प्यार का एक अनूठा एहसास

गतांग से आगे …. नरेश के सामने सब कुछ साफ-साफ घूमने लगा। अनिल की मौत के बाद नरेश की शादी तय हो गई। शादी को दस दिन बचे थे। नरेश प्रियांसी के घर अपनी शादी का निमंत्रण देने गया। प्रियांसी उसके सामने थी। वह एकटक प्रियांसी को देखता रहा। उसके मन में आया कि कह दे-वह उससे प्यार करता है। शादी करना चाहता है। मगर अब तो देर हो चुकी है, दस दिन बाद उसकी दिव्या से शादी है। इसी अंतरद्वंद्व में वह घर आया। रात को सो भी नहीं पाया। उसके मन में था प्रियांसी अनिल की अमानत है। वह उसे अच्छी तरह संभाल सकता है। मगर कुछ कहने की हिम्मत नहीं हुई। अब उसने दिव्या से शादी कर ली और जयपुर जाकर बस गया।
पूरे तीन साल बाद प्रियांसी भी उसे जयपुर में मिली। पुरानी बातें ताजा हो गई। उसे लगा प्रियांसी उसकी जिंदगी का हिस्सा है। उससे शादी नहीं हुई तो क्या, उसे देख तो सकता ही हूं। वह रात नरेश पर भारी पड़ रही थी। सुबह का उसे इंतजार था। सुबह हुई और वह प्रियांसी के बताए पते पर पहुंच गया। मगर वह बाहर से ही लौट आया। अगले दिन फिर वह प्रियांसी के घर के पास गया, मगर प्रियांसी नजर नहीं आई। एक दिन नरेश ने किसी से अनुज के नंबर लिए और उसे फोन किया। उसने फोन पर बिजनेस से संबंधित कोई डील करने की बात कही। अब तो आए दिन नरेश और अनुज के बीच बातें होने लगी। आप यह लव स्टोरी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | एक दिन अनुज अपना मोबाइल घर ही भूल गया था। नरेश ने फोन लगाया तो प्रियांसी ने उठाया। नरेश बोला-अनुज हैं। प्रियांसी बोली नहीं, वे अपना फोन घर भूल गए हैं, आप कौन बोल रहे हैं। अरे मैं नरेश बोल रहा हूं। दोनों ने कुछ देर बातें की। फिर नरेश को प्रियांसी ने अपने मोबाइल नंबर दे दिए। अब अक्सर उनमें बातें होती। नरेश अनिल के बहुत करीब था तो अनिल की ही बातें होती। पूरा-पूरा वक्त अनिल की ही बातें होती। नरेश को बस बहाना चाहिए था, कि किसी तरह प्रियांसी से बात हो जाए। और प्रियांसी अनिल की बातें सुन खुश हो जाती।
पर ये खुशी भी कहां टिकने वाली थी। किसी ने प्रियांसी को बताया कि नरेश अच्छा आदमी नहीं हैं। वह किसी कांड में शामिल है। प्रियांसी फिर से दुखी हो गई। वह नरेश को जानती तो थी, मगर इतना भी नहीं जानती थी। प्रियांसी फिर से दुखी हो गई। एक दिन जब नरेश का फोन आया तो वह बोली-नरेश हमारा बात करना ठीक नहीं है। लोग हमें गलत समझेंगे। नरेश बोला-हम गलत कहां है? लोग समझते हैं तो समझते रहे, हमें क्या? पर प्रियांसी ने कहा-आगे से तुम फोन मत करना और फोन काट दिया। आप यह लव स्टोरी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | प्रियांसी पूरे दिन परेशान रही। फिर शाम को काल आया तो प्रियांसी फोन रिसीव करते ही बोली-तुम भले ही नए नंबर से काल करो, मैं आपकी आवाज पहचानती हूं। अब बताओ कौन हो तुम? सामने से आवाज आई नरेश। प्रियांसी एकदम बोली-तो नरेश तुम ही हो जो मुझे वाट्स-एप पर परेशान कर रहे थे, बार-बार मैसेज करके। नरेश बोला, नहीं तो, मुझे आज किसी का फोन आया जिसकी आवाज सेम तुम्हारे जैसी थी, तो यह पूछने के लिए कि कहीं तुम मेरी खिंचाई तो नहीं करने वाली हो। ये जानने के लिए काल किया। आज प्रियांसी बहुत खुश थी। उसकी आवाज में अलग सी खनक थी। नरेश को हुआ इस बार वो मौका देखकर प्रियांसी को बोल देगा कि वह उससे बहुत प्यार करता है। फिर भले ही प्रियांसी नाअनिल होगी तो मना लूंगा। पर प्रियांसी को नरेश से कब बात करनी थी। उसे नरेश को बताना था कि अनिल जैसी आवाज का एक सख्श है। वो प्रियांसी के घर के पास ही रहता है । उसे