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जालिम जवानी बड़ी हरामी

गतांग से आगे …..

अब उसने अपने शरीर को रगड़ना आरम्भ किया सबसे पहले आगे झुक कर अपना चेहरा साफ़ करने लगी इससे उसके उरोज अपने समग्र आकार में अपनी मादकता बिखेर रहे थे। हिलाने से उनमे उठाने वाली लहरों की सुन्दरता का अनुमान लगाना कठिन नहीं है । इसके बाद उसने अपने हाथों में पानी भर कर अपनी गर्दन और पीठ पर डालने लगी जिससे उसके स्तन पूरी तरह से लहरा जाते थे। काफी समय तक यह सब करने के पश्चात उसने पानी में डुबकी लगाई और अदा के साथ अपने स्तनों को एक बार फिर उद्भासित किया।

जिससे उसके विशाल उरोज झटके के साथ फ़ैल कर कामुकता को बढ़ा देते हैं वह यह सन अत्यंत मंद गति से करती है कि उसका बेटा इस सब को देख सके .इसके पश्चात् वह अपने उरोजो को उद्भासित करते हुए ,पाने की सतह के ऊपर से कम्पित होते उरोजों के साथ पास की पत्थर की चट्टान पर उस आवरण को रख देती है.

इसके पश्चात वह अपने बदन को रगड़ -रगड़ साफ़ करती है इसके लिए वह रेशों से बुने ब्रश का सहारा लेती है और अपने पेट वक्ष व उरोजो को इससे रगड़ती है और साथ ही तेजी से बीच -बीच में डुबकी भी लगा लेती है जिससे उसके उरोज पानी के ऊपर उछल कर आते दीखते है यह जानते हुए की ऐसा करना उसके बेटे का ध्यान अवश्य ही आकर्षित करेगा और उसे आनंद भी देगा l

इसके बाद वह अपने निचले हिस्से के आवरण को भी उसी मंद गति से हटा ती है और उपरी आवरण के पास रखने जाती है और वापस आ कर इस तरह से निम्न भाग को रगड़ कर धोती है कि इसक बेटा उसके नितम्बों का भी रसास्वादन कर सके .

वह जा न रही है कि जो हो रहा है वह गलत है फिर भी ,यह सब अभी इतना आनंद दायक प्रतीत हो रहा है किईसको अभी इसी समय रोक पाना नामुमकिन लगता हैl

वह जान कर भी कि वह जो कर रही है कि जों हो रहा है वह गलत है फिर भी ,यह सब अभी इतना आनंद दायक प्रतीत हो रहा है कि उसको अभी इसी समय रोक पाना नामुमकिन लगता है.

अब उसने उसकी ओर पीठ कर ली और उस रेशों के ब्रश (ज्यादा अच्छा रेशों के पोटली )से अपने गुह्य अंगो को पानी के भीतर रगड़ कर साफ़ करने लगी ,इस सब में भी उसके नितम्ब पानी के बाहर झलक ही जा रहे थे .उसने ऐसा मात्र लज्जा वश नहीं किया था बल्कि इसका भी मकसद था .उन रेशों की रगड़ से उसके गुह्यांग में उठाने वाली उत्तेजना की लहरे उसके सम्पूर्ण शरीर को झनझना जाती थी इस असीम आन्नद से वह विरत नहीं होना चाह रही थी और वह यह भी नहीं चाहती थी की रोबी समझ सके की वह यौन -वासना से उत्तेजित हो रही है .

काफी देर तक यौन उत्तेजना का आन्नद लेने के बाद वह नहा कर पानी से बाहर आई .उसका बदन नहाने से चमक रहा था और वह अपने कमनीय बदन का प्रदर्शन करते हुई बाहर आई l
पानी से निकालने के पश्चात वह थोड़ी देर तक पास की चट्टान पर बैठ कर नहाने से शीतल हुए शरीर को गर्माहट पहुचने का प्रयास करने लगी ,थोड़ी देर बाद सूरज की किरणों से उसके शरीर में थोड़ी गर्मी का संचार हुआ .

अब वह वहां से जाने का उपक्रम करते हुए उठी ,अब तक वह आश्वस्त हो चुकी थी की उसका बेटा अब तक वहां से चला गया था .जों उसके शरीर के आकर्षण तथा खुद की उठाती जवानी के वशीभूत जो भी वह कर रहा था उस पर उसका कितना जोर था ? दोस्तों आप ये कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है l

खुद वह माँ होकर भी उसके यौवन के प्रभाव को तथा अपनी दमित वासना को कब तक दबा पाती ?

अब तक उस द्वीप पर उन्हें कई वर्ष बीत चुके थे . रोज सुबह होकर शाम फिर रात का आगमन होता था ,एक ऋतु के पश्चात दूसरी ऋतु आती और चली जाती थी ,वर्ष के बाद वर्ष बीत रहे थे ,यद्यपि उसकी आयु बढ़ रही थी फिर भी उसका उतना असर उसकी देह -यष्टि पर नहीं परिलक्षि होता था ,पर उसके बेटे को नवयौवन दिन पर दिन निखर रहा था l

वापस जाते हुए उसके मन -मस्तिष्क में विचारो का झंझावात उसे उद्विगन कर रहा था की उसने यह सब क्यों किया? अपने विचारो से लड़ते हुए ,इस आत्म-भर्त्सना से द्वंद्व करते हुए उसने सोचा की उसने जों भी किया सोच समझ कर ही किया था l

इसलिए उससे घबड़ाने या विचलित होने से कुछ होने वाला नहीं .और उसने भी जी भरकर इसका आन्नद लिया, अब इसके सिवा कोई रास्ता भी नहीं नजर आता l

The Author

Love Guru

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