चचेरे भाई की जवान बेटी की चुदाई

गतांग से आगे …..

मैं- तेरी जैसी चूत मिलेगी तो कौन नहीं रगड़ेगा.. अभी तो मेरा हुआ ही नहीं है. पर चल पहले मैं तेरी जलन ठीक करता हूँ.

मैंने लंड उसकी चूत से निकाला और उसकी चूत चाटनी शुरू कर दी. थोड़ी ही देर में वो फिर गरम होने लगी तो मैंने अपना लंड उसके आगे कर दिया.
मैं- चल जरा तू भी चूस दे इसे.
वो लंड देखकर चौक सी गयी.
मैं- क्या हुआ लंड नहीं देखा है क्या पहले कभी?
वो- देखा तो है पर आपका लंड कुछ जाना पहचाना सा लग रहा है.
मैं- अच्छा जी, मेरे लंड की फोटो बहुत सी लड़कियों के पास है, उसमें से एक तुम भी हो.

फिर मैंने उसे अपने फेसबुक अकाउंट के बारे में बता दिया. अब वो सारी कहानी समझ गयी कि आखिर लंड जाना पहचाना क्यों लगा.
वो बोली- मुझे चोदने के लिए तुमने बहुत बड़ा गेम खेला चाचू. अपनी ही भतीजी को फेक आईडी बना कर अपने लंड की पिक भेज दी.
मैं- तुम भी तो सबसे चुदती फिर रही थी.. और घर में इतनी अच्छी चूत बंट रही हो, तो उसे पाने के लिए कुछ तो करना ही पड़ेगा ना.
वो मुस्कुराई.

मैं- चल अब शिकवे गिले छोड़ और उस लंड को चूस भी ले, जिसे तूने फोटो में देख देख कर बहुत बार अपनी चूत में उंगली की है.

वो भी मजे से मेरा लंड चूसने लगी. थोड़ी देर चुसवाने के बाद मैंने उसे फिर से लिटाया और उसके ऊपर चढ़ गया. वो भी गरम हुई पड़ी थी, मैंने पूछा- अब चुदाई शुरू करूँ.
वो- हां, अब जलन व दर्द कम है. अब पेल दो अपना लंड मेरी चूत के अन्दर मेरे बॉयफ्रेंड.
यह कह कर वो मुस्कुराने लगी.
मैं- ओह्ह चाचू से सीधे बॉयफ्रेंड. चल ठीक है ले अब सम्हाल अपने बॉयफ्रेंड का लंड.

यह कह कर वो मुस्कुराने लगी.
मैं- ओह्ह चाचू से सीधे बॉयफ्रेंड. चल ठीक है ले अब सम्हाल अपने बॉयफ्रेंड का लंड.

मैंने अब उसे पेलना शुरू किया, वो भी हर धक्के का भरपूर मजा ले रही थी. कुछ देर की जबरदस्त चुदाई के बाद वो फिर झड़ गयी. मेरा भी होने वाला था मैंने भी स्पीड बढ़ा दी. कमरा फच्च फच्च की आवाज से गूंज रहा था. उसने भी मुझे कस कर पकड़ लिया. मैंने भी अपना सारा जोश चार पांच पिचकारियों के साथ उसकी चूत में भर दिया. यह कहानी आप मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है।

उसकी चूत में अपना माल गिरा कर मुझे जो सुकून मिला, वो मैं बयान नहीं कर सकता. थोड़ी देर उसके ऊपर पड़े रहने के बाद मैंने लंड उसकी चूत के बाहर निकाल लिया. लंड बाहर निकालते ही उसका और मेरा रस उसकी चूत से बाहर आने लगा.

वो- चाचू के आपने क्या किया … अपना सारा माल अपनी भतीजी की चूत के अन्दर ही गिरा दिया. अगर कुछ हो गया तो. ऐसा तो उस लड़के ने भी नहीं किया था, उसने बाहर निकाल लिया था.
मैं- वो लड़का तो अंजान था, तेरा चाचू चुदाई का जानकार है. मैं सब सम्हाल लूंगा. तू बस ये बता जब मेरा माल तेरी चूत में गिर रहा था, तुझे ऐसा लगा कि नहीं कि गर्म गर्म कुछ चूत में जा रहा है औऱ जलती चूत को बहुत सुकून दे रहा है? तुझे मजा आया कि नहीं मेरे से चुदवाकर या चाचू के लंड के नीचे आकर भी प्यासी रह गयी?
वो- हां सही कहा आपने … मेरी चूत को सुकून तो बहुत मिला और आपसे चुदवाकर मजा भी बहुत आया. साली चूत की तीन बार पानी गिरवाकर सारी प्यास बुझा डाली. बड़ा मस्त चोदा है आपने मुझे.

मैं- चल फिर तू आज सब कुछ सीख गई. यही होता है शादी के बाद सुहागरात में.
वो- हां चाचू सिखाने के लिए धन्यवाद.
वो मेरे गले लग गयी और हँसने लगी.

फिर हमने थोड़ी देर नंगे रहकर ही आराम किया और थोड़ी देर बाद साथ में नहाये. वहां भी हमने एक राउण्ड चुदाई का खेला. रूम से जाते जाते भी एक बार मैंने उसकी चूत का एक बार बाजा बजा दिया. फिर हम रूम से बाहर निकल गए.

तीन बार की चुदाई के बाद उसकी हालत बहुत ख़राब थी. उससे ठीक से चला भी नहीं जा रहा था. असल में असली चुदाई तो उसकी आज ही हुई थी. अपने से 11 साल छोटी भतीजी को चोदने में मेरे लंड को तो जो मजा आया था, वो कहना ही क्या. मैंने मार्केट से उसे दर्द की व गर्भनिरोधक दोनों दवा खिलाईं.

उसे उसका मनपसंद लंड खिलाने के बाद उसका मनपसंद खाना भी खिलाया. फिर दो जोड़ी नई ब्रा पेंटी गिफ्ट में दिलवाकर वापस हम घर की तरफ चल दिए. तब से लेकर अब तक जब भी हमें मौका मिला, हम चार बार औऱ चुदाई कर चुके हैं. देखो अब कब मौका मिलता है.