पतियों की अदला बदली का खेल

पतियों की अदला बदली का खेल ( Patiyon Ki Adadla Badli Ka Khel )

हेल्लो मेरे प्यारे प्यारे देवर राजाओं कैसे है आप सब आज मै जानकी देवी अपनी सच्ची चुदाई की घटना जो मेरे साथ घटी आप सभी को टाइम निकाल के भेज रही हूँ आशा करती हूँ आप लोग मजे से पढेंगे | पतियों की अदला बदली का खेलआशा है कि आपको अच्छी लगेगी। मेरे पतिदेव शैलेश की अकस्मात मौत के बाद मेरी शादी मेरे देवर से करवा दी गई जो कि सिंगापुर में रहते हैं। उनकी पत्नी का भी एक एक्सीडेंट में 3 साल पहले देहांत हो गया था। मैं उस समय कॉलेज में पढ़ ही रही थी। दो तीन महीने बाद मेरी शादी की बात चली और मेरे जेठ का नाम बीच में लाया गया। काफी विचार विमर्श के बाद यही तय हुआ कि हमारी शादी कर दी जाये। उन्होंने मुझे पहले पढाई खत्म कर लेने के लिए कहा। पढाई ख़त्म हो जाने के बाद वो मुझे ले जायेंगे।

मेरे सास ससुर को भी यह बात ठीक लगी। मेरे जेठ रघु लम्बे कद के ताकतवर पुरुष हैं। अभी तो मेरी दूसरी साल ही चल रही थी। वो हर साल दो बार घर आया करते थे। शादी के तुरंत बाद जब हमें एक कमरे में साथ में सोने को भी मिला तब भी उन्होंने मेरे साथ कुछ नहीं किया। शायद भाई की मृत्य के सदमे ने उन्हें कुछ भी करने से रोक रखा था। मैं खुद से तो क्या कहती।

पर ६ महीने गुजर चुके थे। धीरे धीरे समय बीतने लगा और मैं पढाई में ध्यान देने लगी। गर्मियों की छुट्टीओं में रघु घर आये। मेरे दूसरा साल खत्म हो गया था। रिजल्ट भी अच्छे आये थे। मैं खुश थी. रात के खाने के बाद वो मेरे सास ससुर से बातें करने लगे और मैं बर्तन धोने लगी। सास ससुर उन्हें समझा रहे थे कि जानकी को कहीं बाहर घूमने ले जाओ , उसका भी दिल बहल जायेगा। अब तो उसकी परीक्षाएं भी ख़त्म हो गई हैं। रघु उन सब बातो को चुप चाप सुनते रहे और कहा की छुट्टियां काफी काम हैं और काम काफी ज्यादा।

कभी बाद में समय मिलने पर घुमा लाएंगे। मैं सब सुन रही थी और मन ही मन बहुत उदास हुई। पति को गुजरे हुए १ साल से ज्यादा हो गया था। अब मेरा भी मन करता था कि फिर से कोई मेरे बदन से खेले। सास ससुर नीचे अपने कमरे में सोते थे। हमारा कमरा ऊपर था और सामने छत थी। गर्मी अधिक थी पर मेरे कमरे में एयर कंडीशनर लगा हुआ था। बर्तन साफ़ हो जाने के बाद मैं अपने कमरे में जाने लगी।

ससुर जी रघु को समझा रहे थे कि वो मेरा ख्याल रखें। कमरे के अंदर जाकर मैं चेंज करने लगी। सास ससुर के सामने मैं साड़ी ब्लाउज पहनती थी पर अपने कमरे के अंदर मैं मैक्सी या स्कर्ट टॉप पहन लिया करती थी। जब रघु कमरे में अंदर आये तो मैं साड़ी उतार चुकी थी और ब्लाउज और पेटीकोट में थी।

