शराफत की देवी मेरी बहन- 8

शराफत की देवी मेरी बहन- 7

दोस्तों में सूरज कुमार अपनी कहानी का लगभग लास्ट भाग की और बढ़ते हुए कहानी का आठवां भाग प्रस्तुत करने जा रहा हूं. मैं जो भाग आज बताने जा रहा हूं या भाग मेरे कहानी का सबसे कठिन भाग या आप कह सकते हैं मेरी जिंदगी का सबसे कठिन पल है इसको मैं आज भी याद कहता हूं तो मुझे बहन के लिए दुःख होता है, कहते हैं हर चीज का एक चरम काल होता है और उसका अंत भी होता है यही मेरे साथ हुआ.

जब तक मेरे साथ ईश्वर ने सााथ दिया तब तक मैं हर काम बिना बाधा के बहन के साथ निभाता रहा लेकिन जब एक प्रेमी अपनी प्रेमका से बिछड़ने वाला होता या कोई ऐसी घटनाएं घटती हैं जिन्हें वह सपने में भी नही सोचा होगा, वह एकाएक उसके ऊपर आ गिरती हों, उसको उसके लिए सोचने का समय न मिले तो बस क्या करेंगा. ऐसा कुछ हम लोगों के साथ हुआ शादी के बाद हम दोनों लोग घर तो पहुंचा गए थे, लेकिन अब पहले वाली बात नहीं रही, अब तक हम दोनों लोग मौज मस्ती में और हवस मिटाने के लिए सब कुछ कर रहे थे लेकिन अब मैं अपने को बंधा हुआ महसूस करने लगा बहन भी। अब पहले जैसी नहीं रही न चाहते हुए भी हम दोनों लोग पता नहीं क्यों बहन की शादी के नाम पर गुस्सा लग जाती थी। शादी के नाम पर बहन खाना कई दिनों तक नहीं खाती थी. मैं बहन को मना कर किसी तरह खिलाता था, बहन शादी के बाद अब रोज का नियम बन गया था वह खाना बनाने के बाद सीधे मेेे रूम में सोने की जाती थी।

अब उसको डर नहीं लगता था अब मुझे डर लगने लगा था वह अपने रूम में सोने हफ्तों नहीं जाती थी, मुझे डर बना रहता था मैं रात भर सो नहीं पाता था, बहन कहने लगी आप मुझे कहीं ले चलो मैं तुम्हारे साथ रहना चहती हूं मुझे दूसरी शादी नहीं करनी है, मैं समझता था कि समाज क्या कहेगा मम्मी पापा का क्या होगा, लेकिन वह एक नहीं सुनने को राजी थी बल्कि वह मुझसे झगड़ने लगती थी कहती थी तुम ही कहते थे दुनिया में बस एक ही रिश्ता होता है स्त्री और पुरुष का और  बाकी रिश्ता तो समाज के द्वारा बनाई है, अब तुमको अपनी बात पर से मुुुकर रहे हो, मैं समझता था कि मुझे दुनिया से नहीं बल्कि मम्मी पापा से क्या कहेंगे उनका क्या होगा, बहन कहती थी अगर ओ लोग अपने बच्चों से प्यार करते होंगे तो हम दोनों लोग को साथ जीने देेंगेें, हम लोग उनसे पूछ के कहीं दूर जाके घर ले लेेंगे, मैं बोला ठीक है लेकिन मम्मी पापा को राज़ी कौन करेगा,
बहन बोली हम दोनों लोग मम्मी से कहंगे, मैं बोला अगर मम्मी ना मानी और तुम जानती हो मम्मी नहीं मानेगी, बहन बोली हम दोनों लोग उनसे मरने की धमकी देंगे, अगर तब नहीं मानी तो हम दोनों लोग घर से भागकर कहीं जा कर जीवन बिता लेंगे।

