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ये जवानी है दीवानी-3

दोस्तो ये कहानी मा और बहन की चुदाई पर आधारित है जिन भाइयो को इन रिश्तो की कहानियाँ पढ़ने मे अरुचि होती है कृपया वो इस कहानी को ना पढ़े.

दोस्तों आपने ये जवानी है दीवानी के पहले भाग में पढ़ा था..उमेश ने बताया की तुम्हारी मा बहुत बड़ी चुदासी है उसे अपना मोटा लंड कैसे भी करके दे ही दो…अब आगे…

जमुना- सच उर्मिला सोच जब मेरा छ्होटा सा बेटा अपनी मम्मी की चूत इतने प्यार से सहलाता है तो फिर अगर तेरा जवान बेटा तेरी इस गदराई चूत को अपने मूह से चुसेगा तो तुझे कितना मज़ा आएगा, और वैसे भी तू इतनी मस्त घोड़ी है कि तेरा बेटा एक बार तुझे पूरी नंगी देख लेगा तो अपनी मा की इस गदराई फूली हुई रसीली चूत को मारे बिना नही रह पाएगा.

जमुना की बात सुन कर प्रभात का मोटा लंड अपनी मा को चोदने के लिए बुरी तरह तन चुका था और वह अपनी मम्मी की गदराई जवानी का रस दरवाजे के पीछे छुपा हुआ अपनी आँखो से पी रहा था.

उर्मिला- अरे तेरी किस्मत अच्छी है पर मेरा बेटा भला ऐसा क्यो करेगा.

जमुना- अरे तुझे क्या पता तेरे सोने के बाद तेरा बेटा भी तेरी चूत पर हाथ मार देता हो.

उर्मिला- मुस्कुराते हुए चल हट मेरा बेटा ऐसा नही है.

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जमुना- चल शर्त लगा ले, जिसकी मा इतनी मालदार हो उसका बेटा उसकी चूत का प्यासा ना हो ऐसा हो ही नही सकता है, वह ज़रूर तुझे चोदने की फिराक मे रहता होगा पर तू ध्यान ही नही देती है.

उर्मिला- अच्छा चल तेरी बात मान लेती हू पर यह कैसे पता लगेगा कि मेरा बेटा मुझे चोदना चाहता है.

जमुना- अच्छा तू एक काम कर आज अपने बेटे से बात करते हुए इतना कहना बेटा मैं पहले से बहुत मोटी हो गई हू ना फिर देखना तेरा बेटा सबसे पहले तेरे मोटे-मोटे दूध उठा हुआ पेट और फिर तेरे भारी भरकम चूतादो को कैसे घूर कर देखता है, और फिर देखना किसी बहाने से या तेरी तारीफ करके तुझसे कैसे चिपकने की कोशिश करेगा, देखना उसका मन करेगा कि वह तुझे पूरी नंगी करके खड़े-खड़े अपने मोटे लंड पे चढ़ा ले. जब काफ़ी देर बाद जमुना वहाँ से चली जाती है तब प्रभात आँख मलता हुआ बाहर अपनी मा के पास आकर बैठ जाता है.

उर्मिला-उठ गया बेटे?

प्रभात- हाँ मा

उर्मिला- अच्छा बेटे क्या मैं ज़्यादा मोटी हो गई हू

प्रभात- अपनी मा के मोटे-मोटे दूध उसका उठा हुआ मखमली पेट और फिर उसके भारी चूतादो को खा जाने वाली नज़रो से देखता हुआ अरे नही मा तुम तो बहुत अच्छी दिखती हो.

उर्मिला- क्या मैं तुझे बहुत अच्छी लगती हू.

प्रभात- अपनी मा को अपनी बाँहो मे भर कर, अरे मा किस बेटे को अपनी मा अच्छी नही लगेगी.

उर्मिला- मुझे देख कर तेरा क्या मन करता है बेटा.

