भाई की भूखी निगाहे भोसड़ा सुजा दी

मित्रो मैं सुखराज, आपका दोस्त, मध्य प्रदेश के नेपानगर जिले से, एक बार फिर हाजिर हूँ आपके लौडों को पानी और चुतो को चमचम बनाने के लिए। आज मैं आपको मेरी जिंदगी में घटी एक अद्भुत घटना, मेरी बहन के शब्दों में सुना रहा हूँ।

दोस्तों आज मैं आपको एक अपनी ज़िंदगी की खूबसूरत पल का एहसास आपके सामने प्रस्तुत कर रही हूँ, इसमें कोई बनावटी बात नहीं है, सिर्फ मैंने अपने एहसास को शब्दों के माध्यम से आपके सामने ला रही हूँ।

सभी के ज़िन्दगी में कुछ ऐसे पल आते हैं जहाँ रिश्तों की मर्यादा टूट जाती है, मेरे साथ भी यही हुआ। मैंने रिश्तों की मर्यादा को तार तार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, करती भी क्या, कुछ रास्ता भी नहीं था।

जवानी की दहलीज़ पे बड़ी सी बड़ी गलतियां आसानी से हो जाती है। मैं मध्य प्रदेश के नेपानगर जिले में रहती थी। मेरी उम्र उस समय 21 साल की थी, मैं अपने दादी के साथ रहती थी, क्योंकी मेरे पापा, माँ और भाई बहन सारे जयपुर में रहते थे।

मेरे अंकल का लड़का सुखराज भी यही नेपानगर में ही रहता था। अब क्यों की उसकी उम्र मेरे से काफी छोटी थी, वो रोज मेरे घर आया करता है मेरे घर के बगल में उसका घर था। मैं खाना बनाती थी वो मेरे चूल्हे के पास ही बैठा रहता था।

मैं मोबाइल में गाना सुनती और वो गाने का विश्लेषण करता, वो मेरे से काफी हिला मिला रहता था, मैं भी उसके साथ अपनी मन की बात को शेयर किया करती थी। मैं भरपूर जवानी की दहलीज़ पे थी, मेरी चूचियाँ भी काफी बड़ी बड़ी ब्रा से बांध के रखती, पर कमबख्त जवानी छलक ही जाती थी।

जब मैं चूल्हे को फूँक रही होती उस समय मेरी आधी चूचियाँ बाहर आ जाती और सुखराज मेरी चूचियों को देखकर मज़ा लेता, जब मैं मटक के आँगन में चलती तो वो मेरी चूतड़ को निहारते रहता, मुझे भी अच्छा लगता।

मेरी दादी शाम के करीब ७ बजे तक खाना खा के सो जाती थी, मैं फ़ोन पे गाने सुनकर करीब ९ बजे तक सोती, एक बार सुखराज रात को करीब ८ बजे आया और बैठ के अपनी एग्जाम के बारे में बातचीत करने लगा।

दादी घर के बाहर बंगले पे एक कमरा था वही सोती थी, गाँव में बिजली बड़ी मुस्किल से आती थी, सार काम लालटेन से ही होता था, हम दोनों बैठ के बात कर रहे थे, तभी जोर से आंधी चलने लगी, आँगन में पड़े सामान को मैं कमरे में रखने लगी, वो भी मेरी मदद कर रहा था।

और कुछ देर में बारिश होने लगी, मैं भीग गयी थी, मेरा कपड़ा मेरे बदन पे चिपक गया था। उस दिन मैं ढीला ढाला सूट पहन रखा था, ब्रा भी नहीं पहनी थी, भीगने की वजह से मेरे कपडे बदन में चिपक गए था,

मेरी दोनों चूचियों साफ़ साफ़ दिखाई दे रही थी, मेरे गांड भी वैसे ही दिखाई दे रहे थे।

जब मैं लालटेन की रौशनी में आती मेरा भाई सुखराज भूखी निगाहों से मुझे देख रहा था, मैंने देखा की उसका लंड खड़ा हो रहा था उसने ट्रैक सूट पहन रखा था, मेरा भी मन डोल रहा था. पर रिश्तों की मर्यादा का भी ख्याल था, क्यों की वो मेरा चचेरा भाई था।

अचानक से सुखराज ने मुझे पीछे से पकड़ लिया, उसके दोनों हाथ मेरे चुचों पे थे, वो कह रहा था, माफ़ करना दीदी अब बर्दाश्त के बाहर है, अगर मैं अपनी चुदास की भूख नहीं मिटाऊंगा तो मैं पागल हो जाऊंगा।

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मैंने उसके दोनों हाथ को पकड़ के हटाने की कोशिश की पर वो जोर से पकड़ रखा था, मैंने कहा सुखराज ये गलत बात है मैं तुम्हारी दीदी हूँ तुम मेरे साथ ऐसे नहीं कर सकते हमारा रिश्ता भाई बहन का है।

उस पर सुखराज बोला, मैं आपका भाई हूँ और रहूँगा भी हमेशा लेकिन ये किसी को भी पता नहीं चलेगा, मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ, मैं आपके साथ सेक्स करना चाहता हूँ, उसकी मजबूत बाहों ने मुझे भी पिघला दिया।

मुझे भी वो जकड़न अच्छा लगने लगा फिर मैं बड़े ही शांत स्वर में सुखराज से कहा, सुखराज पता है ये बात किसी को पता चल गया तो क्या हाल होगा।
सुखराज ने कहा माँ कसम दीदी मैं कभी भी किसी को नहीं बताऊंगा, मैंने कहा ठीक है, पर बस एक बार ही दूंगी, पहले प्रोमिस करो, सुखराज ने प्रोमिस किया की एक ही बार वो मुझे चोदेगा।