ब्लाउज के हुक खोल रही थी कि दरवाजा खुला और वो अंदर आ गए। मुझे चेंज करता देखकर वो बाहर जाने लगे तो मैंने उन्हें रोकते हुए कहा कि प्लीज आप मेरी वजह से बाहर न जाएँ। मैं बाथरूम में चेंज कर लूंगी। वैसे भी आप मेरे पति हो। आपके सामने कपडे बदलने में मुझे कोई शर्म नहीं आनी चाहिए। रघु को डाइवोर्स लिए ३ साल हो चुके थे। शायद उन्हें भी अब शरीर की भूख सताने लगी थी।

ऊपर से २१ साल की कमसिन मैं। किसी का भी मन डोल सकता था। मैंने उनका हाथ पकड़ कर उन्हें बिस्तर पर बिठा दिया। उनकी तरफ पीठ करके ब्लाउज उतारने लगी। सामने शीशे में खुद को देखते हुए ब्लाउज के बटन खोल रही थी। शीशे में देखा तो वो मेरी तरफ ध्यान से देख रहे थे। हिम्मत करके मैंने धीरे से ब्लाउज उतार दिया। वो एक टक मेरी ओर देखे जा रहे थे।

मेरा फिगर 36C – 26 – 38 है। अब मुझे बड़ी शर्म आने लगी कि पता नहीं वो क्या सोचेंगे। मैंने जल्दी से सामने पड़ी मैक्सी पहन ली। फिर मैं उनके पास आकर बैठ गई। उनसे सिंगापुर के बारे में बातें करने लगी।

थोड़ी देर यहाँ वहां की बातें करने के बाद वो पूछने लगे कि क्या तुम रोज़ यही कपडे पहन कर सोती हो ? मैं क्या कहती। मुझे चुप देख कर वो कहने लगे कि रात को सोते वक़्त ढीले कपडे पहनने चाहिए। मैंने कहा मैंने मैक्सी पहनी तो है। वो कहने लगे और अंदर इतने टाइट कपडे पहने हैं उसका क्या ?तब तो बड़ा कह रही थी कि पति के सामने शर्म। मैंने शर्माते हुए कहा कि मुझे शर्म आती है। वो कहने लगे कि अच्छा अगर मैं उतारूँ तो? मैंने कहा आप तो मेरे पति हो आपका तो हक़ बनता है। वो कहने लगे कि जानकी मैं चाहता हूँ कि तुम आराम से रहो मेरी तरफ से तुम्हें कोई तकलीफ न हो। फिर उन्होंने मुझे खड़े होने को कहा। वो खुद मेरे पीछे खड़े हो गए. मेरी मैक्सी के ऊपर से ही उन्होंने मेरी ब्रा का हुक खोल दिया।

मेरी मैक्सी धीरे धीरे ऊपर उठाई और मेरे पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया। पेटीकोट सरक कर तुरंत नीचे गिर गया। प्यार से मेरी गर्दन के पीछे किस किया और कहा यह मैक्सी ही काफी है कुछ और मत पहना करो रात में सोते समय। मैंने सामने से अपनी मैक्सी के अंदर हाथ डालकर अपनी ब्रा को बहार निकाला और फिर अपनी पैंटी भी उतार दी। अब मैं सिर्फ मैक्सी में थी। मेरे कन्धों को पकड़कर उन्होंने मुझे अपनी तरफ घुमा लिया। मैंने अपनी आँखें बंद कर ली और सोचा की शायद अब वो मुझे किस करेंगे। पर ऐसा कुछ नहीं हुआ।

वो ऐसे ही मुझे देखते रहे और फिर कुछ ना होता पाकर मैंने अपनी आँखें खोल दी। मैंने उन्हें अपनी आँखों में देखते हुए पाया। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि रात बहुत हो गई है अब सो जाना चाहिए। हम दोनों बिस्तर पर लेट गए। मेरी तो हिम्मत ही नहीं हो रही थी उनसे बातें करने की। उन्होंने ही बातें शुरू की , मेरे रिजल्ट के बारे में पूछा। घर के हालातों के बारे में पूछा। यह भी पूछा की मुझे क्या अच्छा लगता है। कॉलेज में दोस्तों के बारे में। सहेलियों के बारे में। मैं सब बताती रही। एकदम से वो पूछ बैठे कि कॉलेज में मेरी सहेलियों के बॉयफ्रेंड तो होंगे ?

