कामुक लड़की के साथ 69 स्टाइल में सेक्स की कहानी

हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम अंकुश है और एक बार मेरा तबादला 1 साल के लिए फरीदाबाद के एक छोटे से गाँव में हुआ था और वो मेरे अहमदाबाद दफ़्तर का क्लर्क मिस्टर प्रीतम का गाँव था. फिर उसने कहा कि साहब अगर आपको वहाँ कोई रहने की दिक्कत हो तो आप मेरे गाँव के मकान में रह लेना, वहाँ मेरा परिवार रहता है आपको कोई परेशानी नहीं होगी.

फिर मैंने कहा कि प्रीतम जी यह तो बहुत अच्छा है, में ऐसा करता हूँ कि तुम्हारे घर पर ही किराएदार की तरह रह लूँगा, वैसे वहाँ कौन-कौन रहते है? तो वो बोला कि मेरी माँ और 3 बहनें और मेरी बीवी रहती है. फिर मैंने कहा कि कोई बात नहीं में जितने दिन वहाँ रहूँगा, उन लोगों का ख्याल रखूँगा, तुम कोई बात की चिंता मत करना. फिर प्रीतम ने अपने गाँव में फोन करके मेरे आने की और रहने की सूचना अपने परिवार वालो को दे दी.

फिर जब में उसके गाँव पहुँचा तो उसके परिवार वालों ने मेरी खूब खातिरदारी की और मुझे रहने के लिए एक कमरा भी दे दिया. उनका मकान काफ़ी बड़ा था और प्रीतम की माँ सुमित्रा खूबसूरत 45 वर्षीय थोड़ी मोटी महिला थी, उसका पति कई सालों से दुबई में काम करता है और सुमित्रा की 2 बेटी 23 साल की वंदिता शादिशुदा महिला थी, वो कुछ दिनों के लिए अपनी माँ के पास आई थी, दूसरी लड़की 20 साल की दिव्यांका और प्रीतम की बीवी 24 वर्षीय मयुरी थी. वो सभी लोग ना ज़्यादा मोटे ना पतले शरीर वाले थे और तंदुरुस्त भी थे, प्रीतम के एक 9 महीने का बच्चा भी था, उस परिवार के सभी लोग बहुत ही अच्छे थे.

अब में कुछ ही दिनों में उन लोगों से काफ़ी घुल-मिल गया था. अब वो लोग मुझसे घर में पर्दा नहीं करते थे और काफ़ी खुलमिल गये थे. अब में भी परिवार के एक सदस्य की तरह रहने लगा था और उन लोगों को सब्जियां या बाज़ार से सामान लाने में मदद करता था. अब वंदिता मुझसे काफ़ी घुल-मिल गयी थी और वो मज़ाक भी बहुत करती थी. हम अक्सर घर में बैठ कर बातें करते रहते थे और कभी- कभी मज़ाक-मज़ाक में वो मुझसे डबल मीनिंग वाली बातें करती थी. जैसे एक दिन में कमीज़ पहनकर बटन लगा रहा था तो वो बोली कि अंकुश भाईजान इतने बड़े हो गये फिर भी लगाना नहीं आता, तो में यह सुनकर बोला कि क्या मतलब?

फिर वो हँसते हुए बोली कि वास्तव में आपको सिखाना पड़ेगा की कैसे लगाया जाता है? देखो आपने शर्ट की बटन ऊपर नीचे लगाई है, वो इसी तरह की बातें करती थी. फिर एक दिन हम दोनों बातें कर रहे थे, तो वो मेरे पास आई और बोली कि अंकुश भाईजान मुझे सुई में धागा पिरोकर दीजिए ना, तो में सुई पकड़कर धागा पिरोने लगा, तो वो हँसते हुए बोली कि भाईजान थूक लगाकर डालो तो आसानी से घुस जाएगा, वो इसी तरह की मौके-मौके पर डबल मीनिंग वाली बातें करती थी.

अब में मन ही मन में उसे चोदने की प्लानिंग करने लगा था, क्योंकि वो काफ़ी सेक्सी थी. उस दिन शनिवार था मेरी छुट्टी थी इसलिए में सुबह देर तक सोता था, वैसे मेरी नींद 9 बजे खुल गयी थी, लेकिन आलस के कारण में आँखे बंद करके सोया था. अब मेरे दिमाग़ में वंदिता को कैसे चोदा जाए, बस यही घूम रहा था? और यह सोच-सोचकर मेरा लंड खड़ा हो गया था.

