घर की औरतों की चुदास जाग उठी- 2

घर की औरतों की चुदास जाग उठी- 1

रात के सात बज रहे थे, भाभी के साथ मैंने खाना बनाया, भाईसाहब टूर पर थे, भाभी ने बताया- मेरे साहब महीने में 10-12 दिन बाहर रहते हैं।

हम सब लोग 9 बजे तक खाना खाकर फ्री हो गए। इसके बाद 10 बजे तक हम गप्पें मारते रहे।
दस बजे भाभी बोली- चलो अर्चना, अब हम सोते हैं।

मैं और भाभी सोने वाले कमरे में आ गए, विशाल ऊपर चला गया, दोनों बच्चे अपने कमरे में चले गए। मैं और भाभी एक घंटा बातें करते रहे।
इसके बाद भाभी बोलीं- सो जाते हैं।

मैंने भाभी से कहा- भाभी, मेक्सी तो ऊपर है, विशाल तो सो गया होगा।
भाभी हँसते हुए बोली- जब मैं अकेली होती हूँ तो कई बार नंगी ही सो जाती हूँ। ऐसा करते हैं, हम दोनों दरवाज़ा बंद करके नंगी ही सो जाती हैं। बच्चों के उठने से पहले मैं जाग जाती हूँ, तुम्हे भी उठा दूंगी।

उन्होंने मेरी पजामी का नाड़ा खोल दिया नीचे सरकाने लगी, मैंने रोकने की कोशीश की तो भाभी बोली- इतना क्यों शर्मा रही हो, अब तो तुम्हारी चूत का गेट भी खुल गया है।
मैं झेंपती हुई बोली- भाभी, आप भी तो उतरिये न।
‘ओह, यह बात है !’ और भाभी ने एक मिनट में ही अपना पेटीकोट और ब्लाउज उतार दिया।

हलकी काली झांटो वाली भाभी की चूत मेरी आँखों के आगे थी। भाभी की चूचियाँ मुझसे थोड़ी बड़ी बड़ी और मर्दों का लंड खड़ा करने वाली थीं। उन्होंने मेरा भी कुरता उतरवा दिया, मुझे साथ लेते हुए वो पलंग पर गिर गईं, मेरी साफ़ चिकनी चूत देखते हुए बोलीं- वाह, बिल्कुल दुल्हन जैसी चूत है, कोई आदमी देख ले तो चोदे बिना नहीं छोड़ेगा। संतरे भी तने हुए बिल्कुल ताज़े ताज़े लग रहे हैं।

और उन्होंने मेरे दोनों संतरे मसल दिए। भाभी ने मेरी चूत में अपनी उंगलियाँ डाल दीं और मेरी उंगलियाँ अपनी चूत में डलवा लीं अब हम दोनों एक दूसरे की बुर रगड़ रहे थे। हम दोनों खुल गए थे और मस्तिया रहे थे बड़ा मज़ा आ रहा था। हम लोगो की शर्म उतर गई थी। भाभी मुझे कुतिया कह रही थीं मैं भी उन्हें भाभी रांड बोलने लगी थी।

मस्ती में मैं और भाभी नहा रहे थे।, भाभी मेरी चूचियाँ दबाती हुई बोली- तेरी चूत परेशान नहीं करती? एक महीने से बिना चुदे पड़ी है। एक बार लंड घुस जाए तो उसके बाद कितना ही बैंगन-गाज़र चूत में डाल लो, सुख नहीं मिलता। मौका अच्छा है, विशाल से चुदवा ले, कुत्ते का लंड भी अच्छा मोटा है। इनके पीछे महीने में 5-6 बार मैं भी कुत्ते से चुदवा लेती हूँ, बहुत मज़ा देता है।

मैं भाभी की बातें सुनकर चकित थी, मैंने भाभी से कहा- भाभी, विश्वास नहीं होता कि आपने भाईसाहब के अलावा भी किसी का लंड चूत में डलवाया हुआ है।

