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भाई बहन की कामवासना – 5

भाई बहन की कामवासना – 3
भाई बहन की कामवासना – 4

दोस्तों अब आगे की कहानी … रविवार को दिन भर वैशाली घर की साफ़ सफाई , खाना पकाने , कपडे धोने और अपनी पढाई में व्यस्त रही । लेकिन अजनबी के ख्याल उसको आते रहे । रात में फिर से वैसा ही सपना पिछली रात से भी ज्यादा उत्तेजना के साथ आया । वो अजनबी फिर से उसके सपनो में आया और वैशाली को जबरदस्त ओर्गास्म दे गया । जितना वो उस रात के बारे में सोचती , उतना ही ज्यादा उस अजनबी को पाने की उसकी इच्छा बढ़ती गयी । वैशाली उस अजनबी को इकतरफा प्यार करने लगी । अमन के शरीर से आती वही पहचानी सी गंध से उसकी आग और भड़कते गयी ।

सोमवार की सुबह उठते ही वैशाली ने निश्चय कर लिया , वो आज उर्मिला से पूछकर ही रहेगी कि वो लड़का कौन था ।

सोमवार की सुबह उठते ही वैशाली ने निश्चय कर लिया , वो आज उर्मिला से पूछकर ही रहेगी कि वो लड़का कौन था ।
उसको किसी भी तरह एक बार उस अजनबी से मिलना था , उसको देखना था । वैशाली उसको एक बार फिर से अपने नज़दीक महसूस करना चाहती थी पर इस बार आँखें खोल के । वो उसको छूना चाहती थी , उससे बातें करना चाहती थी । ज्यादा नहीं तो कम से कम एक बार , शायद ऐसा करने से उसका उन सपनों से पीछा छूट जाये ।

दोपहर को लंच टाइम में वैशाली , उर्मिला को कैंटीन में एक कोने की सीट में ले गयी ।

कौन था वो ? ”

कौन ? किसकी बात कर रही है तू ?

अरे वही जो उस रात पार्टी में लड़का …….जिसे तू पकड़ लायी थी मेरे पास ।”

क्या…..? उर्मिला सन्न रह गयी । पागल हो गयी है क्या ? होश में तो है तू ? नहीं , तू उसको नहीं जानना चाहती ।”

हाँ , मैं बिलकुल उसको जानना चाहती हूँ वैशाली थोड़ा शरमाते हुए बोली ।

उर्मिला वैशाली की बात से अभी भी सदमे में थी । उसके मुंह से जोर से निकला ,
तू ना पक्की छिनाल हो गयी है ।

आसपास की लड़कियां मुड़कर उन दोनों को देखने लगीं ।

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वैशाली का चेहरा गुस्से से तमतमा गया ।

वैशाली का गुस्से से भरा चेहरा देखकर उर्मिला को हंसी आ गयी । वो वैशाली की तरफ झुककर धीरे से बोली ,
बहुत बड़ा था क्या उसका ?

उसकी बात पर वैशाली भी मुस्कुराने लगी हाँ , मोटा भी था । मुझे मिला दो ना उससे । मुझे वो फिर से चाहिए।

मुझे तो विश्वास ही नहीं हो रहा कि तू उससे दोबारा मिलना चाह रही है उर्मिला सर झटकते हुए बड़बड़ायी ।

अरे तू क्यों टेंशन ले रही है , मैं उसके साथ अपनी जिंदगी थोड़ी शुरू करने वाली हूँ वैशाली मुस्कुरायी ।

हाँ बच्चू , मैं अच्छी तरह से समझ रही हूँ कि तेरे को वो दुबारा क्यों चाहिए , उसने तेरे अंदर कुछ ज्यादा ही माल गिरा दिया है , है ना ? उर्मिला थोड़ा कड़वे स्वर में वैशाली की चूत की तरफ इशारा करते हुए बोली ।आप यह हॉट हिंदी सेक्सी कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |  वैशाली की जिद से वो irritate हो गयी थी ।

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हम्म .. .. मुंह में गिराया वैशाली अपने खुले मुंह की तरफ इशारा करते हुए खी खी करके हंस पड़ी ।
लेकिन अबकी बार देखना , मैं उसका पूरा मुंह भर दूंगी , अपने रस से ।

छी छी ! तू कितनी गन्दी बातें करने लगी है उर्मिला गन्दा सा मुंह बनाकर बोली , फिर जोर से हंस पड़ी । उसने पहले कभी वैशाली को ऐसी बातें कहते नहीं सुना था । कम बोलने वाली , अपने में मगन रहने वाली वैशाली आज उससे बहकी बहकी सी बातें कर रही थी । ये सब उसी लड़के का असर है तुझ पर ।

हाँ हाँ , मुझे मालूम है । लेकिन मैं तुझे बता नहीं सकती कि उसके बारे में सोचने से ही मैं कितना उत्तेजित हो जाती हूँ वैशाली ने अपना राज खोल ही दिया । जबसे मैं पार्टी से घर गयी हूँ , बस उसी के सपने देख रही हूँ दिन रात। ”

और अब तुझे इस सपने को पूरा करने के लिए मेरी मदद चाहिए , है ना ?”

