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Mastram Ki Hindi Sex Stories | Mastaram Ki Antarvasna Stories | मस्ताराम की हिंदी सेक्स कहानियां

पडोसी आंटी की चुदाई की हिंदी सेक्स स्टोरी

गतांग से आगे ….

मैंने उठाने की कोशिश करते हुए जानबूझ कर एक हाथ से आंटी की दाईं चूची दबा थी। इस उम्र में भी आंटी की चूची कुछ कठोर सी लगी जैसे के तनी हुई चूची। मुझे इसका बहुत अनुभव था क्योंकि मैं कई चूतें फाड़ चुका था तब तक। जैसे ही मैंने चूची दबाई आंटी के मुँह से एक आह से निकली और उनका हाथ सरक कर मेरे लंड पर चला गया लेकिन बिल्कुल ऐसे जैसे कि अनजाने में सब हुआ हो। जैसे ही मैं अलग हुआ, आंटी का चेहरा कुछ परेशान सा लगा।

मैंने पूछा- आंटी क्या हुआ?

तो बोली- राहुल बेटा, अब तुम जाओ, मुझे कुछ काम है, बाद में आना।

मैंने कहा- ठीक है ! और उठकर बाहर आ गया।

आंटी ने जल्दी से दरवाजा बंद कर लिया। इस तरह जल्दी से दरवाजा बंद करने के कारण मुझे कुछ शक हुआ तो मैं एकदम से दरवाजे के पास पहुँचा और उसी छेद में से झाँकने लगा जिसमें से पहले देखा था। मेरा शक सही था। आंटी गर्म हो चुकी थी और आंटी अपनी सलवार नीचे कर रही थी। सलवार नीचे करके आंटी अपनी चूत में ऊँगली करने लगी जोर जोर से।

मुझे शरारत सूझी और मौका भी था, मैंने दरवाजा खटखटा दिया।

आंटी चौक उठी, झट से सलवार ऊपर करके आंटी ने दरवाजा खोला। आंटी के चेहरे पर पसीना साफ़ नजर आ रहा था।

क्या हुआ आंटी ? मैंने पूछा।

आंटी के मुँह से कोई आवाज नहीं निकली। मैंने आंटी को थोड़ा अंदर धकेला और दरवाजा बंद कर दिया।

आंटी बोली : यह तू क्या कर रहा है?

मैं बोला- आंटी, थोड़ी देर पहले आपने मेरी परेशानी दूर करी थी, अब मैं आपकी परेशानी दूर करना चाहता हूँ।

आंटी थोड़ा सकपका गई, उनकी आवाज लडखडा रही थी- मुझे क्या परेशानी है ….

मैंने आंटी के कंधे पर हाथ रखा और आंटी को अपनी तरफ खींचा और अपने होंठ आंटी के होठों पर रख दिए।

आंटी ने मुझे एक दम से धक्का दिया और बोली- यह तुम क्या कर रहे हो ?

आंटी, मुझे मालूम है कि आपको इसकी बहुत जरूरत है। वरना आप वो न करती जो अभी कुछ देर पहले कर रही थी।

मैं क्या कर रही थी ? आंटी ने चौंकते हुए पूछा।

मैं थोड़ा बेशर्म होते हुए बोला- आंटी, अभी आप अपनी चूत में उंगली नहीं कर रही थी क्या ?

आंटी चुप रही और मेरे मुँह की तरफ देखती रही। आप यह हॉट हिंदी सेक्सी कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

मैं फिर बोला- आंटी, मैं आपकी यह जरूरत पूरी कर सकता हूँ।

आंटी बोली- नहीं राहुल, तुम मेरे बेटे जैसे हो बेटा। मैं तुम्हारे साथ नहीं कर सकती।

आंटी की आवाज में लंड की जरूरत साफ़ झलक रही थी। आंटी ने मुँह दूसरी तरफ कर लिया था। मैं आगे बढ़ा और आंटी की कमर में हाथ डाल कर आंटी को अपनी तरफ खींचा। मेरा तना हुआ लंड आंटी की मस्त गांड में चुभने लगा। आंटी के मुँह से सिसकारी निकल गई। मैंने दोनों हाथ ऊपर करके आंटी की दोनों चूचियाँ पकड़ ली।