भाभी बोलीं- प्यासी चूत पता नहीं औरत से क्या क्या करवा ले, मैं तो पुरानी रांड हूँ !
और उन्होंने अपनी कहानी बताना शुरू कर दी उन्होंने बताया एक बार उन्हें 6 महीने अकेले रहना पड़ा था, उनके तब तक एक बच्चा भी हो चुका था लेकिन इस निगोड़ी चूत ने इतना तंग किया कि दस दिन बाद लंड-लंड चिल्लाने लगी। तब तो मैं 24 की थी कितनी आग लगी थी इस चूत में कि जो भी जवान, बूढ़ा दिखता तो बस यही मन करता था कि मेरी चूत में लंड डाल दे। लेकिन साली जब जरुरत हो तो लंड डालने वाला भी नहीं मिलता।

भाभी की बातें सुन सुन कर मेरी बुर पानी छोड़ने लगी थी। भाभी बोलती जा रही थीं उन्होंने मेरी तीन उंगलियाँ चूत में डलवा ली थीं और मुझसे जोर जोर से अपनी बुर मसलवा रही थीं।

भाभी का बोलना जारी था, उन्होंने मुझे बताया कि पहले वो कलकत्ता में रहती थी जब उनके पति 6 महीने को बाहर गए तो उनकी चूत चुदने को कुलबुलाती रहती थी। उन्होंने अपनी दो तीन सहेलियों को जब यह बताया तो वो हँस कर मजाक में उड़ा देती थीं। उसके बाद पड़ोस में एक भाभी किराए पर रहती थीं। उनको जब मैंने अपनी चूत की खुजली के बारे में बताया उन्होंने मुझे एक आंटी से मिलवाया। आंटी ने मेरी चूत का जुगाड़ करवाया, उन्होंने मेरी एक महंगे होटल में सेटिंग करा दी।

मैं होटल मैं दोपहर में जब मन आता, चुदने जाने लगी, महीने मैं 4-5 बार चुदवा लेती थी। नए नए लंड से चुदने में बड़ा मज़ा आता था, चूत भी ठंडी हो जाती थी और ऊपर से कुछ कमाई भी हो जाती थी। इन 6 महीनों में मैंने 18 साल से लेकर 60 साल तक के 22 मर्दों के लंड खाए। हर लंड का अपना एक अलग मज़ा होता है।

उसके बाद तेरे भाईसाहब आ गए हम लोग कानपुर आ गए। जिंदगी आराम से चलने लगी। मेरी शर्म छूट गई थी, 10-12 आदमियों से आज भी मेरे सम्बन्ध हैं। तुम्हारे देवर विशाल भी इस सूचि में है, बहुत अच्छा चोदू है, कुत्ता 3-4 बार मेरी गांड भी फाड़ चुका है लेकिन मस्त मज़ा देता है, तू भी चुदवा ले, इससे अच्छा मौका नहीं मिलेगा।

मेरी साँसें भाभी की बातें सुनकर तेज़ हो गई थी, मैं बोली- भाभी, मन तो चुदवाने का कर रहा है लेकिन डर लगता है !

भाभी हँसते हुए बोली- मस्त होकर चुदवा ! यहाँ कोन देखने वाला है? कल विशाल के साथ अकेले ऊपर सोना और रात भर चुदना ! परसों बच्चे चले जाएँगे, तू अगर राज़ी होती है तो हम दोनों साथ साथ चुदेंगी।

मैं पहले से ही विशाल से चुदने की सोच रही थी। अब मैंने सोच लिया कि कल विशाल का लंड डलवा ही लूंगी। तभी भाभी ने घूमकर मेरी चूत की पलकों पर अपना मुँह रख दिया। आह ! जबरदस्त मज़ा था, मुझसे भी नहीं रहा गया मैं भी भाभी की चूत चूसने लगी। दस मिनट बाद हम दोनों का चूतरस एक दूसरे के मुँह में था। रात के दो बज़ गए थे, भाभी और मैं नंगी ही सो गईं।

सुबह 9 बजे मेरी नंगी चूत में भाभी ने अपनी उंगली घुसा दी, मैं हड़बड़ा कर उठी, भाभी ने मेरी चूचियाँ दबाते हुए चुटकी ली और बोलीं- अब उठ जाओ, देवर जी ऑफिस जाने वाले हैं, दो बार पूछ गए कि भाभी उठीं या नहीं ! जाओ और थोड़ा अपनी जवानी का रस पिला आओ।

मैंने उठकर कुरता-पजामा पहन लिया और ऊपर विशाल के कमरे में आ गई। मैं जब ऊपर गई विशाल मुस्करा कर देखते हुए बोला- आप तो बहुत देर तक सोईं? मैं आपके लिए चाय बना कर लाता हूँ।

मैंने कहा- नींद ही नहीं खुली।

मैंने आगे बढ़कर विशाल को बाँहों में भर लिया, कस कर चिपकते हुए बोली- आज ऊपर ही सोऊँगी। पूरी रात तुम्हारी याद आती रही !