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प्रभात- अपनी मा का भरा हुआ चेहरा अपने हाथो मे थाम कर, मा मेरा दिल करता है अपनी मा को चूमता रहू और उसे खूब प्यार करू और फिर प्रभात अपनी मा के गुलाबी गालो को चूमता हुआ अपने दोनो हाथो से उसके भारी चूतादो को सहलाने लगता है, उर्मिला अपने बेटे से पूरी तरह चिपक जाती है, उस समय दोनो मा बेटे के लंड और चूत एक दूसरे मे समा जाने को मचल जाते है.

शाम को ज्योति जब लॉट आती है तो उर्मिला अगले दिन उसके जाने की तैयारी करने लगती है, इधर प्रभात शाम को घूमने निकलता है तो उसकी मुलाकात उमेश से हो जाती है और दोनो बाते करते-करते शराब लेकर एक आम के बाग मे जाकर बैठ जाते है, दोनो के बीच जाम पर जाम शुरू हो जाते है.

उमेश- अच्छा प्रभात भैया एक बात पुंचू.

प्रभात- एक नही दो पूछ उमेश. आप कहानी मस्ताराम डॉट नेट पर पढ़ रहे है l

उमेश- भैया तुम्हारा कैसी औरत को चोदने का मन करता है.

प्रभात- नशे मे मस्त हो रहा था, अरे उमेश मेरा भी मन कुछ दिनो से ऐसी औरत को चोदने का करने लगा है जैसा मन तेरा करता है.

उमेश- नशे मे तुंन होकर मतलब भैया.

प्रभात- अरे उमेश जैसा मन तेरा अपनी मा को चोदने का करता है वैसा ही मेरा मन अपनी मा को चोदने का करने लगा है

उमेश- सच भैया बुरा मत मानना पर तुम्हारी मम्मी बहुत जोरदार माल है

प्रभात- हाँ उमेश मैं दो दिन से दिन रात अपनी मा की गदराई जवानी को ठोकने के लिए तरस रहा हू

उमेश- क्या तुम्हे अपनी मा बहुत अच्छी लगती है

प्रभात- हा उमेश तू सच कहता था मैं अपनी मा के भारी चूतादो को देख -देख कर पागल रहने लगा हू जब उसकी मोटी गंद और जंघे इतनी चौड़ी नज़र आती है तो उसका गुलाबी फूला हुआ भोसड़ा कैसा होगा.

उमेश- भैया ठकुराइन को वैसे तुम्हारे जैसे मोटे लंड से ही मज़ा आएगा, सच भैया मैंने पूरे गाँव मे सुन रखा है तुम्हारी मा बहुत चुदासी है उसे अपनी चूत मे मस्त लंड चाहिए, सारा गाँव उसकी गदराई जवानी को चोदने के लिए तरस रहा है पर वह किसी को घास तक नही डालती है.

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प्रभात- अरे उमेश एक बार जब अपने बेटे का मोटा लंड देखेगी तो अपने बेटे के लंड पर चढ़े बिना नही रह पाएगी पर

यार उमेश समझ मे नही आता अपनी मा को कैसे चोदु.

उमेश- अरे भैया मैं भी एक समस्या से घिरा हू और उसका उपाय आ जाता तो आपकी समस्या भी हल हो जाती और आप आराम से अपनी मा की चूत चोद सकते थे.

प्रभात- वह क्या

उमेश- भैया मैं तो जब भी अपनी बीबी को चोदता हू मुझे मेरी मा ही नज़र आती है जब अपनी बीबी की मस्त फूली हुई चूत देखता हू तो मुझे ऐसा लगता है जैसे मैं अपनी मा की चूत को दबा और चूम रहा हू, सच पूछो तो जब मैं अपनी बीबी को अपनी मा समझ कर चोदता हू तो मुझे चुदाई करने मे बड़ा मज़ा आता है, पर क्या बताउ बस समझ नही आता की कैसे अपनी मा की चूत चोदु.

कहानी जारी है ….. आगे की कहानी पढने के लिए निचे लिखे पेज नंबर पर क्लिक करे …..

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