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सुहागरात पड़ोस वाली भाबी के साथ

मेरे प्यारे दोस्तो !

इस कहानी को पढ़ने वाली लड़कियों, भाभियों और आंटियों को मेरा प्यार !

मेरा नाम संचित ठाकुर और मैं तलवाड़ा (होशियारपुर,पंजाब) का रहने वाला हू । उमर 22 साल और देखने में सुंदर हू. मेरे लंड का साइज़ 7 इंच लंबा और 3.5 मोटा है। मेरे परिवार में मैं और मेरे मम्मा पापा ही है। मम्मा पापा सरकारी जॉब करते है . और मैं कॉलेज में पड़ता हू।

कहानी तब की है जब हमारे पड़ोस में रहने एक नया शादीशुदा जोड़ा आया। उनकी शादी को अभी तीन महीने ही हुए थे। कुछ ही दिनो में वो दोनो ह्मारे परिवार से काफ़ी घुल मिल गये। इसी दोरान पता चला कि ह्मारे नये पड़ोसी का नाम सोनू और उसकी पत्नी का नाम नीतू है और वो सरकारी नौकरी करता है। उसकी बदली यहाँ की हो गयी है। ह्मारा उनके घर आना जाना शुरू हो गया ।

मैने कभी भी भाबी को ग़लत नज़र से नही देखा पर मैं उनको मन ही मन पसंद करने लगा था । और करता भी क्यू नही नीतू भाबी बहुत सुन्दर है, ५’४”, लम्बे बाल, गुलाबी होंट, आंखें बड़ी बड़ी और नशीली और आवाज कोयल की तरह है।

मैं सोनू को भाई और नीतू को भाबी बुलाता था और सोनू भी मुझे अपना छोटा भाई ही समजता था । सुबह हम चारो (मैं,मम्मा,पापा और सोनू भाई) एक साथ ही निकलते थे घर से ,पर मेरे कॉलेज से मुझे 1 बजे छुट्टी हो जाती थी इसलिए सबसे पहले मैं ही वापिस आता था। दूसरी तरफ नीतू भाबी सारा दिन घर में बोर हो जाती थी । मेरे कॉलेज से आने के बाद वो ह्मारे घर आ जाती और हम दोनो खूब बातें करते ।नीतू मुझे संचित जी और मैं उनको भाबी ही बुलाता था। लेकिन मेरी हिम्मत नही होती थीउनको बताने की मैं उनको पसंद करता हू। ऐसे ही बातों बातों में मुझे पता चला की नीतू भाबी मेरी ही उमर की है।

एक दिन सोनू भैया शाम को घर पर आए और बोले कि मैं एक सप्ताह के लिए चंडीगड़ जा रहा हूँ ऑफीस के काम से और मम्मा पापा को बोला की आप नीतू का ख़याल रखना ।

पापा ने कहा- तुम चिन्ता मत करो। हम नीतू का ख़याल संचित की तरह ही रखेंगे ।

भैया को उसी शाम निकलना था सो मैं उन्हे बस स्टॉप तक छोड़ के आया । जाते जाते भी उन्होने यही कहा की नीतू का ख़याल रखना तो मैने कहा भैया हम सब है ना उनके पास ,आप आराम से जायो और वो चले गये।

फ़िर अगले दिन नीतू का फ़ोन आया कि संचित जी आज हम बाज़ार चलें अगर आप को कोई और काम ना हो तो मुझे कुछ समान लाना है।
मैने नीतू को शाम पांच बजे का समय दिया और शाम को जब मैं भाभी के घर गया तो वो बाज़ार जाने के लिए तैयार थी।
आज भाभी ने सफ़ेद कमीज़ और काले रंग की जींस पहन रखी थी और आज भी काफ़ी सुन्दर दिख रही थी। मैंने भाभी को बताया कि मैं कार ले कर आया हूँ तो भाभी ने कहा कि बाज़ार में कार बहुत तंग करती है इसलिए आओ अपनी बाईक ले लो। फ़िर मैं बाइक ले आया और वो बाईक पर लड़कों की तरह बैठी। ब्रेक लगने पर भाभी की चूची मेरी कमर से लग जाती। मुझे बहुत खुशी हो रही थी कि कम से कम भाभी और मैं आपस में स्पर्श तो हुए।