मैं बहुत कसमोकस में में पड़ गया था बहुत परेशान रहने लगा था मैं किस संकट में पड़ गया था. बहन को हो क्या गया था, मैं भी बोल दिया कि चलों जैैसा होगा देखा जाएगा। शादी के बाद बहन खाना बनानेेे के बाद मेरा खाना छत पर लाकर पहुंचा देते थे और बर्तन धूल कर सीधे मेरेेे कमरे में सोने चली आती है, मेरे साथ रात भर चुदाई करवाती है और एक पत्नी की तरह ही रहती है लगभग इसी तरह 6 महीने रह रहेे थे लेकिन ऐसा होगा हमने सोचा भी ना था अक्टूबर का महीना था बहन करवा चौथ का व्रत रखी थी. मम्मी बोल रही थी तुम खाना क्यों नहीं खाए बहन बोली मैं खा ली हूं, बहन शाम तक तो सब ठीक रहा लेकिन शाम होते हैं बहन को खाना बनाना था उसको बहुत प्यास लगी थी. व्रत की वजह से वाह खाना बनाने में आनाकानी कर रही थी मां से बोले मां मेरी तबीयत ठीक नहीं है।

आज तुम खाना बना दो मां बोली ठीक है तुम जाओ ऊपर सो जाओ, मैंं बाजार गया मिठाई और कुछ फल और बहन के खाने के लिए काजू बादाम लेकर घर आया चुपके से छत पर जाकर अपने कमरे मेंं रख दिया, शाम के साथ 7:30 बजे चांद देख कर व्रत तोड़ना था बहन साड़ी और श्रृंगार करके सिंदूर लगाकर तैयार हो गई थी. मैं नीचे जाकर पानी लाया क्योंकि नीचे खाना मां बना रही थी. बहन के हैं आप जाइए हम दोनों सबसे ऊपर वाली छत पर चले गए बहन चांद और मुझेे देख कर व्रत तोड़ी मैं बहन को पानी पिलाया, बहन को मीठा खिलाया, मुझे छत पर किसी की आने की आवाज आ रही थी. मैं बहन से बोला कोई आ रहा है मीठा और गिलास ऊपर बने बरजा छिपा दिया , लेकिन बहन साड़ी पहने थे और सिंदूर लगा रहे थे इसको कैसे छिपा बातें आज लगता है. कई वर्षों का पोल खुल जाएगा मैं छत पर से बड़े पिता वाले छत पर से उतर कर नीचे आ गया, और बहन से बोला रानी अभी कुछ मत बताना अभी सही समय नहीं है और मैं नीचे जाा रह हूं.

फिर नीचे से जीने पर खड़ा होकर मम्मी को आवाज लगाया मम्मी छत पर  ही थी मैं समझ गया था की छत पर मम्मी ही  हैं, मैं आवाज लगाते हुए छत पर पहुंचा मम्मी दीदी को चांटा मारकर पूछ रहे थे सिंदूर क्यों पहनी है और साड़ी क्यों पहनी है किसके लिए करवा चौथ  रखी है बहन रो रही थी  और मां लातों से और अपनेे हाथों से पीट रहीं थीं. मां आवाज भी नहीं कर सकती थी मैं पहुंचा तो बहन मेरे तरफ देख कर और दे तेज से रोने लगी. मैंने मम्मी से पूछा मम्मी हुआ क्या है , मम्मी बोली यह किसी के साथ मुंह काला करवती है देख नहीं रहा है तो इसको सिंदूर हो साड़ी पहनी है और छत पर थे कोई और था वह भाग गया है लगता है लेकिन यह बता नहीं रही है किसके साथ मुंह काले करवाती हैं मां को बहन से अलग करतेे हुए, घर की बात है बेइज्जत हो जाएगी मां बोली महेश को मैं इसको यहीं पर मारकर सुला दूंगी बहन मुझेेे देख कर उम्मीद की निगाहों से कुछ कहना चााह रही थी मां बहन को बहुत मारी थी। मैंं मां को अलग करतेे हुए कहांं तुम यह बात किसी से ना कहना, और पापा से भी बिल्कुल मत कहना वाह बीपी के मरीज है और टेंशन से कुछ करना बैठे इसलिए यह बात हमारे तुम्हारे बीच में रहेगी मैं बहन से सब कुुछ पूंछ लूंगाा.

