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Mastram Ki Hindi Sex Stories | Mastaram Ki Antarvasna Stories | मस्ताराम की हिंदी सेक्स कहानियां

माँ को ब्रेस्ट मसाज देकर बहन की चुदाई हुई

प्रेषक : निर्मल

हैल्लो दोस्तों, कभी कबार हमारे पढ़े लिखे या कुछ नॉलेज की वजह से हमें बड़ा फायदा और किसी काम में जरा आँ हो जाती है मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ आप सोच रहे होंगे की आखिर इस कहानी में हुआ क्या होगा तो आप सभी अपना लंड और निगोड़ी चूत को तैयार कर ले मेरी कहानी पढ़ उसे गीली करने के लिए. वैसे हर कहानी की तरह मैं भी अपनी कहानी की शुरुवात अपने नाम से करता हूँ. मेरा नाम निर्मल है और में नागपुर का रहने वाला हूँ। मैं डिप्लोमा कर रहा हूँ। हमारे घर में मेरी माँ, मेरी छोटी बहन और मेरे पापा है, मेरे पापा एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में नौकरी करते है। मेरी माँ घर में रहती है और मेरी छोटी बहन 10वीं में पढ़ती है, उसका नाम श्रेया है, वो सुबह 9 बजे स्कूल जाती है और दोपहर में 2 बजे घर आती है और फिर दोपहर में 4 बजे कोचिंग जाती है और शाम को 7 बजे वापस आती है। मेरे पापा रात को 10 बजे आते है, उनकी ड्यूटी कभी-कभी रात की भी हो जाती है। तो दोस्तो अब में आपको उस घटना के बारे में बताता हूँ जो मेरे साथ 3 महीने पहले हुई। एक दिन में कॉलेज से घर आया, तो माँ की तबीयत खराब थी, माँ बेड पर लेटी हुई थी और पापा उसके पास में बैठे थे, पापा की उस दिन नाईट ड्यूटी थी। फिर में रूम में गया और मैंने पूछा कि क्या हुआ? तो पापा ने कहा कि तुम्हारी माँ की तबीयत ठीक नहीं है। तो मैंने कहा कि क्या हुआ? तो माँ झट से बोली कि कुछ नहीं बस ऐसे ही। तो मैंने कहा कि क्या प्रोब्लम है? में दवा लेकर आता हूँ। तो माँ ने कहा कि मैंने दवा खा ली है, तो में बाहर चला आया।

फिर शाम को 7 बजे श्रेया घर आई तो उसने खाना बनाया और फिर हम सबने खाना खाया। अब 9 बजे पापा ड्यूटी चले गये थे, पापा ने श्रेया से कहा कि तुम माँ के पास सो जाना, वो अपने रूम में पढ़ाई कर रही थी, हम एक ही रूम में सोते है। फिर मैंने श्रेया से पूछा कि माँ को क्या हुआ है? तो वो हँसने लगी। फिर मैंने कहा कि इसमें हँसने की क्या बात है? तो उसने कहा कि कुछ नहीं, तुम सो जाओ। तो में गुस्से में बोला कि मुझे कोई बता क्यों नहीं रहा है कि क्या बात है? तो उसने कहा कि अच्छा ठीक है में बताती हूँ मगर तुम किसी को बताना नहीं कि मैंने बताया है। तो मैंने कहा कि ऐसी क्या बात है? चलो नहीं बताऊंगा। तो उसने कहा कि माँ की ब्रेस्ट में दर्द हो रहा है, उसमें गाँठ बन गयी है। फिर ये बात सुनकर मेरा चेहरा शर्म से लाल हो गया और श्रेया का चेहरा भी लाल हो गया था।

फिर मेरे दिमाग में एकदम से विचार आया, मैंने एक किताब में पढ़ा था की अगर औरत की ब्रेस्ट को अच्छी तरह से मसला ना जाए तो उसमें गाँठ बन जाती है। अब मुझको तभी पूरी प्रोब्लम समझ में आ गयी थी, मेरे पापा का दाया हाथ एक दुर्घटना में टूट गया था, वो जुड़ तो गया था, लेकिन उसमें इतनी ताकत नहीं रही थी। अब में समझ गया था कि पापा माँ की ब्रेस्ट की मसाज नहीं कर पाते होंगे इसलिए ये प्रोब्लम हुई है। फिर तभी इतने में श्रेया ने कहा कि निर्मल क्या हुआ? तो मैंने कहा कि समझ गया। तो श्रेया ने कहा कि क्या समझ गये? तो मैंने कहा कि प्रोब्लम का हल।

