मौसी की बुर का स्वादिस्ट पानी

जैसे की आप लोगो ने अभी तक पढ़ा कहानी का मज़ा बढ़ता चला जा रहा है आज अपनी कहानी को आगे बढ़ाने के लिए दोस्तों अभी तक जिसने पिछली कहानी आंटी ने अपने सामने अपने पति की गांड मरवाई  और मौसी ने मौसा से मेरी गांड मरवा दिया नहीं पढ़ी है | उसे पढ़ ले तभी कहानी का असली रस मिलेगा | तो चलिए अब आगे की कहानी की सुरुवात करता हूँ ..  मौसी ने कहा कि सब अब नहाने को चलें पर जब मैंने पलंग से उतर के चलने की कोशिश की तो गान्ड में ऐसी दर्द की हुक उठी की तडप कर गिरते गिरते बचा आख़िर मौसाजी मुझे बाँहों मे उठा कर बाथरूम में ले गये मुझे चूमते चूमते वे बोले “तू तो मेरा खिलौना है, मेरा गुड्डा है, आज दिन भर कर अपने गुड्डे से मैं खेलूँगा” मैं यह सुनकर मन ही मन खुश हुआ पर घबराया भी मैंने समझ लिया कि आज मेरी गान्ड की खैर नहीं गरमा गरम पानी के शोवर से मुझे आराम मिला मेरा लंड अब खड़ा हो गया था और मैं मचल रहा था मौसी ने सोचा कि चूसने का अच्छा मौका है पर अंकल ने मना कर दिया बोले “डीयर, इसे ऐसा ही खड़ा रहने दो, जब तक राहुल मस्त रहेगा,

प्यार से मरवाएगा अगर झडाना ही हो, तो मैं इसे चूसूंगा आज इसका वीर्य सिर्फ़ मेरे लिए है” मौसी नाराहुल़ हुई कि मौसाजी उसके प्यारे भांजे को अपने ही सुख के लिए पकड़ कर रखे हुए हैं, अपनी पत्नी का उन्हें ज़रा भी ख़याल नहीं मौसाजी ने चूम कर उसे मनाया “मैं तुझे भी खूब चोदून्गा और तेरी गान्ड मारूँगा मेरी रानी सिर्फ़ झड़ूँगा नहीं लंड अपना मैं सिर्फ़ इस बालक की गान्ड के लिए ही खड़ा रखूँगा यह गान्ड नहीं, मेरे लिए तो बड़ी प्यारी बच्चा बुर है और फिर मैं बस दो दिन तो यहाँ हूँ, मुझे फिर दौरे पर जाना है तब तक तो मन भर के इसे भोगने दे”

मौसी की नाराहुल़गी दूर हुई और तुरंत मौसाजी को अपना वायदा पूरा करने के लिए कहती हुई वह झुक कर टब का किनारा पकड़ कर झुक कर खडी हो गई उसे कुतिया स्टाइल में चुदाना था अंकल ने उसके पीछे खड़े होकर उसकी बुर में लंड डाला और चोदने लगे उसे उन्होंने आधे घंटे तक चोदा और तीन चार बार झडा कर खुश कर दिया सारे समय मैं मौसी के सामने खड़ा था और वह मेरा लंड चूस रही थी उसने मुझे झड़ाया नहीं, सिर्फ़ गरम रखा अपने पति के लिए अंकल के कहने पर मैंने उसके लटकते स्तन भी खूब दबाए वे अंकल के झटकों से पेम्डुलम जैसे हिल रहे थे मैं इतना उत्तेजित था क़ी वासना से सिसकने लगा |

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“मौसी, चूस ले मेरा लंड, प्लीज़, मुझसे नहीं रहा जाता” मौसी ने भी मौसाजी से कहा कि एक बार तो उसे चूसने दें, कल से उसने अपने प्यारे भांजे का वीर्य नहीं चखा था मौसाजी ने आख़िर परमिशन दे दी और मौसी के स्तन पकड़े पकड़े ही मैं ऐसा झडा की किलकारियाँ मारने लगा मौसी ने मन लगाकर मेरा वीर्य पान किया और इस बीच अंकल ने उसे एक बार और चोद डाला मैंने गौर किया कि मौसाजी एक भी बार नहीं झडे वी और अपना तन्नाया लंड मेरे लिए बचाए हुए थे जब उन्होंने मुझे मौसी की बुर में घुसते निकलते अपने लौडे को ताकते देखा तो मुझे आँख मार कर हँसने लगे

कि ठहरा राहुला, यह अब तेरे लिए है मौसाजी अब फर्श पर लेट गये और रवीना मौसी की तरफ देख कर हँसने लगे कल की रात की घटना याद करके मैं समझ गया कि अब क्या होगा मौसी तैयार नहीं थी और मेरी ओर इशारा कर के अंकल को आँख दिखाने लगी मौसाजी बोले “बच्चे को भी देखने दो रानी, क्या हुआ, उसे भी इसकी आदत लगा दो, उसे बहुत मज़ा आएगा | इस कहानी का शीर्षक ” मौसी की बुर का स्वादिस्ट पानी ” है | तेरा मूत पीकर उसने शायद कल देख भी लिया है, क्यों राहुल बेटे?