मैंने उसके तरफ घूम गयी, वो अब चूचियों को छोड़ कर मेरे बड़े बड़े चूतड़ को दोनों हाथ से दबा के अपने लंड के पास मेरे चूत से सटा लिया और धक्का मारने लगा, मैंने उसके होठ को
अपने होठ से चूमना शुरू कर दी।

आंधी तेज चल रही थी ठंड के मौसम में लंड का एहसास ,,आअह्ह्ह्ह्ह, मेरा शरीर गरम हो चुका था, मैं सुखराज का लंड मेरे भोसड़े में लेने के लिए काफी व्याकुल थी।
मैं चुदना चाह रही थी, तभी सुखराज ने मेरे ऊपर के गीले कपडो को उतार दिया, ओर मेरे बड़े बड़े चूचे उसके सामने जैसे ही आजाद हुए वो बच्चो की तरह पिने लगा।

मैंने पूछा सुखराज क्या मिल रहा है इसमें, इसमें से तो कुछ भी नहीं निकलेगा, सुखराज ने कहा दीदी जब लड़की की चूची को पियों को अमृत दूध से नहीं बूर से निकलने लगती है देखो हाथ लगा के अपनी चूत पे अमृत निकल रहा होगा।

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मैंने अपने सलवार का नाड़ा ढीला किया और चूत पे हाथ लगा के देखा तो चूत गरम हो चुकी थी और लस लसीला पदार्थ निकल रहा था, मैंने कहा हाँ सुखराज सही कर रहे हो चूत से तो अमृत निकल रहा है पर तुम ऊपर क्या कर रहे हो पीना है तो अमृत पियो।

वो चूची को छोड़कर निचे बैठ गया और मैंने दोनों पैर फैला दिए बीच में आके मेरी चूत को चाटने लगा, मैं बैचेन होने लगी, मैं उसके बाल को पकड़ के उसका मुँह भोसड़े में सटाये जा रही थी, मैंने कहा बस सुखराज अब चोद दो मुझे।

पूरी कर लो अपनी हसरत, मैं तुम्हारी हूँ आज रात के लिए, जो मर्ज़ी कर लो मेरे साथ मैं तुम्हारी हूँ, डिअर, आई लव यू माय ब्रदर, उसने मुझे गोद में उठा लियाऔर पलंग पे लिटा दिया, मेरे भोसड़े में खुजली हो रही थी, लग रहा था, जल्दी से लोड़ा, भोसड़े में ले लू, तभी सुखराज मेरे पैर के पास बैठ गया मेरे दोनों पैर को फैला दिया और अपना लौड़ा, भोसड़े के ऊपर से गांड के छेद तक रगड़ा।

ऐसा उसने चार पांच बार किया मैं तो उसकी लंड की रगड़न से काफी परेशान हो रही थी, मुझे अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था और अज्जु मजा लेने में लगा हूँआ था। अचानक उसने पूरा का पूरा लंड मेरी चूत में उतार दिया।आआआआआःह्ह्ह्ह्ह्ह्हह्ह्ह।

बाहर निकाल इसको, आआअह्हह्हह्ह….मैं दर्द से कराह रही थी, उसका लंड मेरी चूत में सेट हो चुका था, मेरी आँख में आंसू आ गए थे क्यों
की ये मेरी पहली चुदाई थी।

उसने लण्ड को धीरे धीरे निकाला और फिर से एक झटका दिया, मैं तो पहले समझ रही थी उसका लंड पूरा चला गया पर मैं गलत थी उसका लंड आधा ही अंदर गया था, अब दो इंच और गया तीसरे झटके में पूरा लंड मेरी चूत से होते हूँए पेट तक जा रहा था।

दर्द का एहसास हो रहा था पर ये एहसास अच्छा था, फिर वो मुझे जोर जोर से चोदने लगा, मैंने भी गांड उठा उठा के चुदवा रही थी, कमरे में सिर्फ ऊऊऊऊआआःह्ह्ह्ह्ह्ह्..ठोक भेनचोद अपनी बहन को ले रंडी आज तेरी चूत का भोसड़ा बनाके छोडूंगा.. तेज कर बहन के लोडे, जैसी आवाजे आ रही थी।

और कुछ अंतिम झटके मेरी चमचम चूत में उसका पानी निकलने के साथ लगे। फिर कई तरह से मुझे पूरी रात उछाल उछाल कर चोदा। मैंने पूछा तुम्हें इतने सारे पोज कैसे आते हैं, तो वो बोला हमलोग एडल्ट मूवी देखते है इसलिए मुझे पता है चुदाई का पोजीशन क्या होना चाहिए।

रात भर चोदने के बाद मेरा भोसड़ा सूज गया था दर्द के मारे चला नहीं जा रहा था सुबह के करीब चार बजे सुखराज वापस अपने बंगले में सोने चला गया और मैं भी सो गयी,

उस रात का चुदाई का एहसास गजब का था।

इस साल मेरी शादी होने वाली है। देखते है उतना मज़ा मिलता है की नहीं जितना अज्जु ने दिया था, वो अपनी प्रोमिस को नहीं निभा पाया।
और उसने मुझे कई बार चोदा जब भी उसका मन किया, मुझे भी लग रहा था ये गलत प्रोमिस मैंने करवाया था उसके साथ क्यों की मुझे भी अपने भाई से चुदना अच्छा लगता था.