हम दोनों आपस में एक दूसरे की बाँहों में 5 मिनट सिमटे रहे। इसके बाद विशाल चाय बनाने चला गया और मैंने कुरता पजामा उतार कर स्कर्ट ब्लाउज बिना ब्रा पेंटी के पहन लिया। विशाल जब चाय लेकर आया तो मेरा शवाब उसे ललचा रहा था।

चाय पीने के बाद विशाल से बोली- थोड़ा मेरी गोद में लेट लो !

विशाल मेरी गोद मैं लेट गया। मैंने उसकी टीशर्ट उतरवा दी नीचे वो कुछ नहीं पहने था। मैं उसकी निप्पल हल्के से नोचते हुए उसके जवान सीने पर हाथ फेरने लगी, उसके बाद होंटों में उंगली चुसवाते हुए बोली- रात को मेरी याद आई थी?

विशाल बोला- भाभी, रात भर सो नहीं पाया, आपके दूध चूसने का मन करता रहा।

मैंने अपने ब्लाउज के दोनों बटन खोल दिए और विशाल का मुँह अपने दूधों की टोंटी में लगा दिया और बोली- लो, जी भरकर चूस लो।

विशाल ने मेरा एक स्तन अपने मुँह में भर लिया और दूसरा हाथों से दबाने लगा, वो कभी एक चूची को चूसता कभी दूसरी को। मैं उसे कस कर अपने स्तनों से चिपकाए हुए थी।

विशाल मेरे स्तनों से खेलते हुए बोला- भाभी, आज ऑफिस जाने का मन नहीं कर रहा है। लेकिन बहुत जरूरी काम है, साला जाना पड़ेगा।

मैंने नेकर के ऊपर से विशाल का लौड़ा सहलाया और बोली- चलो, अब उठ जाओ, शाम को मस्ती करेंगे।
विशाल और मैं उठ गए।

मैं उठी और दरवाज़े के पास पड़ा अख़बार उठाने लगी। मेरी स्कर्ट ऊपर उठ गई, विशाल दूर से मेरे नंगे चूतड़, गांड और मस्त हिलती चूचियाँ देखकर पगला गया और दौड़ते हुए आकर घोड़ी बनी मुझे पीछे से लपक लिया और मेरी चूचियाँ दबाने लगा- भाभी, बहुत मन कर रहा है !
मैं बोली- थोड़ा हटो न।

विशाल को हटाकर मैंने उसे बाँहों में भरा और बेशर्म बनते हुए पूछा- चोदने का मन कर रहा है क्या?
विशाल बोला- हाँ भाभी, आपकी नंगी गांड देखकर आपको चोदने का मन कर रहा है।
मैं अपना पानी छोड़ रही थी, मैं बोली विशाल- तुम्हारा घोड़ा बहुत टनटना रहा है, पहले उससे दोस्ती करती हूँ !

और मैंने विशाल की नेकर नीचे सरका दी, विशाल का 8 इंची लम्बा और 4 इंची मोटा लौड़ा फनफनाता हुआ बाहर आ गया। एक महीने बाद इतना सुंदर लोड़ा देखकर मैं पागल हो गई, मैंने बिना देर किए उसे मुँह में ले लिया और चूसने लगी। विशाल मेरी स्कर्ट उठा कर मेरी चूत में उंगलियाँ आगे पीछे करने लगा।

आह ! मुझे लोड़ा चूसने का गजब सुख मिल रहा था। बहुत देर से विशाल का लौड़ा टनक रहा था, 2-3 मिनट के बाद लंड बाहर खींच कर विशाल ने मेरे मुँह और स्तनों पर वीर्य की बारिश कर दी। इसके बाद हमने एक दूसरे को बाँहों में भरकर 10-12 प्यार भरी पप्पियाँ गालों पर लीं और मैं उससे बोली- अब तुम ऑफिस जाओ, शाम को अपने लंड को सही जगह घुसाना। मैं और मेरी रानी तुम्हारा इंतज़ार करेंगी।