फिर मुझे ख्याल आया की वंदिता मुझे जगाने ज़रूर आएगी तो मैंने जानबूझ कर अपनी लुंगी जांघो पर से हटाई और अपने खड़े लंड को अपनी अंडरवियर से बाहर निकाल लिया और आँखे बंद करके उसका इंतज़ार करने लगा. फिर करीब 10 मिनट के बाद वो आई और दरवाजा खोलकर मेरे कमरे में दाखिल हो गयी. फिर मैंने अपनी थोड़ी आँखे खोलकर देखा तो वो एकटक मेरे लंड की और देख रही थी. फिर मैंने भी करवट बदली तो मेरा खड़ा लंड लुंगी के अंदर छुप गया.

फिर वो बोली कि भाईजान आज उठना नहीं है क्या? तो मैंने सीधा होकर एक लंबी अंगड़ाई ली तो देखा कि मेरा लंड अब भी लुंगी के बाहर आकर खड़ा था. अब यह देखकर वो जाने लगी तो में भी कुछ नहीं बोला और फ्रेश होकर नाश्ता करने लगा. अब दोपहर को में वंदिता और मयुरी (उसकी भाभी, प्रीतम की वाईफ) टी.वी पर पिक्चर देख रहे थे. अब वंदिता मयुरी के पीछे बैठी थी और में इस तरफ. फिर इतने में मयुरी का बच्चा रोने लगा तो मयुरी अपनी कमीज़ ऊपर करके उसे दूध पिलाने लगी. दोस्तों आप ये कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है।

अब वो पिक्चर में इतनी मस्त थी कि पूछो मत, अब उसे यह भी ख्याल नहीं आया कि में वहाँ बैठा हूँ. अब मेरा ध्यान पिक्चर में नहीं था, अब में बार-बार मयुरी की चूचीयों को देख रहा था. फिर इतने में मेरी और वंदिता की नज़र मिली. अब वो मुझे मयुरी की चूचीयों को घूरते हुए देख रही थी. फिर जब हमारी नज़र आमने सामने हुई तो वो मुझे देखकर मंद-मंद मुस्कुरा रही थी, तो में शर्म के मारे उठकर जाने लगा.

फिर वो बोली कि भाईजान कहाँ जा रहे हो? (मयुरी की चूचीयों की तरफ इशारा करके बोली) देखो कितनी अच्छी पिक्चर है? तो मैंने हँसते हुए कहा कि जरा बाथरूम जाकर आता हूँ. फिर जब में पेशाब करके वापस आया तो मैंने देखा कि वंदिता और मयुरी आपस में बातें कर रही थी, तो में एक साईड में होकर उनकी बातें सुनने लगा. अब वंदिता मयुरी से कह रही थी कि भाभी जब तुम मुन्ने को दूध पिला रही थी तो तब अंकुश भाईजान आपकी चूची को घूर-घूरकर देख रहे थे.

फिर वंदिता ने उसे सुबह वाला नजारा भी पेश कर दिया और कहने लगी कि सच्ची भाभी जान उसका लंड तो काफ़ी मोटा और लंबा है, मैंने आज तक इतना मोटा और लंबा लंड नहीं देखा. फिर जब में रूम के अंदर गया तो वो दोनों चुप होकर पिक्चर देखने लगी. अब में शाम को 7 बजे अपने कमरे में बैठकर विस्की पी रहा था तो वंदिता मेरे कमरे में आई.

अब पहले तो वो मुझे विस्की पीते हुए देखकर चौंक गयी, लेकिन फिर मेरे सामने जमीन पर बैठ गयी, उसके चूतड़ जमीन पर थे, लेकिन वो उसके दोनों पैरो के घुटने ऊपर करके बैठी थी, जिससे मुझे उसकी सलवार का वो हिस्सा नज़र आने लगा जिसमें उसकी चूत छुपी रहती है, उसने पीले रंग का सलवार और कमीज़ पहना था. फिर जब मेरी नज़र उसकी सलवार पर पड़ी तो में एकटक वहाँ देखने लगा, मैंने देखा कि उसकी सलवार की सिलाई (जहाँ चूत होती है) उखड़ी हुई थी और उसके छोटे-छोटे झाटों के बीच में से उसकी चूत का दाना साफ़-साफ़ दिख रहा था.

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