कमलदास और अनुपा की अनोखी चुदास

दोस्तों मेरी सभी कहानियाँ किसी और के जीवन से ली गई हैं, जिन्हें मैं आपसे बाँटता हूँ। इस बार फिर आपको एक मस्त कहानी सुनाने जा रहा हूँ। जो की मेरे एक जान पहचान वाले की कहानी है जो की बंगाल से बिलांग कराते है।

कमलदास एक 45 साल के व्यक्ति हैं जिनकी पत्नी इस दुनिया में नहीं हैं। उनकी दो बेटी हैं जिनका नाम सुभा और शोभा हैं। बड़ी बेटी सुभा की उम्र 23 साल हैं जो शादीशुदा है। छोटी लड़की अभी 18 साल की है जो पढ़ाई कर रही है। बड़ी बेटी सुभा की शादी को एक साल ही हुआ था। उसके ससुराल में जाने के बाद कमलदास अपने घर में अपनी लड़की के साथ रहते हैं। लड़की छोटी होने के कारण उन्होंने जल्दी वी आर एस ले लिया जिससे लड़की की पढ़ाई तथा परवरिश में कोई कमी न होने पाए।

कमलदास दिन का समय तो किसी तरह निकाल लेते लेकिन रात निकालनी उनके मुश्किल हो जाती। इस उम्र में भी उन्हें सेक्स का कीड़ा काटता था। कभी-कभी अंग्रेज़ी फिल्म देख लिया करते। लेकिन इससे उनकी सेक्स की भूख और भी बढ़ जाती। इसलिए अपना हाथ जगन्नाथ मानकर किसी तरह अपनी बेचैनी को कम करना उनकी मज़बूरी थी। सेक्स का कीड़ा तो बाथरूम में जाते और मूठ मारकर अपना पानी निकाल लेते। इसी तरह उनके दिन कट रहे थे।

एक दिन उनकी बड़ी बेटी सुभा घर पर आई। साथ में सुभा का देवर सुभोजीत तथा उसकी सासु माँ अनुपा भी थी। अनुपा देखने में तेज़-तर्रार और सेक्स बदन की मालकिन थी। उम्र तो उसकी ४० के आसपास थी लेकिन उसका भरा-पूरा बदन और उस पर गोरी रंगत कमाल ढाती थी। वह चलती तो उसकी चूतड़ इस अन्दाज़ में हिलती कि देखने वाला भी हिल जाए। इसके विपरीत सुभोजीत, जो अनुपा का बेटा तथा सुभा का देवर है, वह देखने में सीधा-सादा मासूम बच्चा नज़र आता है। उसकी उम्र १६-१७ के आसपास है।

शोभा अपनी बहन को देखकर खुश हो गई। कमलदास भी उन्हें देखकर खुश हो गए क्योंकि बहुत दिनों बाद वे घर पर आए थे। पूरा दिन सबने बातों में ही निकाल दिया। सुभा, शोभा और सुभोजीत आपस में ख़ूब बातें करते रहे। इधर कमलदास भी अनुपा से गप्पे लड़ाने में कम नहीं थे। कमलदास को अनुपा से बातें करके अपनी पत्नी की याद आ रही थी। उन्हें लगा कि वह जैसे उनकी पत्नी है है, बस चोदने की देर है। लेकिन वह अनुपा के गुस्से से डरते थे। अनुपा के सामने अच्छे-अच्छों की बोलती बन्द हो जाती थी फिर कमलदास क्या चीज़ है।

शाम को सभी ने खाना खाया और अपने-अपने कमरे में चले गए। सुभा और शोभा एक ही कमरे में सोने चले गए तथा सुभोजीत और उसकी माँ अनुपा भी एक कमरे में चले गए। कमलदास भी अपने कमरे में जाकर सोने का प्रयास करने लगे। लेकिन उन्हें नींद कहाँ आने वाली थी। आज फिर अपने को तड़पता हुआ पाया। अनुपा से बातें करके उन्हें अपनी पत्नी की याद आ रही थी कि किस तरह वह अपनी पत्नी को बाँहों में लेकर उसके नरम-नरम होंठों को चूसा करते थे। अपनी पत्नी के साथ बिताए सेक्स के पलों को याद करके वह और भी अधिक तड़पने लगे। उनका लंड खड़ा हो गया। वे फिर मूठ मारने बाथरूम में गए, पर आज उनका मूड इसमें भी नहीं लगा। वे हॉल में आकर सोफे पर बैठ गए। अभी घड़ी में १२:०० बज रहे थे और पूरी रात उनके सामने पड़ी थी।