फिर उसने कहा कि क्या? तो मैंने कहा कि कुछ नहीं, तुम जाकर सो जाओ, तो वो माँ के रूम में चली गयी और में भी सो गया। फिर रात को करीब 2 बजे श्रेया ने मुझे जगाया, तो में उठा। फिर मैंने श्रेया से पूछा कि क्या हुआ? तो उसने कहा कि माँ को बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है और मैंने माँ से कहा कि निर्मल कह रहा था कि वो इसका इलाज जानता है, तो माँ ने तुमको बुलाया है। फिर मैंने कहा कि बेवकूफ तुमको ऐसा करने को किसने कहा था? अब में सोचने लगा था कि माँ को क्या बोलूँगा? तो तभी इतने में श्रेया बोली कि निर्मल जल्दी चलो, माँ को बड़ी तकलीफ़ हो रही है। फिर में और श्रेया जल्दी से माँ के रूम में पहुँचे। अब माँ कराह रही थी। फिर मेरे रूम में अंदर जाते ही माँ ने कहा कि निर्मल तू कह रहा था कि तेरे पास इसका इलाज है, क्या इलाज है? मेरी तो दर्द के मारे जान निकल गयी है। अब में क्या बोलूं? तो तभी माँ ने कहा कि क्या बात है? तू बोल क्यों नहीं रहा है? तो तभी अचानक से मेरे मुँह से निकला माँ वो इलाज तो पापा कर सकते है। फिर तभी माँ ने कहा कि क्यों? ऐसा क्या है? और फिर माँ और श्रेया मेरी तरफ देखने लगी।

अब में बुरी तरह से फंस चुका था। फिर तभी माँ ने कहा कि तू इसका इलाज कैसे जानता है? तो मैंने कहा कि मैंने एक किताब में पढ़ा था। तो माँ ने पूछा कि क्या पढ़ा था? फिर मैंने श्रेया की तरफ देखा और माँ के पास जाकर उसके कान में कहा कि जब ब्रेस्ट की मसाज नहीं होती तभी गाँठ बनती है और पापा आपकी मसाज कर नहीं पाते होंगे। तो ये बात सुनते ही माँ ने मेरी तरफ गुस्से से देखा, तो में डर गया। तो मैंने कहा कि में आपको इसलिए बता नहीं रहा था। फिर तभी इतने में माँ दर्द से फिर से चिल्लाने लगी, तो मुझसे रहा नहीं गया। फिर मैंने श्रेया से कहा कि में बाहर जाता हूँ, तुम माँ की मसाज करो। तभी माँ ने मुझे बुलाया और कहा कि श्रेया से नहीं हो पाएगा, तुम करो। अब में और श्रेया माँ को देखने लगे थे। फिर माँ ने कहा कि जल्दी करो, मुझको बहुत दर्द हो रहा है। फिर मैंने श्रेया से कहा कि तुम क्रीम लेकर आओ, जब माँ ने नाइटी पहन रखी थी। अब में उसको उतारने लगा था, तो तभी माँ ने कहा कि ये क्या कर रहे हो? तो मैंने कहा कि मसाज करनी है तो इसे तो उतारना ही पड़ेगा। फिर माँ ने देखा और कोई रास्ता नहीं है तो वो खुद ही उतारने लगी।

अब माँ ब्रा और पेंटी में थी। फिर तभी इतने में श्रेया आ गयी तो श्रेया ने देखा कि माँ ब्रा और पेंटी में लेटी है और में उसके पास में बैठा हूँ, तो वो तो इस सीन को देखकर हैरान रह गयी। फिर मैंने उसे अपने पास में बुलाया और क्रीम पकड़ ली और उसे माँ की ब्रा खोलने को कहा। फिर वो ये सुनकर माँ की तरफ देखने लगी। तो तभी माँ उल्टी हो गयी ताकि ब्रा खोलने में आसानी हो। फिर उसने माँ की ब्रा खोली और निकालकर एक तरफ फेंक दी। फिर जब माँ सीधी हुई तो मेरे सामने वो दोनों चूचीयाँ खुली पड़ी थी जिनका मैंने दूध पिया है। मैंने लाईफ में पहली बार किसी औरत की नंगी चूचीयाँ देखी थी, इतनी सुंदर बिल्कुल गोल और ऊपर एकदम भूरे रंग की निपल देखकर मेरे हाथ काँपने लगे थे।