तुम बाहर जाओ और आराम से पहले खाना बनाओ मैं इसको समझाता हूं मां बहन को एक डंडा उठाकर मारने दौड़े लेकिन मैं बहन को अपनी बाहों में पकड़ कर अलग कर दिया और मां से कहा तो मेरा दिमाग मत खराब अगर इसको और एक डंडा मारी तुम मेरा दिमाग खराब हो जाएगा मैं बोल रहा हूं कि मैं इसको समझाता हूं लेकिन तुम को समझ नहीं आ रहा मां सीधे ही नीचे चली गई गाली देते हुए मैं दरवाजा बंद करके बहन को किस किया और बाहों में भर लिया बहन रोने लगी बोली मुझे कहीं ले चलो मुझेे यहां नहीं रहना हैं, मैं बहन के आशु पूछते हुए बोला बेटा भी सही समय नहीं है 2,3 महीने इंतजार करते हैं सही समय आने पर मैं कुछ प्लान बनाता हूं बहन को बहुत समझाया और समझाने के बाद कहा मां कुछ नहीं कहना मैं बात कर लूंगा तुम गुस्से में आकर हमारे रिश्ते के बारे में नहीं बताना नहीं तो हम दोनोंं लोग फस जाएंगे एक दूसरे को बचाने वाला भी कोई नहीं रहेगा मैं सजेशन संभालते हुए सब सही करने की कोशिश करूंगा और समय आने पर कुछ नाा कुछ प्लान बनाकर काम  करूंगा.

मांं के पास आया मां गुस्से में नीचे बैठी थी मैं बोला मां आज कुछ ना कहो उसका नहीं तो कुछ गलत कर बैठी तो बहुत बदनामी हो जाएगी मां बोली कौन लड़का था मैं बोला वह बोल रही है कि वह लड़का उसका कॉलेज फ्रेंड है वह यहां नहीं आया था बस उसका फोटो देख कर व्रत तोड़ी थी मा बोले फोटो कहां है मैं बोला वह फोटो फाड़ दी है चलो टेंशन नालो और पापा सेेेे कुछ मत बताना ,हम इसकी जल्दी से शादी कहीं सा लड़का देखकर कर देंगे मां को बहुत समझाया तब जाकर इज्जत के डर से वह मानी लेकिन आज इसको खाना नहीं दूंगी. मैं रात में अपना खाना बहन को दे दिया. बहन को मां पिछले रूम में बंद कर दे लेकिन मां को समझा करो दरवाजा खोल दिया, आज मुझे बहन पर बहुत दया आ रहा था सब मेरी गलती थी.

अगर मैं बहन के साथ ऐसा नहीं करता तो बहन मुझसे प्रेम नहीं करती तो ऐसा कुछ नहीं होता लेकिन अब इस सोचने से हल नहीं होने वाला था धीरे धीरे 1 सप्ताह बीत गया मां बहन के साथ सोती थी बहन मुझसे रात में बात भी नहीं कर पा रही थी दिन में ही बात हो पाते थे. बहन बहुत परेशान हो गई थी मुझसे कहने लगी मुझे आज तुम्हारे साथ सोना है और इस कुत्तिया मम्मी को सबक सिखाने है. मैं बोला मम्मी तुम्हारेे साथ सोोती हैं कैसे हो पाएगा वह बोली इस कुु्तिया को इसके शराफत को खत्म करना है. मैं बोला वह कैसे बहन बोली आज तुम नींद की गोली लाओ मैं इसके खाने में मिलाकर दे दूंगी तुम्हें आज चाहे जैसे लाना होगा मैं बड़ा मजबूर था वाहन की बात मान गया मैं डॉक्टर के पासे  नींद की गोलियां 1 पत्ता ले लिया.

बहन रात में खाना मम्मी को देते वक्त उनके खाने में नींद की गोली डाल  दिया और हम दोनों खाना खाकर मैं अपने रूम में सोनेे चला गया, मम्मी को सोए हुए 2 घंटे हुए होंगे मम्मी पूरी गहरी नींद में सो गई मैं बहन मेरे पास आकर बोली वह सो गई है. मैं बोला कितनी गोली दी वह बोली बोली गोली मैं बोला तुमको एक गोली देना था बहन बोली उसको सुलाना नहीं तो उसके साथ आज तुमको चुदाई करनी है मैं बोला अगर वह जाग गई तो वह बोली मैं अभी उसके चूतड़ में उंगली कर रही थी  और चुचियों को दबा रही थी उसको कोई फर्क नहीं मैं उसके पैर को भी घुमा कर इधर कर दी तब भी उनको कोई फर्क नही पड़ता है। मैं बहन से बोला अगर मम्मी जाग गई तो बहुत बवाल हो जाएगा हमारा घर में रहना मुश्किल हो जाएगा, बहुत मार पड़ेगी हम दोनों को बहन बोली हमको कहां इनके साथ रहना है अगर कुछ ऐसा होता है.