विशालऑफिस चला गया और मैं बाथरूम मैं घुस गई।

हमने एक दूसरे को बाँहों में भरकर 10-12 प्यार भरी पप्पियाँ गालों पर लीं और मैं उससे बोली- अब तुम ऑफिस जाओ, शाम को अपने लंड को सही जगह घुसाना। मैं और मेरी रानी तुम्हारा इंतज़ार करेंगी।
विशाल ऑफिस चला गया और मैं बाथरूम मैं घुस गई।

पूरे दिन मेरी चूत की आग भड़कती रही। शाम को सजधज कर लाल साड़ी ब्लाउज पहन कर मैं नीचे भाभी के पास आ गई, हम लोग बातें करने लगे। शाम को 7 बजे विशाल आया। हमें 9 बजे मुझे मूवी देखने जाना था। मैंने भाभी को बताया तो भाभी हँसते हुए बोलीं- विशाल तुम्हें चुदाई हाल में प्यासी दुल्हन दिखाने ले जाएगा।

मैं भी खुल गई थी, बोली- बड़ा मज़ा आएगा, आज प्यास भी बहुत लग रही है। पूरी प्यास बुझा कर आऊँगी।

हम सबने खाना खाया। मैं और विशाल 8 बजे मूवी देखने निकल गए। हाल एक सुनसान इलाके में था। बालकनी में 8-10 जोड़े ही थे। हम जहाँ बैठे थे, वहाँ से सिर्फ एक जोड़ा ही दिख रहा था जो हमारे पास 4 सीट छोड़कर बैठा था।

विशाल बोला- यहाँ बालकनी में सिर्फ जोड़े ही आते हैं, रात में मूवी कम और मस्ती ज्यादा करते हैं। 500 रुपए एक जोड़े का टिकट है।

विशाल की बात सुनकर मूवी शुरू होने से पहले मैं बाथरूम गई और अपनी ब्रा और पेंटी उतार कर पर्स में रख ली। मूवी का नाम ‘प्यासी दुल्हन था’ ही था। मूवी शुरू होने के 5 मिनट बाद ही एक नामर्द की बीबी की चुदाई पड़ोस के लड़के के साथ दिखाई जाने लगी, नंगे सीन देखते ही विशाल और मैं शुरू हो गए।

पहले हमने एक दूसरे के होंठ चूमे, उसके बाद विशाल ने मेरी चूचियाँ ब्लाउज खोलकर दबानी शुरू कर दीं। हमारे पास वाला जोड़ा भी आपस में गुथा हुआ था। हम दोनों एक दूसरे को देखकर मुस्कराए भी थे। इसके बाद मेरे पड़ोस वाली लड़की ने अपने यार का लंड निकाल कर चूसना शुरू कर दिया। मूवी में ब्लू फिल्म जोड़ दी गई थी एक लड़की पर तीन हब्शी चढ़े हुए थे। विशाल ने अपना लौड़ा खोलकर मेरे हाथों में दे दिया, मैं उसे सहलाने लगी। पास वाला जोड़ा 5 मिनट बाद उठकर बाहर चला गया।खुला नंगा चुदाई का खेल परदे पर चल रहा था। विशाल ने मेरे पेटीकोट का नाड़ा खोल रखा था और मेरी चूत सहला रहा था। चूत बुरी तरह पानी पानी हो रही थी, मुझसे रहा नहीं गया, मैंने विशाल की सीट के नीचे बैठकर विशाल का लोड़ा मुँह में डाल कर चूसना शुरू कर दिया।

तभी दूसरा जोड़ा अंदर आ गया तो मैं हट गई।

इंटरवल में पूरा हाल रोशनी से नहा गया। विशाल और पास वाला आदमी बाहर चले गए, लड़की मेरे पास आई और बोली- हट क्यों गईं? चूसती रहतीं, यहाँ तो सब खुला होता है, लगता है पहली बार आई हो, शर्म आ रही है। महिला बाथरूम के पास जो आंटी बैठी है, उन्हें 200 रुपए कमरे के दे दो, ऊपर कमरे बने हैं आराम से चुदवा लेना। मैं भी ऊपर से लगवा कर आ रही हूँ। कितने रुपए लेती है तू एक रात के?

