जोर से चीख उठी. उधर रशीद भी इतनी जोर से चुदाई करने लगा कि सोफा हिलने लगा.
जब रशीद अपने लंड को बाहर निकालता तो श्रेया एकदम से ऊपर को उठ जाती और जब अन्दर तक डालता, तब नीचे गिरके रशीद के भारी भराकम शरीर के नीचे दब जाती.

श्रेया की पूरी चुत यूं समझो कि रशीद ने फाड़ ही दी और अंत में अपना माल गिरा कर श्रेया की साईड में गिर कर ढेर हो गया.

कुछ देर बाद रशीद और सुनील चले गए. उसने जाने के थोड़ी देर बाद मैं श्रेया को अपनी बांहों में उठा कर बेडरूम में ले गया. उसे चला भी नहीं जा रहा था. मेरी बांहों में बांहें डाल कर वो परी सो गयी.

सुबह जब श्रेया की आंख खुली तो उसने मुझे जगाया. उसका पूरा बदन दर्द कर रहा था. बेचारी के मुँह में और चुत में तीन बार, पीछे से एक बार ठुकाई के बाद जान निकल गयी थी.

मैंने उसे हल्का मसाज दिया और फिर दोनों एक साथ नहाये और वो तैयार हो गयी. मगर उसे चलने में प्रॉब्लम हो रही थी.

मैंने श्रेया को दिल से थैंक्स बोला और उसने भी मुझे कसके हग करके लिपलॉक करते हुए एक लम्बा किस दिया.
फिर वो बोली- जीजू फिर कब मिलोगे?
मैंने बोला- तुम फिर कब आओगी? शाम को फिर आओ ना …!
वो हंस के बोली- आई विल ट्राय बट जीजू … तुम अकेले ही रहना, मैं सिर्फ आप के लिए आऊंगी.
मैंने उसे चूम कर हां कह दिया.

वो सच में शाम को आ गयी और हम दोनों ने अलग अंदाज में एंजॉय किया.