चचेरे भाई की जवान बेटी की चुदाई

गतांग से आगे …..

इस तरह रोज मैं उसे अपने चाचा से चुदाई के लिये उकसाने लगा और हमारी बातचीत होती रही. अब वो भी मेरी बातें सुन सुन कर अपने चाचा से चुदने के बारे में सोचने लगी. यह कहानी आप मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है।

अगले महीने जब मैं घर गया तो मैंने गले लगाने के बहाने उसे जोर से बांहों में भर लिया. जिससे उसकी चूचियां मेरे सीने से दब गईं. एक अलग ही एहसास था. उसने भी कुछ नहीं कहा. हम कुछ देर इधर उधर की बातें करते रहे. फिर शाम के वक्त वो मेरे घर पर बैठने के लिए आई. मैं अपने कमरे में मूवी देख रहा था, तो वो भी वहीं आकर बैठ गयी.

मैंने टीवी की आवाज कम करके उसके हाल चाल जानने लगा. मैंने उसे बातों ही बातों में पूछा- अब तो तुम बड़ी हो गयी हो, कोई बॉयफ्रेंड बनाया या नहीं.
साली फिर झूठ बोल गई.

मैंने कहा- तो फिर बना लो, नहीं तो शादी के बाद पति को कैसे खुश रख पाओगी?
वो- उसके लिए बायफ्रेंड की क्या जरूरत है. जो चीजें जाननी हैं, वो आप सिखा देना.
वो भी मुझ पर लाइन मार रही थी. मैं- ठीक है, समय आने पर तुझे सब सिखा दूँगा.
अगले दिन मुझे मार्केट जाना था और उसे भी कॉलेज जाना था. गांव में गाड़ियां तो कम ही मिलती हैं. मेन बस स्टैंड भी गांव से दूर ही था. हम दोनों पैदल ही बस स्टैंड तक साथ चलने लगे.

रास्ते में मैंने फिर बॉयफ्रेंड की बात छेड़ दी. अब वो खुलने लगी.
बोली- पहले एक था, पर अब नहीं है.
मैं- कभी मिले भी या नहीं?
वो- हां, एक दो बार मिले थे.
मैं- कुछ किया भी या नहीं?
वो- क्या करना था … घूमे फिरे औऱ वापस आ गए.
मैं- अरे किस किए या नहीं.. एक दूसरे को प्यार दिया या नहीं?
वो- अरे मैं ऐसी लड़की नहीं हूं. उसने किस मांगा तो था, पर मैंने मना कर दिया.
मैं- इसका मतलब तुझे कुछ नहीं आता. तुझे सब सिखाना पड़ेगा.
वो- हां सिखा देना.

इस तरह हम स्टैंड पहुंच गए. वो वहां से कॉलेज निकल गई औऱ मैं मार्केट. कुछ घंटे में मेरा काम निपट गया.. तो मैंने उसे फोन किया- कहां हो?
उसने बताया- कॉलेज में.. आज क्लास थी ही नहीं, इसलिए मैं भी मार्केट आ गयी हूं.
मैं- चल ठीक है मेरे पास आ जा.. मिल कर घूमेंगे फिरेंगे, ऐश करेंगे.

वो मेरे पास आ गयी. मैंने उससे कहा कि घर फोन करके बता दे कि आज दो क्लास हैं और थोड़ी देर सहेली के साथ घूम कर शाम तक ही तू वापस आ पाएगी. फिर खूब मजे करेंगे आज मैं तुझे पार्टी दूँगा. वो खुश हो गयी और घर लेट आने को बता दिया.

हम थोड़ी देर इधर उधर घूमे और उसे थोड़ा बहुत खिलाया पिलाया. थोड़ी देर में ही वो थक गई औऱ बोली- मैं थक गई हूं, चलो अब घर चलते हैं. यह कहानी आप मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है। मैं बोला- इतनी धूप में कौन घर जाएगा. अभी दोपहर में तो गाड़ी भी नहीं मिलेगी शाम को वापसी में ही गाड़ी मिलेगी. थोड़ा देर आराम कर लेते हैं. फिर घूम लेंगे.

वो- पर आराम कहां करें इतनी धूप में?
मैं- तू चिंता क्यों करती है … मैं हूँ न. चल मेरे साथ.

मैं उसे पास के ही एक होटल में ले गया औऱ एक कमरा बुक करके हम दोनों रूम में आ गए.
वो बोली- यहाँ क्यों ले आए.
मैं- इतनी धूप में और कहां जाते. अभी हमने खाना भी खाया है थोड़ा देर सुस्ता लेते हैं. फिर यहां हमारी बातें सुनने वाला भी कोई नहीं है तो मैं तुझे शादी के बाद क्या क्या करना होता है, वो सब भी सिखा देता हूँ. फिर ऐसा मौका पता नहीं कब मिलेगा. कुछ देर वो चुप रही फिर पलंग पर बैठ गयी.
मैं उसके पास जाकर बैठ गया और उसका हाथ अपनी हाथों में लेकर सहलाते हुए बोला- बोल सीखना चाहती है कि नहीं.

उसे भी लग ही गया था कि ये अच्छा मौका है चाचा से चुदने का तो उसने सर हिला कर हां कर दिया.

मैंने उससे कहा- देख सिखा तो मैं सब दूँगा, पर तुझे मेरा पूरा पूरा साथ देना होगा. दूसरा मुझ से झूठ मत बोलना. थोड़ी देर के लिए सोच ले कि मैं ही तेरा पति हूं. और बिल्कुल भी मत शरमाना. यहां तेरे और मेरे बीच में जो भी होगा वो न तो कभी किसी को बताएगी न मैं.
उसने फिर सिर हिलाया.

थोड़ी देर इधर उधर की बातें करने के बाद मैंने उससे कहा- मान ले मैं ही तेरा पति हूं औऱ आज हमारी सुहागरात है. तू पलंग पर बैठी होगी औऱ तेरा पति तेरा पास आएगा और तेरा घूंघट उठाएगा, तेरा गाल चूमेगा. धीरे धीरे तुझे बांहों में लेकर तेरे होंठ चूमेगा. तू समझ रही है कि नहीं.
वो शरमा कर बोली- हां सब समझ रही हूं.
मैं- तू बिल्कुल भी नहीं समझ पा रही है.. रूक मैं तुझे करके बताता हूं.
वो- नहीं नहीं ऐसे ही बताओ न.

पता तो उसे भी था कि मैं उसे रूम में चोदने ही लाया हूँ. फिर भी उसने थोड़ा नखरा करना ही था.

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