प्रियांसी की उदासी नहीं देखी जाती। उसने कई बार उससे बात करने की कोशिश की। पर प्रियांसी ने कभी उसकी तरफ देखा भी नहीं। आज तो उसने कहा कि प्रियांसी एक बार बात कर लो फिर मैं तुम्हें कभी फोर्स नहीं करूंगा। प्रियांसी ने सोचा कि क्या है, मैं उसे समझा दूंगी कि इन सबमें कुछ नहीं है। प्रियांसी ने काल किया तो सामने से आवाज आई कैसी हो प्रियांसी, मैं रणबीर। कब से तुम्हारी आवाज सुनना चाहता था। पर प्रियांसी कुछ नहीं बोली। बस कमल की आवाज सुन रही थी। मानों उसका दस साल का इंतजार खत्म हो गया हैं। कमल की आवाज और उसका बात करने का तरीका सब अनिल से मिलता था। उसे यह अहसास भी नहीं कि वो अनिल से नहीं कमल से बात कर रही हैं। आप यह लव स्टोरी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है | अब घंटों घंटों कमल और प्रियांसी बातें करते। कमल को सिर्फ प्रियांसी का दर्द कम करना था। जो प्रियांसी जिंदा लाश थी। वो खुली हवा में सांस लेने लगी। उसे लगा इस कमल से बात कर उसका दर्द कम हो रहा है। अब उसे बारिश भी अच्छी लगने लगी। जिंदगी सामान्य होने लगी। कमल भी बहुत दुखी था अपनी लाइफ में। सबको सब कुछ दिखता था, पर उसे कोई नहीं समझता था।अब प्रियांसी जो उसकी सबसे अच्छी दोस्त जो बन गई। उसे अब क्या चाहिए। प्रियांसी ने उसे अपना हर दर्द, अपनी हर तकलीफ बताई। अब कमल ने भी उसे अपनी बातें बतानी शुरू की। बातों ही बातों में वे कब इतना करीब आ गए, पता ही नहीं चला। अब प्रियांसी को कमल से बात नहीं होती तो नींद नहीं आती। दस साल में प्रियांसी बहुत कम सोई, मगर अब वह कमल की याद में सो नहीं पा रही। आज प्रियांसी को जाना है अपनी मां के पास, तो कमल उसे छोड़ने स्टेशन तक आया। प्रियांसी की गाड़ी जाने के बाद भी कमल वहां खड़ा रहा। ये बात प्रियांसी के दिल को छू गई। उसे लगा कि अनुज भी उसे छोड़ने आते हैं, मगर गाड़ी में बिठाकर चले जाते हैं। ये बात प्रियांसी के दिल को छू गई। आज कमल ने प्रियांसी को इतना खुश देखा तो अपने दिल की बात बता दी। उसने मैसेज किया-आई लव यू । तो प्रियांसी ने भी मैसेज किया-उसके तीन साल की बेटी है, अनन्या। वह बहुत ही सुंदर है। सब उसे अपने पास बुलाते हैं। पर वो प्रियांसी को छोड़ कर कहीं नहीं जाती। अब प्रियांसी अपनी मां के पास पहुंची तो उसके चेहरे का नूर कुछ और था। इतने सालों में जो उदासी देखी थी, वह दूर हो गई थी। आप यह लव स्टोरी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है |अब कमल का फोन आता तो वह अकेले में बातें करती। एक दिन कमल ने कहा-प्रियांसी मैं तुम्हारा अनिल नहीं कमल हूं। पर मै तुम्हें बहुत प्यार करता हूं। तुम्हारे अनिल से भी ज्यादा मैंने भगवान के सामने तेरे नाम के दीये जलाए हैं। जब-जब तुम्हें देखा उन दीयों के साथ मैं भी जला हूं। आज मेरी सारी दुआ कुबूल हो गई। तुम मेरे साथ हो, मुझे कुछ नहीं चाहिए, बस तुम अपनी बेटी और अनुज का ध्यान रखो। अब महीने में दो-चार बार बात कर लेंगे; इससे ज्यादा अगर बातें हुईं तो तुम्हारा क्या होगा? अनुज ये बर्दाश्त नहीं कर पाएगा। मुझे लगता है प्रियांसी मेरा काम तेरा दर्द कम करना था जो हो गया।….अब दोनों एक-दूसरे की परवाह करते हैं। फोन भी करते हैं। मगर प्रियांसी अपनी जिंदगी में खुश है। प्रियांसी को खुश देखकर अनुज में भी परिवर्तन होने लगा। वह भी प्रियांसी को खुश रखने लगा। अब वाकई अनुज और प्रियांसी की जिंदगी बदल गई थी। यह सुखद बदलाव प्रियांसी की जिंदगी में कमल की वजह से आया। वाकई इस बदलाव ने प्रियांसी की जिंदगी को सहज कर दिया।

Updated: June 27, 2016 — 9:48 pm