हाय क्या मस्त चूची थी आंटी की। कब से इन्हें हाथों में लेने को तड़प रहा था।

आंटी अब भी मुझ से छुटने का हल्का प्रयास कर रही थी पर मेरी पकड़ इतनी कमजोर नहीं थी। मैं प्यार से आंटी की गर्दन पर चूमते-चूमते आंटी की मस्त चूचियाँ मसल रहा था। आंटी के मुँह से एक ही आवाज आ रही थी- छोड़ दे बेटा ! भगवान के लिए ऐसा मत कर।

इसी आवाज के बीच में मस्ती भरी सिसकारियाँ भी निकल रही थी। जिस से मुझे पता लग रहा था कि आंटी भी चूची मसलवाने का मजा ले रही हैं।

मैंने धीरे धीरे आंटी की कमीज उठानी शुरू की तो आंटी ने मेरा हाथ पकड़ लिया और धीरे से बोली- प्लीज, कपड़े मत उतारो ! कोई आ गया तो मुश्किल हो जायेगी।

मैंने आंटी की बात को अनसुना कर दिया और आंटी की कमीज को उतार कर एक तरफ़ फेंक दिया। आंटी के मस्त खरबूजे अब बिल्कुल नंगे मेरी आँखों के सामने थे। एक पल के लिए तो मैं उन्हें देखता रह गया क्योंकि आज तक इतनी बड़ी बड़ी चूचियाँ मैंने नंगी नहीं देखी थी। मैंने एक चूची को पकड़ा और मुँह में लेकर चूसने लगा। आंटी के मुँह से सेक्स भरी सिसकारी फ़ूट पड़ी। अब आंटी भी चुदने के लिए बिल्कुल तैयार थी।

मैं एक चूची मसल रहा था और दूसरी को चूस रहा था। आंटी ने भी अब हरकत करनी शुरू कर दी थी। आंटी ने हाथ बढ़ा कर मेरा लगभग आठ इंच का तना हुआ लंड पजामे के ऊपर से ही पकड़ लिया और धीरे धीरे सहलाने लगी। मैंने भी चूची चूसते चूसते आंटी की सलवार का नाड़ा खोल दिया। सलवार जमीन चूमने लगी। आंटी ने नीचे कोई अंडरवियर नहीं पहना हुआ था। सलवार नीचे जाते ही आंटी बिल्कुल नंगी हो गई थी। आंटी की चूत पर बड़ी बड़ी झांटे थी काली काली।

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मैं एक हाथ से आंटी की चूत को सहलाने लगा। झांटें आंटी की चूत के रस से गीली हो चुकी थी। मैंने एक उंगली आंटी की चूत में सरका दी। आंटी एकदम से चिहुंक उठी। आंटी के मुँह से आआआह निकल गई।

कुछ देर चूत में उंगली पिलवाने के बाद आंटी ने मुझे अपने से दूर किया और मेरे लंड पर झपट पड़ी। मेरे पजामे को पकड़ कर नीचे सरका दिया। फिर अंडरवियर को भी उसी गति से नीचे खींच दिया। मेरा तना हुआ लंड अब आंटी के मुँह के बिल्कुल सामने था। आंटी ने बिना देर करे लंड को मुँह में ले लिया और जीभ घुमा घुमा कर लंड को चूसने लगी। अब सिसकारी निकलने की बारी मेरी थी। मेरी भी मस्ती के मारे आह्ह्ह निकल गई। आंटी मस्त हो कर लंड चूस रही थी।

पांच मिनट के बाद आंटी बोली- बेटा अब देर मत कर ! चोद दे मुझे। जल्दी कर अगर कोई आ गया तो सारा मजा खराब हो जायेगा।

मैंने कहा- आंटी तुम बस मजे लो ! कोई आएगा तो मैं अपने आप देख लूँगा।

आंटी अब बिस्तर पर टाँगें खोल कर लेट गई, आंटी की खुली हुई लाल लाल चूत साफ़ दिख रही थी। मैं आंटी की टांगों के बीच में बैठ गया और आंटी की बड़ी बड़ी झांटो को सहलाने लगा। आंटी की सिसकारियाँ चालू थी। मैं आंटी की चूत पर झुक गया। मैं बता दूँ कि मुझे चूत की खुशबू बहुत अच्छी लगती है। मैंने अपनी जीभ आंटी की चूत के लाल लाल दाने पर रख दी। आंटी एकदम उछल पड़ी। आंटी बोली- बेटा यह क्या कर रहा है? तेरे अंकल ने तो कभी भी ऐसा नहीं किया।

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