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मैंने कहा हाँ हैं तो। तुम्हारा तो कोई बॉयफ्रेंड नहीं है ना ? मैंने कहा रघु आप भी ना कैसी बातें करते हैं। वो पूछने लगे कि कॉलेज में मेरी सबसे सबसे अच्छी दोस्त कौन है? मैंने कहा कविता मेरी सबसे अच्छी दोस्त है। उन्होंने पूछा कि कविता का कोई बॉयफ्रेंड है ? मैंने कहा हाँ है तो ? वो कहने लगे कि फिर तो उसने कविता के साथ के साथ बहुत कुछ किया होगा ? और कविता ने तुम्हें सब कुछ बताया भी होगा ? मैंने कहा हाँ कविता मुझे सब कुछ बताती है। रघु पूछने लगे कि क्या क्या किया उन्होंने ?मैंने कहा मुझे शर्म आती है। इसपर रघु ने कहा कि बताना तो पड़ेगा। फिर वो वही सब मेरे साथ भी करेंगे। मैं तो खुश हो गई। मैंने कहा मैं जरूर बताउंगी की कविता के बॉयफ्रेंड ने उसके साथ क्या क्या किया।

पर अभी तो आप वो सब करो मेरे साथ जो आप चाहते हो। मेरी परमिशन मिलने पर वो बिस्तर से उठ गए , मुझे इशारा किया कि मैं भी उठ जाऊं। मैं उठ कर खड़ी हो गई। उन्होंने मेरे चेहरे को अपने हाथों में भरा और अपने होंठ मेरे थरथराते होठों पर रख दिए।

बड़ी देर तक मेरे होठों को चूसते रहे। उन्हें भी कई सालों में कुछ नहीं मिला था। मैं भी साल भर से प्यासी थी इसलिए मैंने भी पूरा सहयोग किया। करीब 15 मिनट के बाद मैंने महसूस किया कि उनके हाथ मेरी पीठ पर चल रहे हैं। वो अपने हाथों से मुझे कस रहे थे जिससे मेरे बूब्स उनके सीने से चिपके जा रहे थे। थोड़ी देर में ही उनका एक हाथ मेरे चूतड़ तक पहुँच गया।

मैक्सी के ऊपर से ही वो मेरे हिप्स को महसूस करने लगे। जब उन्होंने मेरे होठों को थोड़ी देर के लिए छोड़ा तो मैंने कहा : आप कहें तो मैं मैक्सी उतार दूँ ?

उन्होंने प्यार से मेरे हिप्स दबाते हुए कहा : तुम क्यों तकलीफ करोगी अब से मैं ही तुम्हारे कपडे उतरूंगा और मैं ही पहनाऊंगा। मेरा मन तो ख़ुशी से नाच उठा। उन्होंने मेरी मैक्सी कमर तक ऊपर उठाई और मेरी नंगी कमर पर हाथ फिराते हुए मेरे हिप्स पर ले गए। क्या बताऊँ इतना मज़ा आ रहा था मन कर रहा था कि वो यह सब बस करते ही रहें। मेरी मैक्सी कमर तक चढ़ी हुई थी।

कमर से नंगी थी। उन्होंने मुझे बिस्तर पर बिठा दिया और खुद बिस्तर पर चढ़ कर दीवार पर बैक रेस्ट लेकर बैठ गए। मेरे कन्धों पर हाथ रखा और अपनी ओर खींच लिया। अब मैं उनके पैरों के बीच बैठी थी और मेरी पीठ उनकी तरफ थी। उन्होंने मेरे कन्धों को चूमना शुरू किया। गर्दन के पीछे जब वो किस कर रहे थे तो इतना अच्छा लग रहा था। कितने समय बाद यह सब हो रहा था।