खरीदारी के बाद मैंने भाभी से पूछा कि आप क्या खाएंगी तो वो बोली कि कुछ भी जो आप खाएं। हमने एक होटल में जाकर कुछ खाया पिया और घर की ओर चल दिए। शाम के साढ़े सात से ज्यादा बज गए थे तो भाभी को घर छोड़ कर मैं बोला – भाभी मैं चलता हूँ।

भाभी बोली-मैं चाय ला रही हूँ, काफ़ी थक चुके हैं ! फ़िर मैंने और भाभी ने चाय पी और थोड़ी देर बाद मैं अपने घर आ गया।

आज भाभी के साथ रहने से हम दोनों काफ़ी खुल गए थे और मज़ाक भी कर लेते थे। अगले दिन रविवार होने के कारण मैं नीतू के घर गया तो भाभी एक किताब पढ़ रही थी। मुझे देख कर बोली- अच्छा हुआ संचित जी आप आ गए, मैं बहुत बोर हो रही हूं।
अगर आप कहें तो कोई मूवी देखने चलें?

मैंने हाँ कर दी तो भाभी बोली- मैं तैयार हो कर आती हूँ।

जब भाभी आई तो मैं देखता ही रह गया क्योंकि भाभी लाल रंग की साड़ी और ब्लाऊज़ में थी। मैं भाभी को देखता ही रहा तो वो बोली-संचित जी क्या हुआ ! कहां खो गए?

मैंने तुरन्त कहा- भाभी जी ! आपको देख कर खो गया हूँ, आप बहुत सुन्दर लग रही हैं। तो भाभी हंसने लगी। फ़िर हम दोनों अपनी कार में जालंधर के लिए निकल पड़े क्यूकी ह्मारे वहाँ तो कोई माल है नही। जालंधर आकर हम माल में गए और मूवी देखने लगे।
अच्छी मूवी थी। जैसे ही हम माल से बाहर निकले तो किसी ने मुझे आवाज़ दी मैने पलट कर देखा तो वो राहुल था मेरा स्कूल टाइम का बेस्ट फ्रेंड।

मैं रुका और राहुल और उसकी पत्नी से मिला और उनको नीतू से मिलवाते हुए कहा- यह नीतू है…

मेरी बात पूरी भी नहीं हुई थी कि राहुल बोल पड़ा- भाभी जी नमस्ते ! और मुझसे बोला- यार ! शादी भी कर ली और बताया भी नहीं !

मैंने कहा- ऐसी कोई बात नहीं… !

लेकिन मेरी बात काट कर राहुल बोला- भाभी चलो, हमारे घर चलते हैं, तो मैंने मना किया और कहा कि बाद में आउंगा।
पर राहुल ने कहा कि नहीं आज ही !

तो हम राहुल के घर चल दिए। घर आकर राहुल ने कहा- यार ! शादी में क्यों नहीं बुलाया? इससे पहले कि मैं कुछ कहता।
नीतू बोल पड़ी- राहुल जी ! हमारी लव मैरिज़ है और अचानक ही हो गई, इसी कारण किसी को भी नहीं बुला पाए। राहुल और उसकी बीवी ने हमें खाना खाने के बाद ही आने दिया। अब रात भी हो चुकी थी। हम घर के लिए निकले और मैंने कहा- भाभी जी !
आपने ऐसा क्यों कहा?

तो भाभी बोली- आपको बुरा लगा क्या?

मैंने कहा- नहीं ऐसी कोई बात नहीं !

तो वो बोली- फ़िर क्या बात है?

मैंने कहा- भाभी ! हमारी ऐसी किस्मत कहाँ कि आप हमारी पत्नी बनें !