कमलदास ने टीवी चालू कर लिया और फिल्म देखने लगे। तभी सुभोजीत भी हॉल में आ गया। वह भी बोर हो रहा था। इसलिए टीवी देखने हॉल में आ गया था। वह भी सोफे पर बैठ गया। दोनों टीवी देखने लगे। फिल्म में एक चुम्बन-दृश्य आया। कमलदास ने यह दृश्य देखा तो बेचैन हो गए। उनका लौड़ा उनकी पैन्ट में ही खड़ा होकर अपनी उपस्थिति बताने लगा। इधर सुभोजीत भी यह दृश्य देखकर बेचैन तो हुआ पर उसने जाहिर नहीं होने दिया।

कमलदास ने सुभोजीत से पूछा- बेटा, पढ़ाई कैसी चल रही है?

सुभोजीत- अच्छी चल रही है।

कमलदास- अच्छा तुम्हारी मम्मी क्या कर रही है?

सुभोजीत- मम्मी थक गई थी। इसलिए जल्दी नींद आ गई।

कमलदास- अच्छा। और तुम्हारी कितनी गर्लफ्रेण्ड हैं?

सुभोजीत थोड़ा चौंका। लेकिन फिर सँभल कर बोला- एक भी नहीं है।

कमलदास- क्या बात कर रहे हो बेटा ! इतने बड़े हो गए और एक भी गर्लफ्रेण्ड नहीं ! भई मैं जब तुम्हारी उम्र का था तो मेरी चार-चार गर्लफ्रेण्ड हुआ करती थीं।

सुभोजीत- अच्छा? मैं अभी-अभी कॉलेज में गया हूँ। इसलिए कोई गर्लफ्रेण्ड नहीं है मेरी।

कमलदास – वह तो ठीक है। मैं तुम्हें बताऊँगा कि गर्लफ्रेण्ड कैसे पटाते हैं। लड़कियों को प्रभावित करने के लिए अच्छे साफ-सुथरे और स्टाईलिश कपड़े पहनो और अपनी एक अलग पहचान बनाओ। लड़कियाँ ख़ुद तुम्हारे साथ दोस्ती करेगी और तुम जो चाहोगी वह भी करेगी।

सुभोजीत- आप तो बहुत अनुभवी लगते हैं। पर गर्लफ्रेण्ड हमारे लिए क्या कर सकती है?

कमलदास- बेटा तुम बहुत भोले हो। लड़कियाँ यदि ख़ुद आकर पटेंगी तो तुम जो कहोगे वह करेगी। मेरा मतलब सेक्स से है। तुम्हें भी सेक्स का अनुभव होना चाहिए। वरना शादी के बाद तुम्हारी पत्नी तुम्हें ताना देगी कि तुम्हें कुछ भी नहीं आता।

सुभोजीत- वह तो ठीक है। लेकिन शादी के पहले यह सब करना ठीक होता है क्या?

कमलदास- बेटा, अनुभव बुहत बड़ी चीज़ होती है। शादी के पहले यह करना ठीक तो नहीं है लेकिन यदि लड़कियाँ ख़ुद अपनी मर्ज़ी से दें तो इसमें बुरा क्या है? तुम्हें कुछ करना आता भी है या नहीं?

सुभोजीत शरमाकर बोला- नहीं। थोड़ा बहुत जानता हूँ लेकिन पूरी तरह मालूम नहीं है कि क्या करते हैं।

सुभोजीत अब थोड़ा सा खुल गया था।

कमलदास- तो मैं तुम्हें बताता हूँ कि सेक्स में क्या करते हैं। सेक्स में किसका महत्त्व है। लड़की के गालों पर, माथे पर, गर्दन पर, और होंठों पर किस करने का मज़ा ही कुछ और है। फिर उनका नाज़ुक चिकना बदन तो पागल कर देता है। उनकी चूचियाँ दबाओ, उन्हें चूसो। उनके पूरे कपड़े खोलकर नंगा कर देना अपने-आप में बहुत मज़ेदार होता है। उनकी चूत में अपना लंड डालो तो समझो कि स्वर्ग जीत लिया।

