प्यार का एक अनूठा एहसास

दोस्तों यह रियल लव स्टोरी है अपने विचार जरुर लिखे | प्रियांसी की शादी हुई तो वो अपने ससुराल में जैसे-तैसे सैट होने की कोशिश कर रही थी। हालांकि उसके पीहर और ससुराल में बहुत फर्क था, मगर उसने अपने व्यवहार से इस फर्क को मिटा दिया था। धीरे-धीरे उसने अपने व्यवहार से सबका दिल जीत लिया। वह अब अपने ससुराल और उनके रिश्तों को अहमियत देने लगी। पर जो दर्द दिल में था, उसे कभी अपने पति अनुज पर जाहिर नहीं होने दिया। भीतर से वह पूरी तरह टूटी हुई थी, मगर अनुज के सामने वह सहज रहने की कोशिश करती। हालांकि अनुज को इस बात का पता था कि प्रियांसी किस दौर से गुजर चुकी है। पर कभी भी अनुज ने एक हमदर्द की तरह उसे सहारा व विश्वास नहीं दिया, जिसकी उसे जरूरत थी। फिर भी प्रियांसी को अनुज से कोई शिकायत नहीं थी।
एक दिन प्रियांसी अपने पति व सास के साथ किसी रिश्तेदार के यहां शादी समारोह में गई। वहां पर उसकी नजर नरेश पर पड़ी। प्रियांसी तुरंत नरेश के पास गई और बोली-‘हाय नरेश! यहां कैसे?’ नरेश बोला-‘मैं तो इसी शहर में रहता हूं। तुम कहां हो?’ ‘मैं भी यहीं हूं। इसी शहर में। आओ तुम्हें अपने पति व सास से मिलाती हूं।’ कहकर उसने पति अनुज और सास कमला से मिलाया-‘ये नरेश है, मेरी मोसी के ननद के बेटे।’ नरेश ने नमस्ते कहा। फिर प्रियांसी बोली-‘ये मेरे पति है अनुज और ये हैं सास कमला मैया।’ कुछ देर इधर-उधर की बात होने के बाद प्रियांसी बोली-‘नरेश हमारा घर सरायमीर नगर में है| शांति निवास। मिलने जरूर आना।’ नरेश ने कहा-‘हां, अब तो पता चल गया है कि तुम इसी शहर में हो, तो जरूर आऊंगा।’ अच्छा तो चलते हैं, कहकर प्रियांसी अपने पति व सास के साथ चली गई।
अब नरेश के मन में अजीब सी हलचल शुरू हो गई। उसको शादी में भोजन भी अच्छा नहीं लग रहा था। उसका मन तो प्रियांसी में खोया हुआ था।
प्रियांसी भी बहुत खुश थी। वो सोचने लगी कि अब उसे कोई समझने वाला मिला है। अचानक वह अतीत में खो गई। तीन साल पहले की घटनाएं फिर सामने थी। जब प्रियांसी ने पहली बार अनिल को देखा। बस देखती रह गई। अनिल का भी यही हाल था। वह भी मन ही मन उसे चाहने लगा। नरेश अनिल का सबकुछ था, चाचा का लड़का भाई भी और मित्र भी। अनिल ने नरेश को बताया कि उसे प्रियांसी पसंद है। नरेश बोला-वाह! क्या बात है। तुम्हारी पसंद का क्या कहना। धीरे-धीरे अनिल और प्रियांसी में फोन पर बातें होने लगी। दोनों को पता ही नहीं चला कि बात-बात में वो इतना करीब आ गए हैं, कि अब एक-दूसरे के बिना रह नहीं सकते। घरवालों ने कहा अब तो इनकी शादी कर देनी चाहिए। सब कुछ ठीक था। अब अनिल और प्रियांसी की सगाई हो गई थी। लेकिन कहते हैं न प्यार को तो तूफान से गुजरना ही पड़ता है। आप यह लव स्टोरी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |
प्रियांसी की जिंदगी में भी तूफान आया। एक एक्सीडेंट में अनिल की मौत हो गई। इस हादसे ने प्रियांसी को तोड़कर रख दिया। प्रियांसी अब उदास रहने लगी। उसके चेहरे से हंसी गायब ही हो गई। जो दिनभर गुनगुनाती रहती थी, अब खामोश थी। मन में बस अनिल ही बसा था। उसकी याद में खोई-खोई रहती थी। गाना गाने का शोक प्रियांसी को बचपन से ही था, मगर उसके जीवन से जैसे संगीत तो गायब ही हो गया। अनिल के जाने से उसके शरीर से जैसे आत्मा निकल गई। बाहर एक लोथड़ा बचा रहा।real love story by mastarm dot net
पर प्रियांसी ने अपने मां और पापा के लिए अपना दर्द कुर्बान कर दिया। वो नहीं चाहती थी कि उसकी वजह से उसके भाई-बहन और मां, पापा दुखी हों। वो तो बस अनिल से प्यार करती थी। उससे शादी कर दुनिया भर की खुशियां पाना चाहती थी। लाख कोशिश करके भी वो अनिल को भुला नहीं पाई। घंटों अकेली बैठी अपने आप से बातें करतीं। मानों अनिल जिंदा हों, उसके लिए फिर कभी अकेले में रोती। यह सिलसिला चलता रहा। प्रियांसी की बड़ी बहन आशा से प्रियांसी का दर्द देखा नहीं गया। वो समझ सकती थी कि प्रियांसी को अनिल चाहिए। मगर अनिल को वापस लाना संभव नहीं था। अगर संभव होता तो अपनी जान देकर भी अनिल को ले आती। प्रियांसी को सिर्फ अनिल चाहिए था। अब आशा को प्रियांसी का दर्द देखा नहीं गया। उसने अपनी मां से कहा कि प्रियांसी की शादी करवा दो। नए घर में जाएगी तो अनिल को भूल जाएगी। उसे अनिल के बारे में सोचने का समय नहीं मिलेगा। मां को यह बात सही लगी। उसने यह बात प्रियांसी के पिता से कही। पिता बोले-ठीक हैं, यह भी करते हैं। मगर प्रियांसी मांगलिक थी। अनिल के घरवाले अनिल की मौत का कारण प्रियांसी को ही मानते थे, क्योंकि वह मांगलिक थी। अब तो प्रियांसी भी मानने लगी थी कि उसका मांगलिक होना ही अनिल की मौत की वजह बना है।
फिर प्रियांसी के लिए रिश्ता आया। लड़का सबको पसंद आया। अच्छा भला कमा लेता है। घर भी अच्छा है। प्रियांसी के घरवालों ने प्रियांसी से पूछा। प्रियांसी रोने लग गई। मगर घरवालों ने उसे समझाया। आखिर प्रियांसी ने भी जैसे समझौता कर लिया। न चाहते हुए भी चुप रही। प्रियांसी की शादी अनुज से हो गई।
नरेश बैचेन था। शादी में उसने कुछ नहीं खाया। घर आकर सोने की कोशिश करने लगा। सोचा अगर मुझमे जरा सी हिम्मत होती तो प्रियांसी उसकी हो सकती थी। अनिल के जाने के बाद उसने क्यों नहीं प्रियांसी से बात की। प्रियांसी से उसकी शादी हो सकती थी, अगर वह पहल करता। अनिल के बाद अगर कोई प्रियांसी के करीब था तो वह नरेश ही था। नरेश भी प्रियांसी को चाहता था, मगर अनिल की पसंद होने की वजह से चुप था।….

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Updated: June 27, 2016 — 9:48 pm