भाभी बोली- पत्नी नहीं पर भाभी तो हूं !

मैंने कहा- हाँ ! यह तो है !

फ़िर हम घर आ गए और मैंने कहा कि भाभी रात के ग्यारह बज गए, मैं चलता हूँ।

भाभी ने कहा- रुको ! ज़रा मैं कपड़े बदल लूँ ! और भाभी काले रंग का गाऊन पहन कर मेरे पास बैठ गई और बोली- संचित जी, शादी कब करोगे?

मैंने कहा- जब आप जैसी कोई मिल जाएगी तो कर लूंगा, आज मिले तो आज ही कर लूंगा।

कीर्ति ने कहा- अगर मैं ही मिल जाऊं तो?

भाभी की इस बात को सुन कर मैं दंग रह गया और कुछ बोल नहीं पाया।

भाभी बोली- संचित जी ! क्या हुआ, सांप सूंघ गया क्या?

मैंने कहा- नहीं भाभी पर मैं समझ नहीं पाया कि आपने क्या कहा।

तो नीतू ने कहा- मैं आप से प्यार करती हूँ।

मैंने कहा- सोनू भइया?

भाभी ने कहा- सोनू जी को कुछ पता नहीं चलेगा। इतना कह कर भाभी मेरे पास लेट गई और मुझे किस किया। मैं भी उसे पसन्द करता था इसलिए मैं भी विरोध ना कर सका।

फ़िर भाभी बोली- संचित, अगर आपको मैं पसन्द नहीं तो रहने दो।

मैंने कहा- नहीं भाभी ! ऐसी कोई बात नहीं, आप मुझे अच्छी लगती हो।

नीतू ने कहा- तो मुझे नीतू नाम से पुकारो !

मैंने कहा- नीतू ! मैं तुमसे प्यार करता हूँ और मैंने नीतू को उसके लाल रंग के होटों पर किस किया और फ़िर तो मैं और नीतू एक दूसरे के मुँह में जीभ देने लगे। आधे घण्टे इस तरह एक दूसरे के साथ चिपके रहे। तब नीतू ने मेरे सारे कपड़े उतार दिए, मैंने भी नीतू के कपड़े उतारने शुरू कर दिए।

नीतू बोली- संचित, आज तुम्हारी मेरे साथ पहली सुहागरात है, अभी रुको, आज हम सुहागरात मनाएंगे, मैं तैयार होती हूँ।, तुम एक अच्छी सी नग्न फ़िल्म लगाओ।

मैंने एक ब्लू फ़िल्म लगा दी और देखता रहा। काफ़ी देर बाद नीतू आई वो शादी का जोड़ा पहन कर आई थी और काफ़ी सुन्दर दिख रही थी। आते ही मैंने उसे अपनी तरफ़ खींच लिया और किस करने लगा। मैं कुछ जल्दी कर रहा था तो नीतू ने कहा- जल्दी ना करो, पूरी रात बाकी है।

मैं नीतू की चूची जोर जोर से दबाने लगा तो वो गरम हो गई। मैंने एक एक कर के नीतू के सारे गहनें उतार दिए और फ़िर उसका ब्लाउज़ भी उतार दिया। फ़िर जब लहंगा भी उतार दिया तो नीतू के शरीर पर केवल ब्रा और पैन्टी ही बची थी। उसकी आंखें बंद थी और वो गर्म सांसें छोड़ रही थी। मैं नीतू के शरीर के सब हिस्सों पर किस करने लगा और फ़िर मैंने उसकी ब्रा को भी फ़ाड़ के उसके शरीर से अलग कर दिया। जैसे ही मैंने उसकी पैन्टी को हाथ लगाया तो वो गीली थी।

मैंने नीतू से कहा- नीतू ! तुम तो झड़ चुकी हो।

उसने कहा- हाँ !