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चलो, मुझे मत प्यासा रखो, पिला दो अपना शरबत” मौसी आख़िर थोड़ा शरमा कर मेरी ओर कनखियों से देखती हुई मौसाजी के सिर के दोनों ओर पैर जमा कर घुटने मोड कर बैठ गयी और उनके मुँह में मूतने लगी आज वह बड़े प्यार से रुक रुक कर धीरे धीरे मूत रही थी कि उसके पति को स्वाद ले ले कर पीने का मौका मिले मुझसे ना रहा गया और मैं झुक कर मौसी के चुंबन लेता हुआ उसकी आँखों में झाँकने लगा |

मौसी की बुर का स्वादिस्ट पानी

मेरे कुछ ना कहने पर भी वह मेरी आँखों की याचना समझ गयी और धीरे से मेरे कान में बोली “बाद में बेटे, अकेले में” नहाने के बाद हम नाश्ते पर बैठे मौसाजी ने मुझे अपनी गोद में बिठा रखा था उनका लंड मेरे नितंबों की बीच की लकीर में धँसा हुआ था और मैं उसपर ऐसा बैठा था कि साइकिल का राउन्ड हो मौसाजी बीच बीच मे अपना लंड मुठियाते तो लंड उपर होकर मुझे आराम से उठा लेता जैसे कोई क्रेन हो उनके ताकतवर लिंग की यह शक्ति देखकर मौसी भी खूब हँसी नाश्ता खतम करके हम ड्राइंग रूम में गये मुझे बाँहों में लेकर चूमते हुए वे दोनों सलाह मशवरा करने लगे कि मेरे साथ अब क्या किया जाए, जैसे मैं कोई ज़िंदा बालक नहीं, उनका खिलौना हूँ जिससे चाहे जैसे खेला जा सकता है आख़िर मौसी मेरी तरफ दुष्ट निगाह से देखती हुई बोली “इसे मीठी सूली पे क्यों ना चढाया जाए

जैसा उस दिन वीडीओ पर देखा था” अजित अंकल को यह आइडीया एकदम पसंद आया ऐसा लगता था कि उन्हें यह आसन आज़माने की बहुत चाह थी, क्योंकि उनका लंड उछल कर और तन्ना गया मौसी जाकर मख्खन का डिब्बा ले आई और मौसाजी एक आराम कुर्सी में बैठ गये उनका लंड तन कर झंडे जैसा सीधा खड़ा था आज वह आठ इंच से भी ज़्यादा लंबा लग रहा था उसे पकड़ कर मस्ती से मुठियाते हुए वे बोले “चल बेटे, तेरी सूली को तू ही मख्खन से चिकना कर जितना मख्खन लगाएगा उतना ही तुझे दर्द कम होगा” मुझे मौसी ने उनके सामने बिठा दिया मैंने हथेलियों में काफ़ी मख्खन लिया और उनके लौडे पर चुपडने लगा घोड़े के लंड सी उसकी साइज़ देख कर डर से मैं काँप रहा था

पर हाथों में उस महाकाय शिश्न का कड़ा स्पर्श और फूली हुई नसों का अनुभव मुझे इतना अच्छा लग रहा था कि मैं उस लंड को मख्खन लगाने में पूरी तरह से उलझते ना रहकर मैंने उस टमाटर से फूले लाल लाल सुपाडे को चूमलिया तो मौसाजी भी मेरी इस कामना पर मुस्करा उठे इस बीच मौसी अपनी उंगली से मेरे गांड में मख्खन के लौंदे भर कर उन्हें दो उंगली से अंदर डाल करती हुई खूब चुपड रही थी मौसाजी ने मुझे पकड़ कर उठाया और घुमा कर अपनी पीठ उनकी ओर करके अपनी टाँगों के बीच खड़ा कर लिया मौसी मेरे सामने खडी होकर मुझे कर मेरा ढाढस बंधाने लगी “देख बेटे, डरना नहीं, दर्द हो तो चिल्लाना नहीं, मज़ा भी बहुत आएगा बड़ी मीठी सूली है यह!

