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लेस्बियन सेक्स और डिल्डो का मजा

गतांग से आगे …..

फिर रचना ने मेरी भी ब्रा उतार दी और मेरे मोम्मों को दबाने लगी। मैंने उसको सोफे पर इस प्रकार लिटा लिया कि उसकी चूत बिल्कुल मेरे मुँह के सामने थी। एक ओर उसका सिर था और दूसरी ओर उसकी टाँगें !

मैं उसके मुँह से लेकर उसकी चूत के ऊपर तक उसको चूम चाट रही थी। मैंने उसको मोम्मों को खूब दबा दबा कर चूसा। रचना की सिसकारियाँ निकल रही थीं। मेरा एक हाथ अब उसकी जांघ को सहलाता हुआ उसकी पैंटी के ऊपर से उसकी चूत को भी सहला रहा था।

तभी मैं उसके होठों को अपने होठों में दबा कर चूसने लगी और अपनी उंगलियाँ धीरे धीरे उसकी पैंटी में घुसाने लगी। मैंने उसकी पैंटी को नीचे सरका दिया। उसकी गुलाबी फांकों वाली चूत मेरे सामने थी। मैंने अपनी जीभ उसकी चूत के आस पास उसकी जांघों पर फेरनी शुरू कर दी और एक उंगली रचना की चूत में डाल दी।

एकदम से रचना चिंहुकी और मेरा हाथ वहाँ से हटाने लगी। मैंने हाथ हटा लिया और फिर उसका हाथ भी पकड़ लिया और उसकी हथेली के ऊपर अपनी हथेली रख कर उसकी चूत के ऊपर रगड़ने लगी। कुछ देर के बाद मैंने अपनी उंगली फिर से उसकी चूत में डाली और धीरे धीरे अंदर-बाहर करने लगी। जब रचना ने कुछ नहीं कहा तो मैं समझ गई कि अब वह मस्त हो गई है।

अब मैंने अपनी दो उँगलियाँ उसकी चूत में डाल दीं और उसको चोदने लगी। दो तीन मिनट में ही उसके शरीर में बहुत जोरदार झुरझुरी सी हुई और रचना झड़ गई। उसकी चूत से पानी बाहर निकल रहा था परंतु मैं अभी भी अपनी उँगलियों से उसकी चूत को चोद रही थी। अब रचना ने हाँफना शुरू कर दिया तब मैंने पूछा- क्या हुआ? इतनी जल्दी झड़ गई?

रचना ने सिर्फ मुझे चूमा और मेरे हाथों को अपने मोम्मों पर रख कर जोर जोर से दबाने लगी। थोड़ी देर के बाद जब उसकी सांसें संयत हुईं तो कहने लगी- शालू, पता नहीं तेरे हाथों में क्या गरमी थी कि लंड से भी ज्यादा मज़ा आया और मैं झड़ गई। दोस्तों आप ये कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है l

मैंने उसको चूमते हुए पूछा- अब क्या इरादा है? खाना खा कर सोएं या कुछ और?

रचना खड़े होकर बोली- आ जा अब तू मेरी गोद में आ जा !

मैंने कहा- मैं तो तेरे से भी मोटी हूँ और भारी भी। रहने दे, तू दब जायेगी।

तब रचना ने कहा- कोई बात नहीं, तू आ तो सही !

मैं उसकी गोद में आकर लेट गई तो रचना ने मेरी पैंटी के ऊपर से मेरी चूत को चाटते हुए मेरे मोम्मों को दबाना शुरू कर दिया। मैंने उसका हाथ पकड़ कर अपनी चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया। तब रचना ने मेरी पैंटी उतारने की कोशिश की तो मैं हल्की सी उठी और अपनी पैंटी थोड़ी सी नीचे सरका कर फिर उसकी गोद में लेट गई। रचना ने मेरी चूत के आस पास चाटना शुरू कर दिया। कुछ ही देर में रचना की तीन उंगलियाँ मेरी चूत को चोद रहीं थीं। अब सिसकारियों की मेरी बारी थी।

“जोर से ! ओहहहह रचना और जोर से चोद दे मुझे !” मैं कह रही थी।

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