मेरा तो मन कर रहा था कि यह सब कभी ख़त्म ना हो। मेरी गर्दन के पीछे किस करते करते उन्होंने अपने हाथ आगे करके मेरे बूब्स को अपने हाथों में भर लिया और उन्हें अपने मजबूत हाथों में उठा लिया और हलके हलके मसलने लगे। अभी भी वो मैक्सी के ऊपर से ही यह सब कर रहे थे। मैं तो लम्बी लम्बी साँसे भर रही थी और वो मेरे बूब्स मसले जा रहे थे। फिर उन्होंने अपनी टी शर्ट उतार दी। अब वो सिर्फ शॉर्ट्स में थे। मेरी मैक्सी भी धीरे धीरे करके उतारने लगे। मैंने भी अपने हाथ ऊपर कर दिए ताकि वो आराम से मैक्सी उतार सकें।

एक बार फिर से उन्होंने मेरे बूब्स अपने हाथों में भरे और मसलने लगे। मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था , कई दिनों के बाद कोई मर्द मेरे बदन से इस तरह खेल रहा था। और सबसे बड़ी बात मेरे जेठ जो कि मेरे पति बन गए हैं मेरे साथ यह सब करने के लिए तैयार हो गए हैं। लग रहा था कि अब यह रिश्ता नार्मल हो जायेगा और हम पति पत्नी की तरह रह पाएँगे। काफी देर बूब्स मसलने के बाद और गर्दन के पीछे किस करने के बाद उन्होंने मेरी कमर पर हाथ फिराना शुरू किया। मेरी झांघें सहलाने लगे। पेट के निचले हिस्से पर भी हाथ फिराने लगे।

शायद वो मेरी चूत को छूना चाहते थे। उनका इशारा समझकर जब भी उनके हाथ मेरी चूत के पास आते मैं अपनी टाँगे और खोल लेती। आखिरकार उनका हाथ गया। उन्होंने जल्दी से अपना हाथ वहां से हटा लिया। इसका कारण मुझे बाद में पता चला। उन्होंने जल्दी से मुझे पीठ के बल बिस्तर पर लिटा दिया और मेरी बगल में लेट गए करवट लेकर। मेरे होठों पर अपने होंठ कर दिए और किस करने लगे।

यह हमारा पहला चुम्बन था। वह हलके हलके मेरे होठों पर अपने होंठ फिरा रहे थे। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। अब रिश्ता नार्मल होता लग रहा था। लग रहा था जैसे अब सब कुछ ठीक हो जायेगा और हर रात मुझे पति का सुख मिलेगा। मैं चाहती थी कि वो मेरे साथ वो सब करें जो वो चाहते हैं और मैं उनका साथ दूँ। थोड़ी देर में उन्होंने मेरे निचले होंठ को अपने होठों में लेकर चूसना शुरू कर दिया।

जब वो थोड़ी देर को रुके तो मैंने भी उनके ऊपरी होंठ को अपने होठों में भर कर चूसना शुरू कर दिया। मेरा इस तरह साथ देना शायद उन्हें अच्छा लगा। उन्होंने अपना दायाँ हाथ मेरे बाएं बूब पर रखा और उसे दबाने लगे। फिर अचानक मेरे होठों को छोड़कर मेरे बाएं बूब के निप्पल को अपने मुँह में भर लिया और जोर जोर से चूसने लगे। मैंने उनके बालों में हाथ फिराने लगी। थोड़ी देर बाद भी जब उनकी स्पीड काम नहीं हुई तो मैंने कहा मैं कहीं भागी नहीं जा रही। आप आराम से कीजिये। उन्होंने फिर मुझसे पूछा कि तुम्हें कैसा लग रहा है। मैंने कहा मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। यह अच्छा हुआ कि हमारे बीच की दूरियां कम हो गई हैं। वो मेरे एक बूब को चूसते और दूसरे को अपने हाथों से मसल रहे थे।

एक सवाल करते और फिर बूब चूसने में बिजी हो जाते। वो पूछते रहते बीच बीच में कि मुझे दर्द तो नहीं हो रहा ? क्या मैं उन्हें अपना पति मान चुकी हूँ ?