फिर मैंने अपने काँपते हाथ पर क्रीम लगाई और माँ की चूची पर ले गया। फिर जैसे ही मैंने उस पर अपना हाथ रखा, तो माँ एकदम उछल पड़ी। फिर मैंने पूछा कि क्या हुआ? तो माँ ने कहा कि दर्द हो रहा है। अब मैंने मसाज करनी शुरू कर दी थी। फिर मैंने पहले उनकी दोनों चूचीयों पर क्रीम लगाई और उनको मसलना शुरू कर दिया। अब 10 मिनट की मसाज के बाद माँ के निपल खड़े हो गये थे। अब मेरे हाथों को उनके बूब्स साफ-साफ़ महसूस हो रहे थे। फिर मैंने देखा कि माँ भी अब मेरे हाथों को पकड़कर अपनी चूचीयाँ दबा रही है। अब मेरा लंड मेरी लुंगी में पूरा तन गया था। फिर मैंने देखा कि श्रेया भी कभी-कभी अपनी चूचीयों को खुजला रही थी। फिर मैंने यह देखते हुए श्रेया से कहा कि एक ब्रेस्ट की तुम मसाज करो, तो उसने जल्दी से आकर एक चूची की मसाज करनी शुरू कर दी। अब 15 मिनट के बाद माँ के मुँह से आह, उउउ, सस्स्स्स की आवाज़े आने लगी थी।

फिर मैंने थोड़ा ज़ोर से उनके निप्पल को दबाना शुरू कर दिया और थोड़ा आगे सरक गया ताकि मेरा लंड माँ को छू सके। फिर थोड़ी देर के बाद माँ ने मेरा सिर पकड़ा और अपनी चूची पर झुका दिया। अब इधर में भी गर्म हो चुका था। अब मैंने माँ के निपल को अपने मुँह से सक करना शुरू कर दिया था। अब माँ ने श्रेया को भी अपनी दूसरी चूची पर झुका दिया था। अब माँ जोश में आकर बोलने लगी थी चूसो मेरे बच्चो, ज़ोर-जोर से चूसो। अब माँ की चूची चूसते-चूसते मेरा लंड मेरी लुंगी से बाहर आ गया था और माँ को टच करने लगा था। अब मेरे लंड की लार माँ की जाँघ पर गिरने लगी थी। फिर जब माँ ने मेरे लंड का स्पर्श महसूस किया तो वो और जोर-जोर से सिसकियाँ लेने लगी। अब माँ ने मेरा लंड पकड़ लिया था। अब माँ का हाथ लगते ही मेरे पूरे बदन में करंट दौड़ गया था।

अब माँ मेरा मुँह भी चूमने लगी थी। अब में माँ की चूची छोड़कर माँ को लिप किस करने लगा था। अब माँ ने भी मेरे लिप्स को काटना शुरू कर दिया था। अब उधर श्रेया भी चूसना छोड़कर ये नज़ारा देख रही थी। अब वो बड़े ध्यान से मेरा खड़ा लंड देख रही थी। फिर जब उससे रहा नहीं गया तो उसने मेरे लंड को पकड़ लिया और उसके टॉप को ध्यान से देखने लगी। अब इधर माँ की चूत भी पूरी गीली हो चुकी थी। फिर जब माँ ने मेरे लंड को पकड़ना चाहा तो उसने देखा कि उसे तो श्रेया ने पकड़ रखा है, तो उसने उसकी तरफ़ देखा, तो में भी उसको देखने लगा और अब हम ये देखकर हैरान रह गये थे कि श्रेया बिल्कुल नंगी थी और अब वो मेरे लंड को अपने निप्पल से रगड़ कर रही और उसकी माँ के मुक़ाबले उसकी आधी चूचीयाँ मेरे लंड के पानी से चिकनी हो चुकी थी।