मैं बोली- मैं तो इनकी की पत्नी हूँ।

उस लड़की का नीलम था, नीलम हँसती हुई बोली- शर्माती क्यों है? यहाँ सभी रंडियाँ हैं, बीवियाँ तो घर में चुदती हैं, मैं तो 1000 रु हॉल में आने के लेती हूँ और रात को घर और होटल जाने के 2000 रुपए लेती हूँ।

मैंने उससे झूठ बोल दिया- 1500 रु एक रात के लिए हैं।

नीलम ने एक कार्ड दिया, उस पर उसका नंबर लिखा था, बोली- कभी ग्राहक न मिले तो मुझे फ़ोन कर देना 3000 रु दिलवा दूँगी पूरी रात के।

मैंने विशाल को जब कमरे के बारे में बताया तो विशाल बोला- मुझे बात पता है, रजनी भाभी के कहने पर ही तुम्हें इस हाल में एक नया मज़ा देने के लिए लाया हूँ।

मैं बोली- सच विशाल, बड़ा मज़ा आ रहा है, चलो ऊपर चलते हैं, चुदने का बड़ा मन कर रहा है।

इंटरवेल के 5 मिनट बाद हमारे पास वाला जोड़ा बाहर चला गया। उसके 5 मिनट बाद मैं और विशाल भी बाहर आ गए। हम लोग बाथरूम की तरफ गए तो आंटी मुस्करा रहीं थीं। आंटी मुस्कराते हुए विशाल से बोलीं- आज बहुत सुंदर माल पकड़ कर लाया है।

मैं चुद चुकी थी, मेरी चूत शांत हो चुकी थी, मैंने विशाल को मना किया लेकिन विशाल अब एक मर्द था उसको मेरा और मर्दन करना था। उसने मेरा पेटीकोट खींच कर उतार दिया। अब मैं पूरी नंगी थी, आज मेरी चूत में दूसरा लंड घुस चुका था।

मेरी चूचियाँ मसलते हुए बोला- ज्यादा शरीफ बनने की कोशिश न करो, लंड अब पूरे हफ्ते तुम्हारी चूत में घुसेगा, हर रात नया मज़ा दूँगा। चलो उठो, घोड़ी बनो, पीछे से घुसाने का मज़ा लो। घर पर पता नहीं दुबारा भाभी के पास सो जाओ।

विशाल ने मुझे अपना बल दिखाते हुए घोड़ी बना दिया। तख्त पर मेरे दोनों हाथ रखे थे, मैं घोड़ी बनी हुई थी। नीचे मेरी टांगें चौड़ी करके विशाल लौड़ा लगाने की कोशिश करने लगा लौड़ा घुस नहीं पा रहा था। विशाल बोला- भाभी जान, अपना एक पैर चौड़ा करके तख्त पर रख लो।

उसने मेरा एक पैर चौड़ा करवा के तख्त पर रखवा दिया और मेरा सर तख्त पर झुका दिया। मेरी चूत में उंगली करते हुए बोला- वाह भाभी, क्या मस्त चूत चमक रही है।

उसने मेरी चूत के दाने को मसलते हुए पूछा- भाभी यहाँ सब लोग रंडियां लेकर आते हैं, आप गुस्सा तो नहीं हो इस गंदे हाल में आकर?

मुझे इस समय बहुत आनन्द आ रहा था, बोली- गुस्सा क्यों होऊँगी? यहाँ मुझे कौन जानता है, सब लोग यही समझ रहे हैं कि मैं रंडी हूँ ! यह सोचकर गुदगुदी और हो रही है। अब तुम भी जल्दी से अपनी भाभी रांड को चोद दो और हाल में कोई पूछे तो रंडी ही बताना। अब चोदो, देर न करो !