क्या वो ठीक से कर रहे हैं ? मैं हर सवाल का जवाब देती जा रही थी और एन्जॉय करती जा रही थी। उन्होंने कहा कि वो अपनी छुट्टियाँ बढ़वाने की सोच रहे हैं। मैं तो खुश हो गई। और पलटकर मैंने उन्हें होठों पर किस कर दिया। फिर उन्होंने कहा कि हम हनीमून पर न जाकर मम्मी पापा को तीर्थ यात्रा पर भेज देते हैं। घर पर अकेले बहुत समय मिलेगा और मैं तुमपर ध्यान दे पाउँगा जो मैं इतने समय से नहीं दे पाया। मुझे भी उनका सुझाव अच्छा लगा। मैंने उन्हें कस कर बाँहों में जकड लिया और अपने होंठ उनके होठों पर रख दिए यह कहते हुए की रघु मैं आपसे बहुत प्यार करती हूँ। आपके लिए कुछ भी करुँगी। उन्होंने भी जवाब में मुझे बहुत किस किया और बूब्स मसले। मेरी चूत तो पानी छोड़े जा रही थी।

मैं खुद से ऐसा कैसे कहती की चोदो मुझे बस ऑर्गैस्म पर ऑर्गैस्म हो रहे थे और एक वो थे की अंदर आने का नाम ही नहीं ले रहे थे। आखिर कार वो भी थक गए और सो गए। मैं काफी देर तक सोचती रही की उन्होंने इतना सब कुछ होने के बाद भी आखिर मेरी चुदाई क्यों नहीं की ?

अगले दिन सुबह वो मुझसे पहले उठ गए। जब मैं नाश्ता बनाने नीचे पहुंची तो वो मेरे सास ससुर के साथ बैठे चाय पी रहे थे और उनके जाने का प्रोग्राम उन्हें बता रहे थे। सास ससुर ने पहले तो थोड़ी आना कानी की फिर मान गए। जब तक मैं नाश्ता बना कर लायी तब तक तो रघु ने उनके जाने के लिए टिकट भी बुक करवा दिए थे। ३ दिन बाद उनकी रवानगी थी। यह तीन दिन कैसे कटेंगे यही सोच सोच कर मैं परेशान हो रही थी और रात वाली बात सोच कर भी। आखिरकार दिन निकला और रात आ गई। मैं कुछ ज्यादा ही बन संवर कर तैयार हो रही थी। इस रात भी उन्होंने मुझे नहीं चोदा। मैं लाज शर्म के मारे उनसे पूछ भी नहीं पायी कि उन्होंने ऐसा क्यों किया ? हर रात को ऐसा ही होता था और मेरी हिम्मत नहीं होती थी पूछने की। ऐसा करते करते तीन दिन बीत गए। आज दोपहर को सास ससुर को जाना था। मैं सुबह से ही किचन में लगी थी। यह सामान पैक कर रहे थे। रघु उन्हें ट्रेन में बिठाने के लिए ग्यारह बजे घर से निकले , मुझसे कहके गए कि एक बजे तक घर वापस आ जाऊंगा। मैं नहाने चली गई।

नहा धोकर मैंने सलवार सूट पहन लिया और बैडरूम में आकर बैठ गई। बहुत सोचा कि आज तो जरूर पूछूंगी रघु से कि उन्हें मेरे साथ सेक्स करने में क्या तकलीफ है ?

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