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भाई बहन की कामवासना – 4

गतांग से आगे ….

अह्हह्ह्ह्ह …… वैशाली के मुंह से एक सिसकारी निकली । उसकी चूत के अंदर गीलापन बढ़ने लगा । तभी उस अजनबी ने चूत के अंदर अपनी ऊँगली घुसा दी और अंदर बाहर करने लगा । वैशाली ने अपने हाथ से उसकी बांह पकड़ ली और आंखें उत्तेज़ना से बंद करके सिसकाउर्मिलां लेने लगी।
तुम मेरा इंतज़ार कर रही थीं , है ना ? वो मुस्कुराया ।

हाँ , मुझे तुम्हारी बहुत याद आ रही थी वो आँखें बंद किये ही मादक आवाज़ में धीरे से बोली ।

तुम ऐसे ही लेटी रहो । मैं तुम्हें भरपूर प्यार करूँगा तब तक , जब तक कि तुम पूरी तरह से तृप्त नहीं हो जाओगी ।

फिर वो उसकी टाँगें फैलाकर उनके बीच आ गया और बिना देर किये अपना तना हुआ लंड वैशाली की चूत में घुसा दिया । फिर उस टाइट चूत में अपने मोटे लंड को अंदर बाहर करके सटासट धक्के लगाने लगा ।

आय लव यू ! ….….आह हहह …… सिसकाउर्मिलां लेते लेते वैशाली के मुंह से निकला ।

वो आगे झुक गया और वैशाली के कांपते होठों पर अपने होंठ रख दिये और धक्कों के साथ ही चुम्बन भी लेने लगा । वैशाली अब मदहोश थी । और तेज और तेज …….आह हहह …. मैं झड़ने वाली हूँ ….प्लीज और जोर से करो।

उसके धक्के तेज तेज होते गए और वैसे ही वैशाली की सिसकाउर्मिलां भी बढ़ती चली गयीं । कुछ देर बाद वैशाली के मुंह से एक तेज चीख निकली और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया । अजनबी के धक्के हलके हो गए और उसका लंड वैशाली की चूत से निकले पानी की बाढ़ में डूब गया ।

वैशाली , तुम ठीक तो हो ? तभी अमन ने उसका दरवाज़ा खटखटाया ।अभी अभी मैंने तुम्हारी चीख सुनी ।

पूरी तरह से पसीने से तर बतर वैशाली सपने से जाग जाती है । उसकी साँसें तेज तेज चल रही थीं , छाती तेजी से ऊपर नीचे हो रही थी । और पूरा बदन उत्तेजना से काँप रहा था । आप यह हॉट हिंदी सेक्सी कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | एक गहरी साँस लेकर उसने अपने ऊपर काबू पाने की कोशिश की और बिखरे हुए चादर को अपने ऊपर छाती तक खींच लिया । तभी उसे अपने नितम्बों के नीचे कुछ गीलापन महसूस हुआ , उत्तेजक सपने से उसका पानी निकल गया था ।

मैं ठीक हूँ । शायद कोई बुरा सपना था । तुम अंदर आ जाओ अमन हड़बड़ा कर अटकती साँसों के बीच उसने जैसे तैसे कहा ।

कमरे के अंदर आकर अमन उसके पास बेड में बैठ गया ओर उसका हाथ अपने हाथ में पकड़ लेता है ।
और फिर से पूछता है कि क्या वो ठीक है ?
वैशाली हाँ में सर हिला देती है ।

तुम्हारी सांसें इतनी तेज़ चल रही हैं , जैसे तुम अभी दौड़ कर आ रही हो । ऐसा क्या देख लिया तुमने सपने में ? ”

क ….कुछ नहीं । मैं अब ठीक हूँ । बस कोई बुरा सपना था ।”

वैशाली अमन को क्या बताती , बेचारी बस गहरी साँस लेकर रह गयी ।

मैं बैठू क्या कुछ देर तुम्हारे पास ? चिंतित स्वर में अमन बोला ।

नहीं , ऐसी कोई बात नहीं , कहा ना मैं ठीक हूँ । थैंक यू वैशाली हलके से मुस्कुरायी ।

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अमन थोड़ी देर कंफ्यूज सा वहीँ बैठा रहा । इतना तो वो भी समझ गया था कि वैशाली उससे अपना सपना डिसकस नहीं करना चाह रही है । लेकिन ऐसी अजीब हालत में उसने वैशाली को पहले कभी नहीं देखा था ।बहन के लिए प्यार की वजह से उसका दिल वैशाली को अकेला छोड़ने का नहीं कर रहा था पर वैशाली ने भी तो उसको मना कर दिया था । थोड़ी देर बाद वैशाली के माथे पर किस करके अमन अपने रूम में चला गया ।

अमन के अपने माथे पर किस करने से फिर वैशाली को नज़दीक से वही पहचानी सी गंध महसूस हुई , उसके शरीर में कपकंपी सी छूट गयी । उस पहचानी गंध से ही अब वो उत्तेजित हो जा रही थी । फिर अपना सर झटकते हुए , वो मन ही मन झेंप सी गयी । छी….मैं भी कैसी पागल हूँ । अपने भाई के शरीर से आती गंध की तुलना उस अजनबी से कर रही हूँ । ऐसे विचार मेरे मन में आ कैसे सकते हैं … छी …अपने प्यारे भाई के लिए । वो तो कोई और लड़का था , अमन थोड़े ही न था । लेकिन फिर भी अमन के मेरे नज़दीक आने से उस पहचानी सी गंध से मुझे उत्तेजना क्यों आ जा रही है ?

अपने इस प्रश्न का उत्तर उसके पास नहीं था क्योंकि वो सपने में भी नहीं सोच सकती थी कि जिस अजनबी ने पार्टी की उस रात उसको भरपूर यौनसुख दिया था और जो अभी अभी उसको सपने में तृप्त करके गया है , वो और कोई नहीं उसका अपना छोटा भाई अमन था । जब दोनों आदमी एक ही थे तो गंध तो एक होगी ही । अब अमन के शरीर से आती पसीने की उसी गंध से वैशाली के अचेतन मन को अजनबी के अपने आसपास होने का आभास हो रहा था इसलिए वो उत्तेजित हो जा रही थी । पर बेचारी वैशाली को ये सब कहाँ मालूम था । वो तो एक जाल में उलझती सी जा रही थी । क्योंकि अमन के साथ एक ही छत के नीचे रहने से उस गंध से वैशाली का पीछा छूटने वाला नहीं था ।

उस बेचारी को तो ये भी नहीं पता था कि हलके नशे की हालत में उसने उर्मिला के साथ मिलकर जो खेल समझकर प्लान बना डाला था । उससे उसकी किस्मत ने एक ऐसा फेर ले लिया था जो आगे चलकर उन दोनों भाई बहन की जिंदगी में , उनके आपसी रिश्तों में , भूचाल लाने वाला था । जिससे वो दोनों अब तक अनजान थे । उन्हें आगे आने वाले कठिन समय का कुछ अंदाजा ही नहीं था ।

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The Author

गुरु मस्तराम

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