फिर ये नज़ारा देखकर माँ ने श्रेया को उठाया और अपने पास बुलाया और बोली कि अरे तुझे तो मुझसे भी ज्यादा जल्दी है। फिर माँ ने उसे अपने साथ लेटने को कहा। अब श्रेया माँ के साथ लेट गयी थी। अब माँ ने मुझे 69 की पोज़िशन में कर दिया था। अब मेरे लिप्स दो-दो चूतों के पास थे। फिर माँ ने मुझे अपनी पेंटी उतारने को कहा, तो मैंने माँ की पेंटी उतार दी। अब दो नंगी चूत मेरे पास में थी और उधर मेरे लंड पर दो जीभ चल रही थी। अब मुझको कुछ समझ में नहीं आ रहा था की में पहले किसकी खुशबू को चुमू? फिर मैंने पहले उस चूत को चूमा जिसमें से में निकला था। फिर मेरे लंड की पहली पिचकारी श्रेया के गले में पड़ी, तो उसने अपने चुत्तड उठाकर मेरे मुँह पर अपनी चूत दबा दी और उसकी चूत का पानी पूरे प्रेशर के साथ बाहर आने लगा। अब उसकी खुशबू ने मुझे और पागल कर दिया था। अब हम तीनों पूरी तरह से गर्म हो चुके थे। अब मेरा पानी निकलने के बाद मेरा लंड 8 इंच से 4 इंच का ही रह गया था, मगर अब में जोश में माँ की चूत को काट भी रहा था। अब श्रेया माँ की चूची को काट रही थी, तो तभी माँ ने कहा कि श्रेया जाकर अपने भाई के लिए थोड़ा दूध गर्म करके ले आ अगर हमें अपनी प्यास बुझानी है तो इसे गर्म करना होगा। फिर श्रेया नंगी ही दूध लेने चली गयी और माँ और में एक दूसरे को किस करने लगे।

फिर जब श्रेया वापस आई, तो मैंने दूध पिया। अब गर्म दूध पीते ही 2 मिनट में मेरा लंड खड़ा होने लगा था। अब माँ और श्रेया दोनों मेरे लंड के टोपे को चाट रही थी। फिर जब मेरा लंड पूरा तन गया तो माँ ने कहा कि श्रेया तू अब निर्मल का लंड पकड़कर मेरी चूत में डाल दे। फिर श्रेया ने मेरे लंड को पकड़कर माँ की चूत के मुँह पर रख दिया। अब माँ इतनी गर्म थी कि उसने एक झटके में ही अपने चूतड़ उठाकर मेरा पूरा लंड अपनी चूत में डाल दिया था। फिर जब मैंने अपने लंड को बाहर निकालकर एक जोरदार शॉट लगाया तो माँ के मुँह से सिसकारी निकल गयी जिससे मुझे बहुत मज़ा आया था। अब मैंने लगातार शॉट्स लगाने शुरू कर दिए थे। अब मेरे दोनों हाथ श्रेया की चूचीयों पर चल रहे थे। फिर में 20 मिनट तक लगातार शॉट लगाता रहा। फिर माँ ने कहा कि निर्मल तू नीचे आ में ऊपर आऊँगी, तो में बेड पर लेट गया और माँ मेरे ऊपर आ गयी।

फिर माँ ने मेरा लंड पकड़ा और अपनी चूत के मुँह पर रखकर ऊपर बैठ गयी और अपनी गांड उठाकर मुझे चोदने लगी और अब श्रेया भी मेरे मुँह पर अपनी चूत रखकर बैठ गयी थी। अब में अपनी जीभ उसकी चूत में घुसाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उसकी चूत बहुत टाईट थी और माँ लगातार धक्के लगा रही थी। अब माँ झड़ने वाली थी। अब उसने श्रेया की चूचीयों को चूसना शुरू कर दिया था और ज़ोर-जोर से चिल्ला रही थी आआहह और फिर थोड़ी देर के बाद माँ झड़ गयी। अब उसने पूरे ज़ोर से अपनी चूत को मेरे लंड पर दबा दिया था। अब मेरा टोपा माँ की बच्चेदानी में जाकर लग गया था। अब मुझको जोश आ गया था तो में नीचे से निकला और माँ को बेड पर घोड़ी बना दिया। फिर मैंने श्रेया को मेरा लंड माँ की चूत में डालने को कहा तो श्रेया ने मेरे लंड को पकड़कर जैसे ही माँ की चूत के मुँह पर रखा, तो मैंने जोरदार धक्का लगाकर मेरा पूरा 8 इंच का लंड माँ की चूत में डाल दिया। अब उसके बाद दनादन शॉट पे शॉट लग रहे थे। अब में अपने एक हाथ से श्रेया की चूचीयाँ मसल रहा था और दूसरे हाथ से उसकी चूत सहला रहा था। अब में भी झड़ने वाला था।

फिर मैंने माँ से पूछा कि माँ अंदर पानी डाल दूँ या बाहर तो इतने में श्रेया बोल पड़ी, वो तुम मेरी चूचीयों पर डाल दो, मुझे बड़ी खुजली हो रही है। तो मैंने जल्दी से अपना लंड बाहर निकाला और श्रेया की चूचीयों पर झाड़ दिया। अब माँ भी जल्दी से उठकर श्रेया की चूचीयों को चाटने लगी थी। अब में थककर बेड पर लेट गया था। अब सुबह के 4 बज चुके थे और फिर हम लोग सो गये ।।

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धन्यवाद …

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