सुभोजीत हकलाते हुए- हाँ यह सब तो बहुत मज़ेदार होगा।

कमलदास- अरे। इससे ज़्याद मज़ा तब आता है जब वो तुम्हारा लंड मुँह में लेकर चूसती है। इस आनन्द की तो बात ही निराली है।

सुभोजीत- क्या? वह हमारी इस गंदी चीज़ को भी मुँह में लेती है।

कमलदास- गंदी चीज़? अरे इससे प्यारी चीज़ तो कोई होती ही नहीं है। तुम कैसे मर्द हो? औरतें तो इसे लॉलीपॉप की तरह चूसती हैं।

सुभोजीत- आप मुझसे बहुत गंदी-गंदी बातें कर रहे हैं। मैं आपकी बातों का भरोसा नहीं कर सकता।

कमलदास- यदि तुम्हें यकीन नहीं आता तो तुम ख़ुद चूसकर देख लो।

कमलदास ने अपना पत्ता फेंका था। वह सोच रहे ते कि अनुपा न सही, उसका बेटा तो कम से कम मेरा लंड चूस सकता है।

सुभोजीत- मैं तो जा रहा हूँ, अपने कमरे में। आपसे मुझे कोई बात नहीं करनी।

कमलदास सुभोजीत के गुस्से से डर गए। यदि कहीं उसने अनी माँ अनुपा को बता दिया तो गज़ब हो जाएगा।

कमलदास- बेटा मैं सच कह रहा हूँ। यदि तुम अभी नहीं सीखोगे तो कब सीखोगे।. तुम ख़ुद अनुभव लेकर देखो। यदि मैं झूठा निकला तो कभी भी बात मत करना।

सुभोजीत पेशोपेश में था। आख़िरकार उसने कमलदास का लंड मुँह में लेने का निश्चय कर लिया।

कमलदास ने टीवी बंद कर दिया और सुभोजीत को अपने कमरे में ले गए। कमलदास ने अपनी पूरी पैंट खोल दी। उनका ६ इंच लम्बा और मोटा लंड अपनी पूरी औक़ात में तना हुआ था। कमलदास बिस्तर पर लेट गए और सुभोजीत को लंड मुँह में लेने को कहा। सुभोजीत ने धीरे से लंड को पकड़ा। उसके हाथों में लंड की गर्मी आने लगी। उसे लंड पकड़ना अच्छा लगा। थोड़ी देर लंड को सहलाने के बाद सुभोजीत ने लंड के सुपाड़े को अपने मुँह में ले लिया। उसके मुँह में लंड की गर्मी भरने लगी। सुपाड़ा चूसते-चूसते उसने लंड को मुँह में भर लिया और मजे ले-लेकर चूसने लगा। कमलदास तो आँखें बन्द करके ज़न्नत की सैर कर रहे थे।

अचानक कमलदास का लंड कड़क हो गया। वह समझ गए कि पानी निकलने ही वाला है, लेकिन लंड मुँह से निकालने के पहले ही सारा माल सुभोजीत के मुँह में चला गया। माल मुँह में जाते ही सुभोजीत का दिमाग ख़राब हो गया। उसने वहीं पर उल्टी कर दी। कमलदास भी उसकी हालत देखकर डर गए।

किसी तरह सुभोजीत सँभला और कमलदास पर बिगड़ गया और यह कहकर चला गया कि आप बहुत गंदे इंसान हो। इसके जाने के बाद कमलदास ने राहत की साँस ली। वे यही सोच रहे थे कि यह लड़का समझदार निकले और इस बारे में किसी से कहे नहीं। वर्ना उनकी इज्ज़त ख़राब होगी और अच्छा-ख़ासा हंगामा हो जाएगा।

कमलदास ने सारे कपड़े खोल दिए और दूसरी अण्डरवियर पहनकर पलंग पर लेट गए। तभी दरवाज़े पर उनकी समधन अनुपा ने आवाज़ लगाई। कमलदास उनकी आवाज़ सुनकर डर गए। घबराते हुए दरवाज़ा खोला। वह यह भी भूल गए कि वे सिर्फ अण्डरवियर में ही हैं। अनुपा दरवाज़ा धकेलते हुए अन्दर आई और बोली- क्या पिला दिया है तुमने मेरे छोरे को? वह उल्टी पर उल्टी किए जा रहा है। अपनी उम्र देखो और मासूम बच्चे को देखो। ज़रा सा भी ख़्याल नहीं आया आपको यह गंदी हरक़त करते हुए।

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