हम दोनों घर छोड़ कर भाग जाएंगे, मुझेेेे डर लग रहा  था मैं बोला कि हम लोग पति पत्नी अपना मजा लेते हैं मां का जाने दो बहन वाली तुम्हें आज मेरा कहना मानना पड़ेगा यह  कुत्तिया मुझे बहुत मारी थी अगर तुम्हें नहीं करना है तो समझ लो,मैंं मजबूरी में बहन का कहना मानना पड़ा मैं बहन के कमरे में  मां के पास आ गया, मां पैर फैलाकर सोए थी. उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां हिमालय के चोटियों के समान मेरेेे लंड* को*सलाम कर रहे थे, बहन पहले मां के ब्लाउज के बटन खोल दिए मुझे इशारा करके चूूची चूसने को कहा को कहा,  बहन दूसरी चूची चूसने लगाी.

मां की विशालकाय चूची का रसपान कर रहा था इतनी बड़ी चूची थी उतने में बहन के दो चूचियां हो जाते चूचियों को मसल रहा था और डर भी रहा था 15 मिनट चूची पीने के बाद बहन मां की साड़ी को ऊपर कर दिया. अब मैं मां के चूूत में अपना मुंह लगा दिया और चूत को पीने लगा उधर बहन मां के बड़ी बड़ी चूचियां को पी रहे थी इधर में मांं की चूत को चाट रहा था इधर मेरे लंड को बहन चूस रही थी मम्मी पर दवा का इतना असर हुआ था.

उसके हाथ पैर को चाय दे चाहे जिस दिशा में घुमा दो कोई फर्क नहीं पड़ता था 15 मिनट मम्मी की चूूत चाटने के बाद बहन मेरा लन्ड मम्मी की चुत में डालने को कहा और मम्मी का पैर फैला दिया मेरा लंड मम्मी की चूत में घुस गया उधर बहन मम्मी के विशालकाय चूचियों को पी रहे थे. इधर में चूत में झटके मार रहा था और एक हाथ से मां की चूचियां को पकड़े हुए था. मुझे इतनी उत्तेजना छा गई थी के जितनी कभी नही जाती थी. यह मम्मी की चूूत चोदनेे के कारण हो रहा था. मैं भूल गया था कि मैं मम्मी को नींद मेंं चोद रहा हू लेकिन मैं नशे में इतना चूर था की सब भूल गया था उधर बहन मां के चुचियों को मसल रहे थे. मैं अपने चोदने के स्वीट स्पीड तेज कर दिया पक पक पक करनेे की आवाज आने लगी थी 20 मिनट में मैं अपना पानी मां की चु में छोड़ दिया और बहन के होठों चुसने लगा.

मुझे यह एक सपने की तरह लग रहा था मैंने कभी कल्पना भी नहीं किया था की मांं की चूत का दर्शन कर आऊंगा लेकिन कहते हैं UN होनी को कोई नहीं टाल पाता. यही हमारेे सा भी हो रहा था एक तरफ बहन का प्यार से मुझे डर लगने लगा था. दूसरी तरफ उसका यह पागलपन ना जाने लाइफ किस मोड़ पर लाकर खडी कर दी, कुछ भी हो सकता था. मैं बहन को समझाने की लाख कोशिश करता रहा कि यह ठीक नहीं लेकिन कभी उसको समझा कर मोटिवेट किए गए शब्द इतने गहरे लग गए थे उसको वह कुछ मानने को तैयार नहीं थी लाइफ कहां जाएगी यह मैं समय के ऊपर छोड़ दिया था जोो होगा  भविष्य में वह देखा जाएगा.