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मौसाजी ने अपना सुपाडा मेरे गांड में थोड़ा फंसाया और फिर मेरी पतली कमर में हाथ डाल कर मुझे अपनी गोद में खींच लिया मैंने सुपाडा घुसने से अपनी गांड को खुलते हुए महसूस किया और फिर दर्द की टीस मेरी गान्ड में उठने लगी पर मैंने दाँत तले होंठ चबाकर ज़रा भी आवाज़ नहीं निकाली और ज़ोर लगाकर अपनी गान्ड ढीली कर दी “अब मौसाजी की गोद में बैठ जा धीरे धीरे, अपनी गान्ड खोल, अपने आप इनकी सूली पर तू चढ जाएगा” मौसी बोली मैं झुककर नीचे बैठने की कोशिश करने लगा और सहसा पुक्क से मेरे गांड को फैलाता हुआ उनका मोटा सुपाडा गांड के छल्ले के अंदर समा गया इतना दर्द हुआ कि ना चाहते हुए भी मैं चीख उठा पर चीख निकली नहीं क्योंकि मौसी बिलकुल तैयार थी |

और उसने तुरंत मेरे होंठ अपने मुँह में पकड़ लिए और दाँतों से उन्हें दबाकर चूसने लगी मेरी चीख उसके मुँह में ही दब कर रह गई मौसी ने भी मेरे कंधों पर हाथ जमाए और पूरी शक्ति से वह मुझे नीचे दबाने लगी उधर मौसाजी ने मेरी कमर पकड़ कर मुझे नीचे खींचा और ज़बरदस्ती अपनी गोद में बिठाना शुरू कर दिया इस दोहरी मार के आगे मेरा शरीर धीरे धीरे नीचे दबाता गया और इंच इंच करके वह मूसल भाले की तरह मेरी आँतों को चौड़ा करता हुआ मेरे चुतडो के बीच धँसने लगा | इस कहानी का शीर्षक ” मौसी की बुर का स्वादिस्ट पानी ” है | अचानक मेरी गान्ड के मांसपेशियाँ जवाब दे गयीं और ढीली पड गयीं मैं धम्म से मौसाजी की गोद में बैठ गया जड तक उनका लंड मेरे चुतडो में था और उनकी झांतें मेरी गांड को गुदगांड रही थीं मेरे आँसू निकल आए थे और मैं दर्द से बिलखता हुआ दबी आवाज़ में मौसी के मुँह में सिसक रहा था पर एक अभूतपूर्व सुख मेरे लंड को झनझना रहा था |

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बीच बीच में मैं सिर घुमा कर बाजू के बड़े आईने में अपनी गान्ड में घुसते उस भाले को देखा रहा था और वह द्ऱुश्य बहुत ही मादक था मौसाजी मुझे सूली पर चढाकर अब बिलकुल शांत हो गये और मुझे बहुत प्यार से बाहों में भींच कर चूमते हुए मेरी सांत्वना करने लगे पति पत्नी की जोड़ी अब मुझपर प्यार से भरे चुंबानों की बरसात करते हुए मुझे चुप कराने में लग गयी जब मेरा रोना बंद हो गया तो मौसी मेरे सामने ज़मीन पर बैठ कर मेरा शिश्न चूसने लगी और मौसाजी ने मेरे सिर को अपने हाथों में पकड कर अपनी ओर घुमाया और मेरे मुँह को चूमते हुए मेरे होंठ और जीभ चूसने लगे सफल सूली अभियान के बाद अंकल गर्व से मुस्कराए और मौसी को वही वीडीओ लगाकर साथ बैठ कर मज़ा लेने को कहा आपस में एक दूसरे को चूमते हुए हम सब वही ब्लू फिल्म देखने लगे फिल्म बिलकुल हमारी रति जैसी ही थी,

फरक इतना था कि एक लडके के बजाय एक कमसिन किशोरी अपने डैडी की सूली चढ रही थी वह एक परिवार प्यार या इन्सेस्ट की कथा थी और उसमें मियाँ बीवी मिलकर अपनी ही जवान किशोर बेटी को भोग रहे थे जब फिल्म के आख़िर में मेरी ही तरह उस रोती चिल्लाती हुई किशोरी को अपने बाप की गोद में बैठकर लंड गान्ड के अंदर लेते हुए दिखाया गया तो मैं वासना से तडप उठा मेरे गांड में ठुन्स कर भरा हुआ लंड अब मुझे बहुत आनंद दे रहा था अंकल भी धीरे धीरे लंड मुठिया रहे थे जिससे वह गान्ड के अंदर उपर नीचे होकर मुझे और मीठा तडपा रहा था मुझे उन्होंने मेरे मचलते शिश्न को छूने भी नहीं दिया जिससे अपनी वासना शांत करने का मेरे पास और कोई चारा नहीं था इसके सिवाय कि बार बार मौसाजी और मौसी के मुँह और जीभ को बेतहाशा चूसू मेरे इन चुंबानों का उन्होंने खूब आनंद उठाया |

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