विशाल ने मेरी एक जांघ पर पीछे से हाथ रखकर टांग को फ़ैलाया और लोड़ा चूत में पेल दिया। एक चीख मेरी निकल गई, अगले ही पल मेरी चूत में लंड दनदनाते हुए घुस गया था। विशाल ने मेरी कमर पर दोनों हाथ टिकाए और दनादन कुत्ते की तरह पेलना शुरू कर दिया था। शुरू के 1 मिनट मैं मैं जोर से चिल्ला रही थी, बड़ा जबरदस्त मज़ा था, थोड़ी देर बाद उसने झुककर मेरी चूचियाँ पकड़ ली और उन्हें दबाते हुए धीरे धीरे आहें भरने लगा।

मैं भी अब आनंदित हो रही थी, धीरे धक्कों के कारण मेरा दर्द कम हो गया था। कुछ देर बाद विशाल ने फिर मुझे कमर से पकड़ कर जोर से ठोंकना शुरू कर दिया था। तभी दरवाज़ा खोल कर आंटी अंदर आ गईं थीं, विशाल से बोलीं- जल्दी इस रंडी को बजा, पिक्चर 10 मिनट में ख़त्म हो जाएगी।

विशाल का चोदना जारी था, मैं चिल्ला रही थी- विशाल छोड़ो न !

लेकिन विशाल मुझे चोदे जा रहा था, गली की कुतिया की तरह मैं चुद रही थी, आंटी बीड़ी पीते हुए मेरी चुदाई का आनन्द ले रहीं थीं, उनके साथ एक बुड्ढा आदमी भी मेरी चुदाई देख रहा था। अब मैं एक सड़क पर चुद रही कुतिया बनी हुई थी। विशाल ने मुझे 5 मिनट तक चोदा इसके बाद विशाल ने अपना लोड़ा बाहर निकल के सारा वीर्य मेरी गांड के मुँह पर छोड़ दिया। इसके बाद हम दोनों अलग हो गए।

आंटी मेरी और देखकर बोलीं- कुतिया, जल्दी से कपड़े पहन और निकल ले ! इधर शो ख़त्म हो चुका है।

मैं और विशाल अपने कपडे पहनने लगे।

कपड़े पहन कर हम लोग बाहर आ गए। विशाल की बाइक पर मैं विशाल से चिपक कर बैठ गई। विशाल मुझसे बोला- भाभी, मैं जब चोदता हूँ तो मुझे सिर्फ चूत और गांड दिखती है। आज चुदाई की मेरी गोल्डन जुबली है, आप 50वीं औरत हो जिसकी मैंने चूत चोदी है।

विशाल बोले जा रहा था, विशाल बोला- अब तक मैं 10 लोंडियों की गांड मार चुका हूँ और 4 की सील तोड़ चुका हूँ। मैंने नीचे वाली भाभी और उनकी बहन की चूत भी मार रखी है। थोड़ी देर बाद हम घर पर विशाल के कमरे में थे। आज मुझे विशाल के साथ सोना था।

मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और पलंग पर लेट गई, विशाल भी नंगा होकर मेरे पास सो गया। हम दोनों ने एक दूसरे को बाहों में भर लिया, विशाल मुझे चूमते हुए बोला- भाभी इन सात दिनों में आपको चूत को एसा मज़ा दूँगा कि आप कभी भूल नहीं पाएँगी। रोज़ नई तरह का मज़ा।

विशाल बोला- सुबह आराम से उठना, भाभी को मैसेज कर दिया है कि सुबह 11 बजे से पहले न जगाए। अब सोते हैं, सुबह आपकी चूत में लंड भी तो डालना है।

विशाल और मैं एक दूसरे की बाँहों में सो गए।

सुबह 5 बजे विशाल ने मुझे अपनी बाँहों में खींच लिया, उसका लंड खड़ा हो रहा था, उसने लंड मेरी चूत में घुसा दिया, हम लोग चिपक कर एक दूसरे से लिपट कर अर्धनिंद्रा में पड़े हुए थे, मेरी चूत में विशाल का लोड़ा घुस कर मोटा हो रहा था, बड़ा अच्छा लग रहा था। आधा घंटा इसी तरह निकल गया। इसके बाद विशाल मेरे ऊपर चढ़ गया और अपने लोड़े के वारों से मुझे मस्त मस्त चोद दिया।