हाँ वैशाली मुस्कुरायी ।

ठीक है …मैं मदद कर दूंगी तेरी , लेकिन मैं भी मज़ा लूँगी उससे , क्या ख्याल है बोल ? उर्मिला थोड़ा नखरे दिखाते हुए बोली ।

तू लेना मज़े …..कौन मना कर रहा है ….उसके तो दोनों हाथों में लड्डू होंगे , वो तो खुश हो जायेगा ।वैशाली हंस पड़ी ।

ठीक है यार । अगर तू अब उसके पीछे इतना ही पागल हो रही है तो मैं पता करुँगी उससे कि वो तुझसे मिलने को राजी है भी या नहीं ।”

मैं कुछ नहीं जानती बस ये तेरी जिम्मेदारी है कि तू उसको राजी कर मुलाकात के लिए , इसी में तेरी भलाई है समझी वैशाली उर्मिला को बनावटी धमकी देती हुई बोली ।

अच्छा तो तू उसको फिर से अपने ऊपर चढ़ने देगी ।…..हैं ?… उस दिन तो बड़ा कह रही थी कि मैं उसको नहीं जानना चाहती , वो मेरे को ना जान पाए । तब तो बड़ी बड़ी बातें कर रही थी। मैं अभी किसी रिलेशनशिप में इन्वॉल्व नहीं होना चाहती हूँ । मैं कोई कमिटमेंट का झंझट नहीं रखना चाहती हूँ । जान पहचान का लड़का नहीं होना चाहिए । अब क्या हुआ उन बातों का । इतनी जल्दी पलट गयी अपनी बात से
उर्मिला ने हाथ नचाते हुए ताना मारा ।वैशाली की ज़िद तोड़ने को , उसी की बातें याद दिलाकर आखिरी तीर चलाया ।

इससे पहले तो कभी मेरे साथ ऐसा नहीं हुआ । मुझे कभी किसी ने ऐसा बेचैन नहीं किया ।कोई ऐसे मेरे सपनों में कभी नहीं आया ।किसी ने मेरे दिल के तारों को पहले कभी ऐसे नहीं छुआ । कुछ तो स्पेशल बांड है मेरा उससे । मुझे लगता है मेरे सपनों का शहजादा कहीं ये ही तो नहीं । जिस लड़के का इंतज़ार मुझे वर्षों से था कहीं वो ये ही तो नहीं । क्या पता मेरी किस्मत ही मुझे उसके पास ले जा रही है ।

उर्मिला ने मन ही मन सोचा कि वैशाली ने सपनों के जो महल बना लिए हैं वो कहीं टूट न जाएँ । एक अज्ञात आशंका ने उसको घेर लिया कहीं उसकी प्यारी दोस्त का दिल फिर से न टूट जाये । वो भावुक लड़की ये सदमा बर्दाश्त नहीं कर सकेगी ।

फिर वो एकदम से सीरियस होकर वैशाली को समझाने लगी ,
देख वैशाली , तू मुझे गलत मत समझ । मैं तेरे और उस तेरे लवर के बीच नहीं आ रही हूँ । मैं तेरा बुरा क्यों चाहूंगी । लेकिन मुझे लगता है ये ठीक नहीं है । उस दिन हमने decide किया था कि रात गयी बात गयी । अब इस मामले को फिर से खोलना ठीक नहीं है । मेरे ख्याल से तू ये जिद छोड़ दे , कुछ दिनों में तू उसे भूल जाएगी । फिर सब पहले जैसे ही चलने लगेगा । ये बात तो तू भी मानेगी कि दुनिया की समझ तुझसे ज्यादा मुझे है , मैं तो तेज तर्रार लड़की हूँ । तू बहुत प्यारी लड़की है , एकदम भावुक । सबको अपना जैसा समझने लगती है । पर सब ऐसे नहीं होते । मुझे बड़ा डर है कि कहीं तेरा दिल फिर से ना टूट जाये । बड़ी मुश्किल से तो अभी संभली है तू , अपने ब्रेकअप के बाद से । मैं अपनी प्यारी दोस्त को फिर से गम के सागर में डूबते नहीं देख सकती । मुझे कुछ अंदर से महसूस हो रहा है कि तू ये ठीक नहीं कर रही है । कहीं कुछ तेरे साथ बुरा ना हो जाये ।

मुझे नहीं मालूम , मुझे क्या हो गया है । मैं बस एक बार उससे मिलना चाहती हूँ । उसको अपनी आँखों से अपने सामने देखना चाहती हूँ । वैसे भी मैं उसके साथ ऐसा कुछ नया तो नहीं करुँगी जो उसके साथ पहले से ही ना कर चुकी हूँ वैशाली ने कंधे उचकाते हुए कहा ।

ये सब बहाने बाज़ी है , तुझे बस उसका मोटा लंड फिर से अपनी चूत में चाहिए और कुछ नहीं ।अगर मरना ही तेरी किस्मत है तो मर मेरी बला से । अपनी बातों का उस पर कुछ असर ना होता देख उर्मिला को अब गुस्सा आ गया था ।

नाराज़ क्यों होती है यार , मैं वास्तव में सिर्फ ये जानना चाहती हूँ कि वो कौन लड़का था । क्या पता वो शकल सूरत में मुझे पसंद ही ना आये , ऐसा भी तो हो सकता है । जरुरी थोड़े ही है कि वो मुझे अच्छा ही लगे ।

कहानी जारी है … आगे की कहानी पढ़ने के लिए निचे दिए पेज नंबर पर क्लिक करें ….

The Author

गुरु मस्तराम

दोस्तो मैं यानी आपका दोस्त मस्ताराम, मस्ताराम.नेट के सभी पाठकों को स्वागत करता हूँ . दोस्तो वैसे आप सब मेरे बारे में अच्छी तरह से जानते ही हैं मुझे सेक्सी कहानियाँ लिखना और पढ़ना बहुत पसंद है अगर आपको मेरी कहानियाँ पसंद आ रही है तो तो अपने बहुमूल्य विचार देना ना भूलें

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