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चूत की सुगंध ने मुझे मदहोश कर दिया

मैं पीतमपुरा से 30 साल का सुन्दर और स्मार्ट पुरुष हूँ। मैं आज आपको अपने जीवन की एक पुरानी लेकिन गर्म कहानी सुनाने जा रहा हूँ। मेरे पड़ोस में जेसिका रहती थी जो मुझसे करीब 6 साल छोटी थी। हमारे और जेसिका के परिवार के बहुत अच्छे सम्बन्ध थे। रुपा सुन्दर और जवान होती जा रही थी और साथ ही मेरी रुचि उसमें बढ़ती जा रही थी। वो जब चलती थी तो मेरी आँखें उसके कूल्हों पर ही अटक जाती थी। उसकी लहराती हुई चाल देखकर मैं तो जैसे पागल ही हो जाता था। वो मुझे चाचा कहती थी।

जेसिका अब कॉलेज़ में पढ़ने लगी थी। उसके उभार बढ़ने लगे थे और साथ ही उसकी मादकता भी बढ़ने लगी थी। उसका कद लगभग ५’२”हो गया था, उसका बदन भरा भरा सा दिखने लगा था। मैं रात को अक्सर उसे याद करके मुठ मारने लगा था। हमारा रिश्ता ऐसा बन गया था कि मैं एकदम से उसे कुछ नहीं कह पाता था। जब भी मुझे मौका मिलता मैं किसी ना किसी बहाने से उसे छू लेता था।

एक दिन दोपहर में मैं उसके घर गया तो वह अपनी दादी और माँ के साथ बैठी थी। उसके पैरों में दर्द हो रहा था। मैंने उससे कहा- लाओ, मैं तुम्हारा एक्यू-प्रेशर कर देता हूँ। वह मेरे करीब आकर बैठ गई। मैंने धीरे धीरे उसके पंजों पर एक्यू-प्रेशर करना शुरू किया। मुझे एक्यू-प्रेशर के काफी सारे दबाव-बिंदु मालूम हैं। मैं समझ गया कि उसका पैर ऊपर से लॉक हो गया है।

जेसिका इस समय स्कर्ट और टी-शर्ट पहने हुए थी। धीरे धीरे मैं उसके घुटनों तक प्रेशर देने के बहाने अपने हाथ फिराने लगा। थोड़ी देर में मैंने उसकी जांघों पर हाथ फिराना चालू कर दिया। जांघों को सहलाते हुए दो बार मैंने उसकी योनि भी सहला दी। जेसिका शरमाने लगी। उसकी माँ और दादी भी बैठी थी, अधिक कुछ हो नहीं सकता था।

समय बीतता गया, जेसिका पर और ज्यादा जवानी चढ़ने लगी। मैं एक्यू-प्रेशर करने के बहाने उस के पूरे बदन को छूने लगा, जिससे वो हमेशा शरमा जाती थी। मैं अभी तक यह समझ नहीं पा रहा था कि उसके मन में भी ऐसा कुछ हो रहा है क्या।

कुछ दिनों में जेसिका ने अपनी स्नातिकी पूरी कर ली। अब वो पूरी तरह से निखर चुकी थी। उसका कद ५’४” छाती ३३” कमर २८” और कुल्हे ३२” के लगभग हो गए थे। उसे देख कर मेरी जांघों के बीच जबरदस्त तनाव आ जाता था।

इस बीच मेरी शादी हो गई। मै अक्सर अपनी पत्नी के साथ सेक्स करते समय जेसिका को याद करके ऐसा महसूस करने लगा जैसे मैं जेसिका के साथ ही सेक्स कर रहा हूँ।

कुछ दिनों बाद जेसिका का रिश्ता आ गया और उसकी शादी मुम्बई हो गई। उसका पति दिखने में ज्यादा ठीक नहीं था। मुझे वो कहावत याद आ गई कि हूर के साथ लंगूर ही मजे करते हैं।

मुझे अपनी किस्मत पर बड़ा पछतावा होता था कि ऐसा करारा माल मेरी जगह इस लंगूर को मिल रहा है। उसकी शादी के बाद जब वो पहली बार मायके वापस आई तो उसको देख कर मैं तो एकदम दंग रह गया। थोड़े दिनों कि चुदाई के बाद तो उसका बदन जैसे क़यामत हो गया। उसके बात करने का तरीका भी बदल गया। थोड़े दिनों बाद वो मुंबई आने को कहकर चली गई और मैं इंतजार करने लगा कि कब मुंबई जाने का मौका मिले।

फ़िर कई महीनों मुझे मंत्रालय के काम से मुंबई जाने का मौका लगा। अब तक उसकी शादी को ७ महीने हो चुके थे। मुझे स्टेशन पर लेने के लिए उसके पति आये थे। हम लोग घर पहुंचे तो दरवाजे पर ही मेरे इंतजार कर रही थी। मैंने उसे दरवाजे पर ही अपनी बांहों में भर लिया और उसके माथे पर एक पप्पी दी। दोस्तों आप ये कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है l

थोड़ी देर में मैं तैयार होने बाथरूम में गया तो देखा जेसिका की अंडरवियर और ब्रा सूख रही थी। मैंने उसे उठा कर सूंघा, क्या मदहोश सुगंध थी ! मेरा लण्ड खडा हो गया। मैंने उसकी पैंटी को अपने लण्ड पर रख मूठ मारना शुरू कर दिया और अचानक मेरा पानी बह निकला। मैं फटाफट तैयार हुआ और मैं और उसके पति नाश्ता करके साथ में ही निकल गए।

मैं मंत्रालय चला गया और उसके पति अपने ऑफिस। करीब ४.०० बजे मेरा काम ख़त्म हुआ, मुझे वहां और ४ दिन रुकना पड़ रहा था। मैं करीब ६.०० बजे उसके घर वापस आया तो उसके पति पहले ही घर पर थे और उन्होंने मुझे बताया कि ऑफिस के काम से उन्हें ५ दिनों के लिए गोवा जाना पढ़ रहा है।

मेरी तो जैसे लॉटरी लग गई। वो अफ़सोस जता रहे थे कि मैं पहली बार आया और उन्हें जाना पड़ रहा है। मैंने शांत स्वर में कहा- भाई ऑफिस का काम है तो जाना ही पड़ेगा !

फिर रात १०.०० बजे की गाड़ी से वो गोवा चले गए। हमने उन्हें घर से ही ९.०० बजे विदाई दे दी थी।

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