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पडोसी आंटी की चुदाई की हिंदी सेक्स स्टोरी

गतांग से आगे ….

क्या बात करती हो मेरी जान ! इस अमृत के लिए तो दुनिया तरसती है ! और मैं फिर से चूत चाटने में लग गया।

आंटी ज्यादा देर बर्दाश्त नहीं कर पाई और उसने ढेर सारा रस मेरे मुँह पर उछाल दिया जिसे मैं चाट गया। रस निकलने के बाद आंटी थोड़ी सुस्त सी पड़ गई। मैं उठा और मैंने एक बार फिर अपना लंड आंटी के मुँह में घुसेड़ दिया। आंटी लंड चुसती रही और मैं आंटी की चूची से खेलता रहा।

दो मिनट के बाद ही आंटी बोल पड़ी- बेटा, अब लंड का मजा भी देगा या नहीं इस चूत को। पूरे सोलह साल बाद लंड नसीब हुआ है निगोड़ी को।

क्या बात करती हो आंटी ! आपने इतने साल से लंड का स्वाद नहीं लिया?

हाँ बेटा, तेरे अंकल के मरने के बाद से लंड देखा भी नहीं सही से।

सच ?

हाँ बेटा, तेरे अंकल के मरने के बाद एक बार शैलेश के दादा जी ने मेरे साथ बलात्कार करने के कोशिश की तो मैं शैलेश और सुमन को लेकर शहर आ गई। उनको पालने पोसने में ही जिंदगी गुजर गई। कभी सेक्स के बारे में सोचा ही नही। हाँ, कभी कभी जब ज्यादा दिल करता तो ऊँगली या मोमबत्ती से इस चूत को शान्त कर लेती थी। आप यह हॉट हिंदी सेक्सी कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

मैंने पूछा- फिर आज कैसे?

आंटी बोली- जब तुम रोते हुए मुझसे लिपटे तो तुम्हारे बदन का स्पर्श ना जाने क्यों मुझे बहुत अच्छा लगा और बदन में एक आग सी लग गई और मैं अपने आप को रोक ही नहीं पाई। फिर तुमने मेरी चूची दबा कर उस आग में घी का काम कर दिया। जब तुम्हारे इस लोहे की रॉड जैसे लंड को छुआ तो मैं बेबस हो गई। ऊँगली से आग बुझाना चाहती थी कि तुमने दरवाजा खटखटा दिया। फिर तो तुम्हें मालूम ही है मेरी जान।

सुनते हुए मैं आंटी की चूचियों से खेल रहा था। आंटी फिर से गर्म हो चुकी थी। अब मैं भी देर नहीं करना चाहता था क्योंकि सच में कोई आ भी सकता था।

मैं आंटी की टांगों के बीच में पहुँचा और अपना लंड आंटी की गर्म गर्म चूत के मुँह पर रख दिया।

आंटी बोली- बेटा, अब और ना तड़पा।

मैंने भी जोश में एक जोरदार धक्का लगा किया। मैं यह भूल गया कि आंटी की चूत बहुत सालों से चुदी नहीं है।

आंटी की चीख निकल गई, बोली- बेटा आराम से डाल ! फाड़ डालेगा क्या?

बहुत सालों से चुदी न होने के कारण आंटी की चूत एक दम कोरी चूत की तरह से टाईट हो चुकी थी। मुझे मेरी गलती का एहसास हुआ और मैं फिर धीरे धीरे लंड को आंटी की गर्म चूत में घुसाने लगा। और अगले दो धक्कों में मैंने पूरा लंड आंटी की मस्त चूत में घुसा दिया। फिर शुरू हुआ धक्कों का मुकाबला। आंटी नीचे से अपनी गांड उठा-उठा कर चुद रही थी, मैं भी पूरे जोश से धक्के लगा कर आंटी की चूत का भुरता बना रहा था। मस्ती भरी आहें और सिसकारियाँ कमरे में गूंज रही थी।

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दोनों मस्त हो कर चुदाई का मजा ले रहे थे। आंटी आह्हह्ह आह्हह्ह करके मेरा जोश बढ़ा रही थी, हर धक्के के साथ आंटी बोल उठती- और जोर से मेरी जान ! और जोर से लगा धक्का ! फाड़ दे साली को ! इसे भी बहुत सालों बाद लंड नसीब हुआ है। मार बेटा मार ! और जोर से धक्के मार। सारा रस निकल दे इस चूत का। जल्दी जल्दी कर ! मेरा निकलने वाला हैं।

मैं भी पूरे जोश में था। पूरा आधा घंटा आंटी की चूत का बाजा बजाया। फिर मैं झड़ने के कगार पर पहुँच गया। इस बीच आंटी तीन बार चूत का रस उगल चुकी थी यानि झड चुकी थी। फिर मैं भी अपने आप पर काबू नहीं कर सका। मैंने आंटी से पूछा- कहाँ पानी निकालूँ ?

तो आंटी बोली- बेटा, इस चूत ने सालो से लंड का पानी नहीं पिया है तो बेटा इस चूत में ही डाल दे अपना अमृत। बहुत तरसी हूँ इस अमृत के लिए।

फिर मैंने धक्कों की गति दुगनी कर दी और दस बारह धक्कों के बाद पूरा लंड आंटी की चूत में निचोड़ दिया। जैसे ही मेरा वीर्य आंटी की चूत में गिरा, आंटी ने जोर से मुझे भींच लिया अपने बाहों और टांगों में। आप यह हॉट हिंदी सेक्सी कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |

करीब पांच से दस मिनट तक आंटी और मैं इसी तरह पड़े रहे फिर जाकर आंटी ने अपनी पकड़ कुछ ढीली की। आंटी सोलह साल की प्यास को पूरी तरह से मिटाना चाहती थी।

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