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लेस्बियन सेक्स और डिल्डो का मजा

गतांग से आगे …..

मैंने देखा कि रचना मेरे लिए भी काले रंग की ही ब्रा और पैंटी लाई थी। मैंने उसको धन्यवाद कहा और कहने लगी- अब तू जल्दी से कपड़े पहन ले।

इस पर रचना बोली- पहले तू भी अपनी ब्रा और पैंटी पहन कर दिखा।

मैंने कहा- कल सुबह मैं पहन लूँगी !

परंतु रचना बार बार मुझे तभी ही बदलने को कह रही थी। मैंने उसको कहा- तुझको शराब चढ़ गई है, तू नहीं जानती कि तू क्या कह रही है।

इस पर रचना ने कहा- मैंने केवल एक ही गिलास पिया था और उसके बाद मैं अपने साथ काम करने वाले एक लड़के के साथ वहाँ से निकल गई थी।

फिर एकदम से रचना मेरे पास आई और मेरे गाल को चूम कर बोली- प्लीज़ बदल ले ना शालू !

अब मैं अंदर जाने लगी तो बोली- नहीं !!!! अंदर नहीं जाना, यहीं मेरे सामने बदल !

“तेरे सामने?” मेरे मुहँ से निकला।

“हाँ, मैं भी तो तेरे सामने नंगी खड़ी हूँ, तो तुझे क्या समस्या है?” रचना ने कहा।

मैंने भी सोचा, जो होगा देखा जाएगा और मैंने अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए। जब मैं पूरी नंगी थी तो रचना कहने लगी- शालिनी यार तू तो बहुत सैक्सी है, तेरे मोम्मे कितने बड़े हैं, दिल कर रहा है कि इनको खा जाऊँ।

“तू भी तो सैक्सी है मेरी जान !” मुझे लगा कि मेरी आवाज़ थोड़ी सी लरज़ती हुई हो गई है। जैसे ही मैंने अपनी ब्रा और पैंटी पहनी रचना कहने लगी- हाँ, अब ठीक है हम दोनों एक जैसे रंग की ब्रा और पैंटी में हैं।

“परंतु इससे क्या होगा?” मैंने पूछा।

“अभी ठहर जा, बताती हूँ”। कहकर रचना ने दूसरा थैला खोलना शुरू किया तो मुझे लगा कि कहीं कोई डिल्डो आदि तो नहीं निकाल रही है। परंतु रचना ने उस थैले में से दो जोड़ी लाल रंग की सेंडिल निकलीं और बोली, “यह पकड़ एक जोड़ा तेरे लिए और एक जोड़ा मेरे लिए। चल अब जल्दी से पहन ले।

“तू पागल तो नहीं हो गई है क्या?” मेरे मुँह से निकला।

“तू चाहे मुझे पागल कह या जो चाहे मर्ज़ी अब ज़रा इनको पहन कर दिखा दे।” अपने सेंडिल पहनते हुए रचना बोली।

मैंने सेंडिल पहने, बिल्कुल मेरे साइज़ के थे। तभी रचना ने मुझे फिर से चूमा और कहा- शालिनी, ज़रा एक बार चल कर दिखा ना ! मैं कुछ कदम चली तो रचना बोली- अब तू लग रही है असली सैक्सी लड़की। अब जरा अपनी पीठ मेरी ओर करना !

मैंने अपनी पीठ उसकी ओर की तो उसने पीछे से मेरे चूतड़ों पर हाथ फेरा और कहने लगी- तेरी गांड बहुत मस्त है शालू ! काश मैं लड़का होती तो आज तेरी गांड जरूर मार देती !

मेरी सांस जोर जोर से चल रहीं थीं, “तू क्या मारेगी मेरी गांड? आज मैं ही तेरी मार लेती हूँ !” कहते हुए मैं रचना के पीछे आ गई और उसको घोड़ी बना कर उसकी गांड पर जोर जोर से धक्के देने लगी। कुछ धक्कों के बाद मैं सीधी हुई और मैंने रचना को अपनी बाँहों में भर कर चूमना शुरू कर दिया।

रचना ने मेरा चेहरा अपने दोनों हाथों में लिया और मेरे होठों को चूमने लगी तभी मैंने थोड़े से अपने होंठ खोले और उसके होठों को अपने होठों में दबा कर चूसने लगी। मेरे हाथ उसकी गांड और पीठ को सहला रहे थे। थोड़ी देर बाद मैंने उसके दोनों मोम्मों को अपने हाथों में ले लिया और कभी हल्के और कभी जोर से दबाने लगी। दोस्तों आप ये कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है l

रचना की सिसकारियाँ निकल रहीं थीं। कुछ देर के बाद मैंने रचना को छोड़ दिया और पूछा- पहले यह बता कि आज कहाँ कहाँ गई थी? इस पर रचना कहने लगी- पार्टी से एक लड़के के साथ निकली तो तेज़ बारिश थी इसलिए एक बस स्टॉप के नीचे खड़े रहे और फिर सामान खरीद कर उस लड़के ने घर छोड़ दिया।

“सच बताना ! मुझे तो लग रहा है उस लड़के के साथ कहीं और भी गई थी?”

तब रचना ने कहा- नहीं और कहीं नहीं गई।

तभी रचना जोर से चिल्लाई- ओह्ह्ह शालू, मैं तो भूल गई। मैं खाना लेकर आई थी और वो जो आज पी थी उसी शराब की एक बोतल भी लाई हूँ ! मैंने उसको कहा- देखा, इस ब्रा पैंटी के चक्कर में तेरा दिमाग खराब हो गया है। मैं थैले में से खाने का सामान निकाल कर रसोई में रखने लगी। तभी रचना ने एक वोदका की बोतल निकाल कर मेरे सामने शेल्फ पर रख दी।

मैंने उसको पूछा- कभी पहले पी भी है?

तो बोली- नहीं, आज पहली बार एक ही गिलास पिया था फिर सोचा कि तेरे साथ ही पी कर देखूंगी ताकि अगर कुछ हो भी जाए तो तू है ना मुझे सँभालने के लिए और मुझसे लिपटने लगी।

“बस कर ! ठहर अभी, मैं तेरे लिए पैग बनाती हूँ !” कहते हुए मैंने हम दोनों के लिए पैग बनाया और खाने का सामान गर्म करने लगी। मैंने सब कुछ मेज़ पर लगा दिया और हम दोनों सिर्फ ब्रा पैंटी में बैठ कर पीने-खाने लगीं।

तभी रचना ने मेरी जांघ पर हाथ रखा और सहलाना शुरू कर दिया। तब मैंने भी अपने एक हाथ से उसकी जांघ को सहलाना शुरू कर दिया।

फिर मैंने अपनी एक बाँह उसकी कमर के पीछे से डाली और रचना की पैंटी में हाथ डाल कर उसकी गांड को सहलाने की कोशिश करने लगी तो रचना खड़ी होकर मेरी तरफ पीठ करके खड़ी हो गई और झुक कर अपनी गांड मेरी तरफ निकाल कर बोली- ले, कर ले जो करना है। जैसे चाहे वैसे चोद ले इसको !

मैंने उसकी गांड पर हाथ फेरते हुए उसको सीधा किया और उसको अपने ऊपर झुका कर उसको चूमने लगी। मेरे हाथ धीरे धीरे उसकी ब्रा के हुक को खोल रहे थे। मैंने उसकी ब्रा उतार फेंकी और उसके मोम्मों को चूमने चूसने लगी।

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The Author

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