हम लोग दुबारा सो गए। 9 बजे मैं उठ कर बाथरूम में चली गई और नहा धोकर बाहर आई। आज अंदर से बड़ा अच्छा लग रहा था।

समय 11 से ऊपर हो गया था, विशाल अभी भी नंगा पड़ा हुआ था, उसका लोड़ा सुकड़ा सा ठंडा पड़ा था, मैंने उसका लोड़ा पकड़ कर हिलाया और बोली- लोड़े के खिलाडी साहब, अब उठ जाइए।

विशाल हँसते हुए उठा और मुझे बाँहों में भरकर मेरे होंठों पर एक गहरा चुम्बन लिया और बाथरूम चला गया। मेरी चूत इस समय पूरी शांत थी। मैं सजधज कर नीचे भाभी के पास आ गई।

‘आ गई?’ भाभी मुझे देखकर मुस्कराईं और बोली- कल, लग रहा है सुहागरात-2 मन गई?

मैं शरमाते हुए बोली- भाभी, विशाल तो बहुत बड़ा चोदू है, पूरी फाड़कर रख दी।

भाभी हँसते हुए बोली- मज़ा तो फड़वाने में ही है। अब आराम से रोज़ रात मरवा। बच्चे 3-4 दिन के लिए मामा के यहाँ जा रहे हैं। मैं भी तेरे साथ कुत्ते का डलवाऊँगी। साले का लंड ऐसा है कि एक बार डलवा लो तो बार बार डलवाने का मन करता है।

मैंने चाय बना ली और विशाल को चाय पीने के लिए आवाज़ दी। विशाल तैयार होकर नीचे आ गया। भाभी हँसते हुए बोलीं- विशाल, अर्चना बता रही है कि कल रात दर्द और मज़ा दोनों का इसने आनंद उठाया।

विशाल ने भाभी के चूतड़ों को दबाते हुए कहा- जलन हो रही है?

भाभी बोलीं- आज रात अर्चना से पहले मैं मज़ा लूँगी, बच्चों को लेने उनके मामा आ रहे हैं, अब मैं अकेली हूँ।

विशाल ने कहा- सच?
और भाभी को अपनी बाँहों में भरकर मेरे सामने उनके होटों पर चूम लिया।

उसके बाद विशाल, भाभी और मैंने प्रोग्राम बनाया कि हम आज रात 9 बजे भाभी की कार से लखनऊ जायेंगे और रात को भाभी के खाली पड़े फ्लैट में रुकेंगे।

भाभी बोलीं- रास्ते में कार में चुदना बड़ा मज़ा आएगा। दिन में तू पेपर देना, शाम को हम दोनों मज़े करेंगे।

विशाल नाश्ता करके दफ़्तर चला गया, जाते समय मुझे 2-3 नग्न फ़िल्मों की सीडी दे गया और बोला- बोर हो तो देख लेना।

दो लंड खाने के बाद औरत की शर्म चली जाती है और उसके लंड खाने की भूख बढ़ जाती है, मेरे साथ भी कुछ ऐसा हो रहा था। मेरी चूत की आग तो शांत हो गई थी लेकिन लंड से खेलने की इच्छा बढ़ गई थी।

मैं ऊपर कमरे में आ गई और वीडियो लगा दी। अच्छी चुदाई वाली भारतीय फ़िल्म थी, 20-22 साल की 4-5 लड़कियों की चुदाई 50-55 साल के 4-5 अंकलों के साथ दिखाई जा रही थी।

मेरा मन भी अब लंडों से खेलने का कर रहा था, 5 बजे भाभी ने नीचे बुला लिया बच्चे मामा के साथ जा चुके थे।भाभी को जब मैंने बताया कि फ़िल्म देखकर तो मेरा मन और लंडों से खेलने को कर रहा है तो भाभी बोलीं- चिंता न कर ! हम दोनों की यह यात्रा चुदाई यात्रा होगी। दोनों मस्त होकर चुदवाएंगी, तू जितने लंडों से खेलना चाहेगी उतने से खिलवाऊँगी तुझे।

विशाल 8 बजे रात को आया। 9 बजे हम लोग भाभी की कार से लखनऊ के लिए चल दिए। मेरी “चुदाई यात्रा” शुरू हो गई थी।