लेकिन मैं तो अब भी पागल हो रहा था, शायद मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि यह सच है। मैंने नीतू के शरीर से पैन्टी अलग कर दी और उसकी पैन्टी अपने लण्ड से रगड़ने लगा तो नीतू ने कहा- इसे छोड़ो, मैं हूँ ना !

उसके बाद नीतू ने मेरे लण्ड को पहला स्पर्श किया तो लण्ड पहले से भी ज्यादा गर्म और कड़क हो गया। वो मेरे लण्ड को आगे पीछे कर रही थी और मैं उसकी चूची को मुँह में लेकर चूसने लगा। नीतू के मुँह से सी सी की आवाज़ें आने लगी और वो अपने चूतड़ ऊपर करने लगी।

फ़िर नीतू ने मेरे लण्ड को अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू किया तो ऐसा लगा कि मैं उसके मुँह में झड़ जाऊंगा।

मैंने नीतू से पूछा- नीतू, तुमने सोनू से पहले किसी के साथ यह काम किया है?

तो उसने कहा- पहले मुझे पता ही नहीं था कि इसमें इतना मज़ा आता है।

मैंने कहा- तुम्हें सोनू के साथ मज़ा नहीं आता क्या?

तो नीतू ने कहा- आता है ! लेकिन मैं तुमसे प्यार करती हूँ और तुम्हारे ही बच्चे की माँ बनना चाहती हूँ। अगर मैं तुमसे प्यार ना करती तो क्या मैं ऐसे सुहागरात मनाती।

यह सुन कर मुझे अच्छा लगा और मैंने नीतू के मुंह में अपनी जीभ दे दी। मैंने उससे पूछा कि तुम्हारे पास कन्डोम होगा? तो नीतू ने कहा- कंडोम की जरूरत नहीं है।

फ़िर मैंने नीतू की चूत पर अपना लण्ड रख कर अन्दर किया तो आधा उसकी चूत में चला गया। एक और झटके में मैंने पूरा का पूरा लण्ड नीतू की चूत में डाल दिया और जोर जोर से झटके मारने लगा तो नीतू को भी मज़ा आने लगा। दस बारह झटकों में मैं झड़ गया और नीतू भी झड़ गयी और उसकी चूत में अपना वीर्य डाल दिया।

फ़िर नीतू ने मेरा लण्ड अपने मुँह में ले लिया तो मेरा लण्ड पाँच मिनट में ही पहले की तरह खड़ा हो गया। फ़िर मैंने नीतू को घोड़ी बना कर चोदा। इस प्रकार हम सुबह के चार बजे तक चुदाई करते रहे और हमें कब नींद आ गई पता ही नहीं चला।

सुबह साढ़े पाँच बजे घर पर बैल बजी तो नीतू ने अपना गाऊन पहना और गेट पर जाकर आई तो मैंने पूछा कि कौन था?

उसने कहा- दूध वाला था। संचित ! तुम चाय लोगे?

तो मैंने हाँ कर दी। नीतू चाय ले कर आई तो मैं नंगा ही लेटा था। मैंने नीतू को अपने पास खींच लिया तो उसने कहा कि अब भी कोई कमी रह गई है क्या !

मैंने कहा- हाँ ! और उस कमी को पूरा करना है।

तो नीतू ने कहा- सुबह हो चुकी है, संचित अब रहने दो !

लेकिन मेरे लण्ड को तो गर्मी चढ़ी थी। नीतू मना करती रही और मैं नीतू को खींचता रहा। ऐसा करने से नीतू का गाऊन फ़ट गया और नीतू मुझ से लिपट गई। फ़िर हमने तीन बार काम किया और एक बार नीतू के मुँह में झाड़ा। नीतू काफ़ी खुश थी।

नीतू ने कहा- अब जब तक सोनू नहीं आ जाता, आप ही मेरे पति की तरह यहाँ पर रहोगे। इस प्रकार हम एक दूसरे को मज़ा दिलाते रहे और अब जब भी सोनू बाहर जाता है तो हम खूब चुदाई करते हैं।

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